Delhi Pollution 2026 : इस बार दिल्ली फिर बन सकती है गैस चैंबर ! दिल्ली में दिवाली के दौरान बढ़ सकता है प्रदूषण का खतरा

नई दिल्ली।

दिल्ली में सर्दी शुरू होने से पहले ही ( Delhi Pollution 2026 ) मौसम को लेकर एक बड़ा संकेत सामने आया है। प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा El Niño 2026 ( एल नीनो (El Niño) प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान) के आखिरी महीनों में बहुत मजबूत होने की ओर बढ़ रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन World Meteorological Organization (WMO) के मुताबिक, इसके सितंबर-नवंबर 2026 में और मजबूत होने तथा नवंबर-दिसंबर के आसपास चरम पर पहुंचने का अनुमान है। WMO का अनुमान है कि El Niño के फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना करीब 100 प्रतिशत है।

हालांकि इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि दिल्ली में निश्चित रूप से रिकॉर्ड स्तर का प्रदूषण होगा। El Niño का प्रभाव किसी एक शहर के प्रदूषण को सीधे तय नहीं करता। लेकिन यह तापमान, बारिश और वायुमंडलीय परिस्थितियों को प्रभावित कर सकता है, जो आगे चलकर दिल्ली-NCR में प्रदूषण के फैलाव की परिस्थितियों को बदल सकते हैं। WMO ने भी साफ किया है कि El Niño की तीव्रता अकेले किसी क्षेत्र में प्रभाव की गंभीरता तय नहीं करती।

दिवाली और पराली का दौर एक साथ

दिल्ली के लिए चिंता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में खेतों में पराली जलाने की घटनाएं आम तौर पर बढ़ती हैं। आधिकारिक निगरानी में पंजाब और हरियाणा के लिए पराली जलाने का मौसम 15 सितंबर से 30 नवंबर तक माना जाता है। 2025 में पंजाब और हरियाणा में farm-fire घटनाओं में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन घटनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुईं।

2026 में भी अक्टूबर के दौरान खेतों में आग की संख्या बढ़ने और नवंबर के शुरुआती दिनों में इसके ज्यादा होने की संभावना जताई जा रही है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, इस साल दिल्ली के PM2.5 पर पराली के प्रभाव को लेकर विशेषज्ञ सतर्क हैं।

पिछले साल की तस्वीर हालांकि कुछ बेहतर थी। Decision Support System के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दिल्ली के PM2.5 में पराली का योगदान 10 प्रतिशत से अधिक केवल आठ दिनों में रहा और 20 प्रतिशत से अधिक सिर्फ एक दिन रहा। इसके मुकाबले 2024 में ऐसे 14 दिन थे, जब यह योगदान 20 प्रतिशत से ऊपर गया था।

2026 में फिर क्यों बढ़ सकती है चिंता?

दिल्ली की हवा की गुणवत्ता केवल पराली से तय नहीं होती। वाहन, सड़क और निर्माण की धूल, उद्योग, स्थानीय उत्सर्जन और मौसम की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

यदि नवंबर में हवा की गति कम रही, वातावरण में प्रदूषकों का फैलाव कमजोर रहा और बारिश कम हुई, तो अलग-अलग स्रोतों से निकलने वाला प्रदूषण दिल्ली की हवा में ज्यादा समय तक बना रह सकता है। ऐसे में दिवाली के पटाखों से निकलने वाला अतिरिक्त धुआं पहले से मौजूद प्रदूषण को और बढ़ा सकता है।

यही वजह है कि इस साल El Niño, पराली और दिवाली का समय एक साथ आने को लेकर चिंता जताई जा रही है। हालांकि इसे सीधे तौर पर “प्रदूषण का निश्चित कारण” कहना अभी जल्दबाजी होगी।

2025 में पराली की घटनाओं में आई थी बड़ी गिरावट

2025 में पंजाब में 5,114 farm-fire घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2024 के 10,909 मामलों से करीब 53 प्रतिशत कम थीं। हरियाणा में भी 2024 के 1,406 मामलों के मुकाबले 2025 में 662 घटनाएं दर्ज हुईं। CAQM के अनुसार, दोनों राज्यों में यह 2021 के बाद सबसे कम स्तर था। CAQM

इससे यह संकेत मिलता है कि पराली जलाने को नियंत्रित करने के प्रयासों का असर पड़ा है। लेकिन दिल्ली के प्रदूषण के लिहाज से समस्या अभी समाप्त नहीं हुई है। खासकर उन दिनों में जब हवा की दिशा उत्तर-पश्चिमी हो और खेतों में आग की घटनाएं बढ़ रही हों, बाहरी स्रोतों का योगदान बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक जमीन पर काम करना होगा जरूरी

पराली जलाने की घटनाओं में कमी बनाए रखने के लिए केवल प्रतिबंध और जुर्माना पर्याप्त नहीं होंगे। फसल अवशेषों का खेत में ही प्रबंधन यानी in-situ management और पराली को उद्योगों, ऊर्जा तथा अन्य उपयोगों के लिए खेतों से बाहर ले जाने यानी ex-situ management की व्यवस्था भी प्रभावी ढंग से लागू करनी होगी।

CSE की कार्यकारी निदेशक (रिसर्च एंड एडवोकेसी) अनूमिता रॉय चौधरी ने भी इस बात पर जोर दिया है कि पराली जलाने का रुझान नियमों के प्रवर्तन के साथ-साथ खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन की वास्तविक तैयारी पर निर्भर करेगा।

दिल्ली वालों के लिए क्या मतलब?

अगर नवंबर में मौसम प्रदूषण के फैलाव के लिए प्रतिकूल रहा और उसी दौरान पराली की घटनाएं बढ़ीं तथा दिवाली के पटाखों का धुआं जुड़ गया, तो दिल्ली में PM2.5 का स्तर तेजी से बढ़ सकता है।

इसका असर सबसे पहले संवेदनशील लोगों पर दिखाई दे सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी समस्याओं वाले लोगों को प्रदूषित हवा में ज्यादा परेशानी हो सकती है। आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं। बहुत खराब हवा की स्थिति में खुले में व्यायाम और अन्य outdoor गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

असली तस्वीर नवंबर में साफ होगी

2026 में El Niño का मजबूत होना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण जलवायु संकेत है, लेकिन इससे अकेले यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दिवाली पर दिल्ली का प्रदूषण कितना होगा। WMO के अनुसार El Niño का असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकता है और अन्य जलवायु कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं।

इसलिए दिल्ली के लिए असली तस्वीर नवंबर में हवा की गति, दिशा, बारिश, तापमान, पराली जलाने की वास्तविक घटनाओं और स्थानीय प्रदूषण स्रोतों के संयुक्त प्रभाव से सामने आएगी।

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि 2026 की सर्दी में दिल्ली के सामने प्रदूषण की चुनौती को हल्के में नहीं लिया जा सकता। पराली की घटनाओं में पिछले साल आई कमी एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन दिवाली के पटाखों और प्रतिकूल मौसम के साथ प्रदूषण बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

एक जरूरी तथ्य-सुधार: आपके मूल मसौदे में “सुपर अल नीनो” और “इससे नवंबर में दिवाली के वक्त प्रदूषण से लोगों का दम घुट सकता है” जैसी भाषा काफी निर्णायक है। WMO आधिकारिक रूप से “very strong El Niño” शब्द इस्तेमाल करता है और यह भी कहता है कि El Niño की ताकत अकेले किसी खास इलाके में प्रभाव की गंभीरता तय नहीं करती। इसलिए ऊपर के लेख में संभावना और जोखिम की भाषा रखी गई है, ताकि खबर तथ्यात्मक रहे।

PM Modi Speech Independence Day 2026 : परिवर्तन के 12 वर्ष: विकसित भारत की दिशा में भारत की तेज़ रफ्तार यात्रा

 

Leave A Reply

Your email address will not be published.

रात में देर से सोने की आदत पड़ सकती है भारी! CIBIL Score कम हो रहा है? 7 बड़ी गलतियां जानिए, ऐसे बनाएं 750+ Credit Score