स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत में आए व्यापक बदलावों और विकास की गति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत आज विनिर्माण, डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, नवाचार और सामाजिक सुरक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन बदलावों का लक्ष्य भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। pmindia.gov.in पीएम इंडिया पर छपी खबर के असुसार….
विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत ( PM Modi Speech Independence Day 2026)
प्रधानमंत्री ने भारत के बढ़ते विनिर्माण क्षेत्र को आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन में लगभग चार गुना, खादी एवं ग्रामोद्योग उत्पादन में करीब पांच गुना और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में लगभग सात गुना वृद्धि हुई है। आधुनिक रेलवे कोचों का उत्पादन 21 गुना तथा मोबाइल फोन का उत्पादन करीब 35 गुना बढ़ा है।
रक्षा क्षेत्र में भारत की क्षमता का विस्तार निर्यात में भी दिखाई देता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, देश का रक्षा निर्यात 50 गुना से अधिक बढ़ा है और भारतीय रक्षा उपकरण अब लगभग 100 देशों तक पहुंच रहे हैं।
डिजिटल क्रांति और नवाचार का विस्तार
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को विकास की नई ताकत बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। पेटेंट अनुदानों में भी करीब चार गुना वृद्धि हुई है, जबकि डिजिटल लेनदेन में लगभग 100 गुना विस्तार हुआ है।
इस डिजिटल परिवर्तन ने भारत में स्टार्टअप, फिनटेक, ई-कॉमर्स और नवाचार के लिए व्यापक अवसर पैदा किए हैं। देश में अब लगभग 2.5 लाख पंजीकृत स्टार्टअप हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे नए क्षेत्रों में युवा भारतीयों के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर बढ़ रहे हैं।
आम नागरिक तक पहुंचती बुनियादी सुविधाएं
प्रधानमंत्री ने बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को सरकार की उपलब्धियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनके अनुसार, नल के पानी के कनेक्शन पहले की तुलना में लगभग 15 गुना तेज गति से उपलब्ध कराए गए हैं। एलपीजी कनेक्शन की वार्षिक उपलब्धता में करीब छह गुना और गरीबों के लिए शौचालय निर्माण की गति में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है।
गरीब परिवारों के लिए पक्के मकानों का निर्माण भी पहले की तुलना में लगभग तीन गुना तेज हुआ है। इसके साथ ही सैकड़ों अप्रचलित कानूनों को समाप्त किया गया है और मेट्रो सहित आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का विस्तार कई नए शहरों तक हुआ है।
सेमीकंडक्टर से महत्वपूर्ण खनिजों तक
तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी कदम तेज किए हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि जहां पहले देश में कोई बड़ा सेमीकंडक्टर विनिर्माण संयंत्र नहीं था, वहीं अब एक संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। तीन सेमीकंडक्टर संयंत्रों की शुरुआत की गई है और भारत ने चिप्स का निर्यात भी शुरू कर दिया है।
उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन शुरू किया गया है। बजट में महत्वपूर्ण खनिज गलियारे की घोषणा और विभिन्न देशों के साथ आपूर्ति समझौते भी इस रणनीति का हिस्सा हैं।
ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष जोर
विकसित भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा को आवश्यक बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चिप्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा सेंटर जैसी आधुनिक तकनीकों के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी। परमाणु ऊर्जा को इस रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों और भारत की फास्ट ब्रीडर परमाणु तकनीक में उपलब्धि का उल्लेख किया।
तेल और गैस क्षेत्र में भी अन्वेषण का दायरा बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत के अपतटीय क्षेत्र का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा पहले ‘नो-गो एरिया’ के रूप में वर्गीकृत था, जिसे अब अन्वेषण के लिए खोला जा रहा है। इससे नए तेल और गैस भंडार मिलने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
ऊर्जा के क्षेत्र में विविधीकरण
ऊर्जा क्षेत्र में भारत के बदलाव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने शहर गैस वितरण, पाइपयुक्त खाना पकाने वाली गैस और सौर ऊर्जा के विस्तार को रेखांकित किया।
2014 में जहां 70 से कम शहरों में शहर गैस वितरण उपलब्ध था, वहीं अब यह सुविधा करीब 700 शहरों तक पहुंच चुकी है। पाइपयुक्त खाना पकाने वाली गैस से जुड़े परिवारों की संख्या लगभग 20-22 लाख से बढ़कर करीब 1.75 करोड़ हो गई है।
सौर ऊर्जा क्षमता में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। 2014 में करीब 2 गीगावॉट की तुलना में आज यह क्षमता लगभग 160 गीगावॉट बताई गई है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 50 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित हो चुके हैं और कई परिवार कम या शून्य बिजली बिल के साथ अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी अर्जित कर रहे हैं।
रेलवे में परिवर्तन और हरित परिवहन
भारतीय रेलवे में विद्युतीकरण की गति को भी प्रधानमंत्री ने परिवर्तन का उदाहरण बताया। 2014 में लगभग 90 वर्षों के बाद रेलवे नेटवर्क का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा ही विद्युतीकृत हुआ था, जबकि अब रेलवे लगभग पूर्ण विद्युतीकरण की दिशा में आगे बढ़ चुका है।
भारत ने अपनी पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन पर भी काम शुरू किया है। इसे दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल करने की दिशा में विकसित किया जा रहा है।
वैश्विक संकटों के बीच भारत का लचीलापन
पिछले दशक में भारत की क्षमताओं की परीक्षा कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्ष जैसे वैश्विक संकटों के दौरान हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद भारत ने अपनी आर्थिक और रणनीतिक क्षमता को मजबूत बनाए रखा तथा आवश्यक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा।
किसानों के लिए सस्ता उर्वरक
किसानों को वैश्विक बाजार में उर्वरकों की बढ़ती कीमतों से राहत देने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने यूरिया और डीएपी की कीमतों का उदाहरण दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग 3,000 रुपये प्रति बोरी की कीमत वाले यूरिया को भारतीय किसानों को 300 रुपये से कम में उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी तरह, 5,000 रुपये से अधिक कीमत वाले डीएपी को किसानों को 1,350 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।
व्यापार और निर्यात के नए अवसर
भारत ने 2014 के बाद से लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। इन समझौतों से कृषि, मत्स्य पालन, एमएसएमई, वस्त्र और अन्य क्षेत्रों के उत्पादकों एवं निर्यातकों के लिए नए बाजार खुले हैं।
युवा शक्ति को विकास का केंद्र
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया। स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया जैसी पहलों के साथ अनुसंधान के लिए एक लाख करोड़ रुपये के कोष, अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी, राष्ट्रीय ड्रोन नीति और खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों ने युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में भी विस्तार हुआ है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को 35 वर्षों के अंतराल के बाद बड़ा नीतिगत बदलाव बताया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार, 2004-2014 के दौरान 350 से कम विश्वविद्यालयों की तुलना में अगले दशक में करीब 650 नए विश्वविद्यालय जोड़े गए। मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी 2014 से पहले के 400 से कम के स्तर से बढ़कर लगभग 850 हो गई है।
स्कूलों में 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों में बचपन से ही तकनीक, रचनात्मकता और नवाचार की सोच विकसित करना है।
अंतरिक्ष, एआई और नई अर्थव्यवस्था
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी ने नई संभावनाएं खोली हैं। एक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप द्वारा भारत में निर्मित रॉकेट का प्रक्षेपण देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की बढ़ती क्षमता का उदाहरण है।
जैव-अर्थव्यवस्था भी तेजी से विस्तार कर रही है। प्रधानमंत्री के अनुसार, इसका आकार 2014 में लगभग 60,000 करोड़ रुपये से बढ़कर आज करीब 20 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में भी बड़ा उछाल आया है—एक दशक के अंत में जहां सालाना लगभग 1.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिकते थे, वहीं पिछले वर्ष करीब 25 लाख वाहनों की बिक्री हुई।
विमानन क्षेत्र में नए हवाई अड्डों, नए मार्गों और एमआरओ सुविधाओं से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। भारत अब स्वदेशी विमानों के निर्माण की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। भारत में निर्मित सी-295 रक्षा परिवहन विमान की सफल उड़ान को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया है।
ग्रामीण संपत्ति से आर्थिक सशक्तिकरण
स्वामित्व पहल के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को संपत्ति के अधिकार और आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। करीब 32 लाख परिवारों को संपत्ति कार्ड मिल चुके हैं। संपत्ति के रिकॉर्ड उपलब्ध होने से ग्रामीण परिवार अपनी संपत्ति के आधार पर बैंक ऋण प्राप्त कर सकते हैं, जिससे रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खुल रहे हैं।
महिला नेतृत्व वाला विकास
महिला सशक्तिकरण को विकसित भारत की महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए प्रधानमंत्री ने ‘लखपति दीदी’ पहल की सफलता का उल्लेख किया। तीन करोड़ लखपति दीदियों का लक्ष्य हासिल होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि सामान्य, दलित, पिछड़े और आदिवासी परिवारों की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होकर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रही हैं।
सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य का विस्तार
सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़े विस्तार का दावा किया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार, 2014 से पहले करीब 25 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा के दायरे में थे, जबकि अब लगभग 100 करोड़ भारतीय किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े हैं।
आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिली है। प्रधानमंत्री के अनुसार, लाभार्थी परिवारों ने चिकित्सा खर्च में अनुमानित दो लाख करोड़ रुपये की बचत की है।
विकसित भारत की ओर बढ़ता देश
प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में सामने आई तस्वीर यह दर्शाती है कि भारत का विकास अब केवल पारंपरिक बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। विनिर्माण और रक्षा से लेकर सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, जैव-अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा तक नए क्षेत्रों में भारत अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।
इन पहलों के केंद्र में आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता, युवा शक्ति, महिला नेतृत्व और आम नागरिक तक बुनियादी सुविधाओं की पहुंच को रखा गया है। आने वाले वर्षों में इन उपलब्धियों को रोजगार, उत्पादकता, निर्यात और जीवन-स्तर में ठोस सुधार में बदलना भारत के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में अगली बड़ी चुनौती और अवसर होगा।
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