देहरादून। चुनावी मौसम करीब आते ही राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों में अचानक तेजी आना कोई नई बात नहीं है। लेकिन उत्तराखंड में इन दिनों एक सवाल चर्चा का विषय बन रहा है. क्या चुनाव से छह महीने या एक साल पहले कुछ लोग जानबूझकर विकास कार्यों को लेकर नकारात्मक नैरेटिव तैयार करने और जनता को भ्रमित करने में सक्रिय हो जाते हैं?
इसी मुद्दे को लेकर जर्नलिस्ट इंडिया (Journalist India) ने उत्तराखंड के कई मौजूदा विधायकों और वरिष्ठ पत्रकारों से बातचीत की। बातचीत के दौरान कपकोट के विधायक सुरेश गढ़िया ने भी माना कि चुनाव के नजदीक आते ही कुछ लोग विकास कार्यों की उपलब्धियों को देखने के बजाय उनमें कमियां तलाशने और लगातार सवाल खड़े करने में सक्रिय हो जाते हैं। विधायक के मुताबिक, इसका असर न केवल राजनीतिक बहस पर बल्कि जमीन पर चल रहे विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है।
विधायक सुरेश गढ़िया Suresh Garia का कहना है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना और सरकार के कामकाज की आलोचना करना जरूरी है। लेकिन जब आलोचना तथ्यों पर आधारित होने के बजाय केवल विरोध के लिए विरोध तक सीमित हो जाए, तो उसका नुकसान क्षेत्र के विकास को उठाना पड़ सकता है।
‘काम की कमियां बताइए, लेकिन काम को रोकने की कोशिश न हो’
कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया Suresh Garia ने बातचीत में कहा कि किसी भी विकास कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयसीमा को लेकर सवाल उठाना गलत नहीं है। बल्कि इससे व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। लेकिन उनका तर्क है कि यदि किसी विकास कार्य की कमियों को सुधारने के बजाय उसे ही बदनाम करने का प्रयास किया जाए, तो यह जनता के हित में नहीं है।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की उपलब्धियों पर चर्चा होनी चाहिए और जहां कमी है, वहां तथ्यात्मक तरीके से सवाल उठाए जाने चाहिए। लेकिन केवल राजनीतिक या व्यक्तिगत विरोध के चलते विकास कार्यों को निशाना बनाना उचित नहीं है।
धामी सरकार के बजट और विकास कार्यों का किया जिक्र
सुरेश गढ़िया ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार लगातार उत्तराखंड के विकास के लिए बजट उपलब्ध करा रही है। सरकार का प्रयास है कि जिस कार्य के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है, वह कार्य तय समयसीमा के भीतर और निर्धारित गुणवत्ता के साथ पूरा हो।
विधायक सुरेश गढ़िया ने अपने विधानसभा क्षेत्र कपकोट का उदाहरण देते हुए दावा किया कि उन्होंने क्षेत्र की विभिन्न विकास आवश्यकताओं को लेकर लगातार सरकार के सामने पैरवी की है और कपकोट विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत कराई गई है।
उनके मुताबिक, इस बजट के माध्यम से क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आधारभूत ढांचे और अन्य विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
‘जनता को भ्रमित करने वालों को मीडिया को एक्सपोज करना चाहिए’
जब जर्नलिस्ट इंडिया की ओर से विधायक से पूछा गया कि आखिर वे कौन लोग हैं जो विकास कार्यों में बाधा डाल रहे हैं या जनता के बीच गलत नैरेटिव तैयार कर रहे हैं, तो उन्होंने इसकी जिम्मेदारी मीडिया पर डालते हुए कहा कि मीडिया का काम रिसर्च के आधार पर सही तथ्य जनता तक पहुंचाना है।
सुरेश गढ़िया के अनुसार,
यदि किसी मीडिया संस्थान को यह महसूस हो रहा है कि चुनाव से पहले कुछ लोग सक्रिय होकर विकास कार्यों को प्रभावित कर रहे हैं, तो पत्रकारों को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर यह पता लगाना चाहिए कि ऐसा कौन कर रहा है और उसके पीछे क्या उद्देश्य है।
उनका कहना था कि मीडिया को ऐसे मामलों को जनता के सामने लाना चाहिए, लेकिन यह काम तथ्यों, दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच के आधार पर होना चाहिए।
आलोचना जरूरी, लेकिन ‘बेवजह की आलोचना’ पर सवाल
विधायक सुरेश गढ़िया ने यह भी स्पष्ट किया कि वह विकास कार्यों की आलोचना के खिलाफ नहीं हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में विपक्ष, जनता और मीडिया द्वारा सवाल पूछना व्यवस्था को जवाबदेह बनाता है।
मुद्दा तब पैदा होता है जब किसी कार्य की कमियों को उजागर करने के बजाय हर विकास कार्य को ही नकारात्मक तरीके से पेश किया जाए।
सुरेश गढ़िया के मुताबिक, गांव, समाज, राज्य और देश के विकास के लिए यह जरूरी है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह रहें, लेकिन विकास कार्यों को राजनीतिक खींचतान से अलग रखा जाए।
चुनाव से पहले ‘नैरेटिव’ की राजनीति कितनी प्रभावी?
उत्तराखंड की राजनीति में चुनाव से पहले विकास कार्यों, सरकार की उपलब्धियों और स्थानीय समस्याओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज होना स्वाभाविक है। सत्तापक्ष अपने काम को उपलब्धि के रूप में पेश करता है, जबकि विपक्ष और विरोधी समूह उन्हीं कार्यों की कमियां गिनाते में अपना समय बर्बाद करते हैं।
ऐसे में असली सवाल यह है कि जनता किस पर भरोसा करे?
इसका जवाब किसी एक राजनीतिक दल या नेता के दावे में नहीं, बल्कि तथ्यों, सरकारी रिकॉर्ड, स्वीकृत बजट, कार्य की वास्तविक प्रगति, गुणवत्ता और जमीन पर जनता के अनुभव में छिपा है।
कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया की ओर से विकास के लिए 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत कराने का दावा भी इसी कसौटी पर जर्नलिस्ट इंडिया ने परखा और उनके विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया.। काफी दूरुस्त पहाड़ियों के बीच बसा उनका विधानसभा काफी चेलेंजिंग है. हमारी टीम ने देखा कि वो जो दावा कर रहे हैं विकास कार्यों का खुद उन्होंने हमें दिखाया औऱ अपने प्रोजैक्टों पर लेकर गए. हमने देखा कि उनके विदानसभा में लगातार पैदल रास्तों से लेकर सड़कों तक और छोटे वाटर पंपों से लेकर बड़ी बड़ी वाटर पंपिंग योजनाएं तक चल रही हैं. शिक्षा को लेकर हमेसा ही चिंता जताने वाले विधायक सुरेश गढ़िया ने अपने छेत्र में बच्चों से लेकर कॉलेज तक के भवन निर्माण में भी काफी काम किया है. क्षेत्र के लिए सरकार से स्वीकृत बजट का बड़ा हिस्सा वास्तव में धरातल पर गुणवत्तापूर्ण विकास कार्यों में तब्दील हुआ है, यह क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने दावा किया कि यदि कहीं काम की गुणवत्ता, देरी, भ्रष्टाचार या अनियमितता की शिकायत आती है तो वो उसकी सवतंत्र जांच करवाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं.
विकास की राजनीति में न तो आंख मूंदकर प्रशंसा समाधान है और न ही हर काम का विरोध। जनता के हित में जरूरी है काम की निष्पक्ष समीक्षा, कमियों पर सवाल और अच्छे काम की तथ्यात्मक सराहना जो इस समय हो नहीं रही है.
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