ग्रेटर नोएडा स्थित Paramount Golf Forest Project में करीब 2000 होम बायर्स की रजिस्ट्री का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। परियोजना के 73 होम बायर्स की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को याचिकाकर्ताओं के प्रतिनिधित्व पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
मामला Writ Petition No. 34921 of 2026, Sunil Kumar Singh & Others vs. State of Uttar Pradesh & Others से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने अपनी संपत्तियों की निर्धारित देय राशि का भुगतान कर दिया है और कई खरीदारों को अपने आवास का कब्जा भी मिल चुका है। इसके बावजूद संपत्तियों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है।
बिल्डर-प्राधिकरण के विवाद का असर खरीदारों पर
Retired Additional Director of Prosecution (UP Government) और Vats Legal Associates के Advocate N.K. Tyagi (Naresh Tyagi) ने जर्नलिस्ट इंडिया से बातचीत में बताया कि होम बायर्स की रजिस्ट्री में देरी का संबंध बिल्डर और UPSIDC के बीच बकाया/देनदारी से जुड़े विवाद से है। खरीदारों का दावा है कि उन्होंने अपनी ओर से संपत्ति की कीमत का भुगतान कर अपनी संविदात्मक जिम्मेदारियां पूरी कर दी हैं। ऐसे में उनका कहना है कि बिल्डर और प्राधिकरण के बीच चल रहे विवाद का प्रभाव उन खरीदारों पर नहीं पड़ना चाहिए, जिन्होंने पूरा भुगतान कर दिया है और जिन्हें कब्जा भी प्राप्त हो चुका है।
इसी समस्या के समाधान और रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग को लेकर 73 होम बायर्स ने हाईकोर्ट का रुख किया।
6 सप्ताह में निर्णय का निर्देश
हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत प्रतिनिधित्व पर संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए कानून के अनुसार छह सप्ताह के भीतर निर्णय लिया जाए।
इस आदेश के बाद अब होम बायर्स की नजर CEO, UPSIDC, Kanpur के स्तर पर होने वाली आगामी कार्रवाई पर है। खरीदारों का कहना है कि न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में उनके प्रतिनिधित्व पर निर्धारित समय-सीमा में सुनवाई और निर्णय की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए।
करीब 2000 खरीदारों की रजिस्ट्री का सवाल
Paramount Golf Forest से जुड़े होम बायर्स का कहना है कि रजिस्ट्री का मुद्दा केवल 73 याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि परियोजना के करीब 2000 होम बायर्स इससे प्रभावित हैं। खरीदारों की प्रमुख मांग है कि जिन लोगों ने अपनी संपत्ति का पूरा भुगतान कर दिया है और जिन्हें कब्जा मिल चुका है, उनकी रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
होम बायर्स का कहना है कि वे बिल्डर और प्राधिकरण के बीच बकाया संबंधी विवाद में पक्षकार नहीं हैं। उनका तर्क है कि अपनी ओर से भुगतान और अन्य संविदात्मक दायित्व पूरे करने के बाद उन्हें अपनी संपत्ति का वैधानिक स्वामित्व दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।
अब प्राधिकरण के फैसले पर नजर
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मामले में अगला महत्वपूर्ण कदम CEO, UPSIDC के समक्ष होने वाली सुनवाई और प्रतिनिधित्व पर लिए जाने वाले निर्णय को माना जा रहा है। होम बायर्स संबंधित अधिकारियों के समक्ष न्यायालय के आदेश, अपने प्रतिनिधित्व और अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने की तैयारी में हैं।
अब देखना होगा कि छह सप्ताह की निर्धारित अवधि में प्राधिकरण इस मामले पर क्या निर्णय लेता है और इसका Paramount Golf Forest के करीब 2000 प्रभावित होम बायर्स की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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