Uttarakhand: अब गांव में ही मिलेगा बाजार! उत्तराखंड की ‘एक मंडी-एक गांव’ योजना से किसानों को क्या फायदा मिलेगा? जानिए
Uttarakhand: उत्तराखंड सरकार किसानों को लेकर एक ऐसी योजना लेकर आई है, जिससे गांव में ही किसानों को बाजार उपलब्ध हो सकेगा. उत्तराखंड में खेती को लेकर सबसे बड़ी चुनौतियों में सिर्फ उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों को उनके उत्पाद का सही बाजार और बेहतर कीमत दिलाना भी शामिल है। पहाड़ी क्षेत्रों में गांवों से मंडियों की दूरी, परिवहन लागत और सीमित बाजार पहुंच किसानों की कमाई पर असर डालती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कुछ पहाड़ी इलाकों में प्रमुख मंडियां गांवों से करीब 150 किलोमीटर तक दूर हैं।
इसी चुनौती को कम करने के उद्देश्य से उत्तराखंड में ‘एक मंडी-एक गांव’ पहल शुरू की गई है। इसके तहत राज्य की मंडी समितियां गांवों को गोद लेकर वहां कृषि उत्पादों की मार्केटिंग और बाजार से जुड़ी व्यवस्था को मजबूत करने पर काम करेंगी।
क्या है ‘एक मंडी-एक गांव’ योजना?
इस पहल का मूल विचार बेहद सरल है- एक मंडी समिति एक गांव को अपनाएगी और उस गांव के किसानों को बाजार से बेहतर तरीके से जोड़ने की कोशिश करेगी।
इस मॉडल में मंडी समितियों की भूमिका केवल कृषि उपज खरीदने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार की जानकारी, उत्पाद की बिक्री और मार्केटिंग से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा।
राज्य में 23 मंडी समितियों द्वारा एक-एक गांव को गोद लेने की जानकारी सामने आई है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय कृषि उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सकता है।
किसानों को क्या फायदा होगा?
1. बाजार तक पहुंच होगी आसान
पहाड़ी किसानों के लिए कृषि उत्पादों को दूर स्थित मंडियों तक ले जाना कई बार महंगा और मुश्किल होता है। स्थानीय स्तर पर बाजार व्यवस्था मजबूत होने से परिवहन की परेशानी और लागत को कम करने में मदद मिल सकती है।
2. उत्पाद की बेहतर मार्केटिंग
उत्तराखंड में जैविक और पारंपरिक कृषि उत्पादों की अच्छी संभावनाएं हैं। लेकिन बाजार और ब्रांडिंग की कमी के कारण किसानों को हमेशा इन उत्पादों की पूरी कीमत नहीं मिल पाती। ‘एक मंडी-एक गांव’ मॉडल स्थानीय उत्पादों को व्यवस्थित तरीके से बाजार से जोड़ने में मदद कर सकता है।
3. किसानों की आय बढ़ाने का अवसर
किसान की कमाई सिर्फ उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। उत्पाद कहां और किस कीमत पर बिकता है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बेहतर मार्केटिंग, कम परिवहन लागत और बाजार से सीधा जुड़ाव किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकता है।
4. स्थानीय फसलों को पहचान
उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग कृषि और बागवानी उत्पादों की विशेषता है। ऐसे में गांव आधारित मार्केटिंग मॉडल स्थानीय उत्पादों को एक अलग पहचान दिलाने में मदद कर सकता है।
पहाड़ों में मार्केटिंग क्यों है बड़ी चुनौती?
उत्तराखंड का भौगोलिक स्वरूप खेती और कृषि व्यापार दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण है। राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में सिंचाई की सीमाएं, छोटे खेत, परिवहन की समस्या और बाजार से दूरी किसानों के सामने बड़ी बाधाएं हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और पहाड़ी इलाकों में बारिश आधारित खेती का महत्व काफी अधिक है। ऐसे में सिर्फ उत्पादन बढ़ाने की योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। किसान को उत्पादन से लेकर बाजार और बिक्री तक पूरी वैल्यू चेन से जोड़ना जरूरी है।
सरकार का फोकस सिर्फ मंडी तक सीमित नहीं
उत्तराखंड सरकार ने कृषि और बागवानी क्षेत्र में मॉडल गांव विकसित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। मई 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रत्येक विकासखंड में एक मॉडल कृषि एवं बागवानी गांव विकसित करने के लिए तीन साल की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। इसमें जैविक खेती, आधुनिक तकनीक, उत्पादकता बढ़ाने, लागत घटाने और मार्केटिंग व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया।
इस लिहाज से ‘एक मंडी-एक गांव’ जैसी पहल को उत्पादन और बाजार के बीच की कड़ी मजबूत करने वाले मॉडल के रूप में देखा जा सकता है।
क्या इससे किसानों को सीधे ज्यादा दाम मिलेंगे?
यह समझना जरूरी है कि सिर्फ योजना शुरू होने से हर किसान को तुरंत ज्यादा कीमत मिलना तय नहीं है। इसका वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि मंडी समितियां गांवों में खरीद, संग्रहण, परिवहन, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बाजार से कनेक्शन को कितनी प्रभावी तरीके से लागू करती हैं।
अगर इन सभी स्तरों पर काम होता है, तो किसानों को बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और अपने उत्पाद के लिए बेहतर बाजार तलाशने में मदद मिल सकती है।
उत्तराखंड की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
उत्तराखंड में जैविक, पारंपरिक और स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए बाजार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। लेकिन इन उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए मजबूत सप्लाई चेन और मार्केटिंग नेटवर्क की जरूरत है। ‘एक मंडी-एक गांव’ मॉडल सफल रहता है तो यह सिर्फ मंडी व्यवस्था को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव, किसान, स्थानीय उत्पाद और बाजार को एक साथ जोड़ने वाला मॉडल बन सकता है।
सीधा समझें, तो उत्तराखंड में ‘एक मंडी-एक गांव’ पहल किसानों के लिए बाजार की दूरी और मार्केटिंग की समस्या को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। हालांकि इसकी सफलता जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। अगर किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार, उचित मूल्य, परिवहन और मार्केटिंग की बेहतर सुविधा मिलती है, तो इससे पहाड़ी कृषि को नई गति मिल सकती है और किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को भी मजबूती मिल सकती है।
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