Sawan Me Shiv Pooja : सावन में शिव पूजा कैसे करें? जानिए भगवान शिव को प्रसन्न करने की सही विधि

आचार्य श्री पंडित बृजेश शास्त्री ने बताया सावन में शिव आराधना का महत्व

नई दिल्ली। Sawan Me Shiv Pooja : भगवान शिव की आराधना के लिए सावन का महीना सबसे पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह में श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान से की गई शिव पूजा का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण कर उन्हें सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

वैदिक ज्योतिष मंत्र चिकित्सा केंद्र के आचार्य श्री पंडित बृजेश शास्त्री के अनुसार,

वैदिक ज्योतिष मंत्र चिकित्सा केंद्र के आचार्य श्री पंडित बृजेश शास्त्री जी
वैदिक ज्योतिष मंत्र चिकित्सा केंद्र के आचार्य श्री पंडित बृजेश शास्त्री जी

यदि सावन मास में श्रद्धापूर्वक कुछ विशेष नियमों का पालन करते हुए भगवान शिव की पूजा की जाए, तो शिव कृपा जीवनभर बनी रहती है। इससे ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है तथा जीवन की अनेक बाधाओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

ब्रह्म मुहूर्त में करें दिन की शुरुआत

आचार्य श्री पंडित बृजेश शास्त्री बताते हैं कि सावन में प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा के समय मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखें। शिव आराधना में श्रद्धा और सच्ची भावना का विशेष महत्व है।

शिवलिंग का करें विधिवत अभिषेक

भगवान शिव की पूजा में अभिषेक का विशेष स्थान है। विभिन्न पदार्थों से किए गए अभिषेक के अलग-अलग आध्यात्मिक और पारंपरिक फल बताए गए हैं।

अभिषेक सामग्री एवं पारंपरिक मान्यताएं

-शुद्ध जल- वर्षा, शांति तथा सामान्य मनोकामनाओं की पूर्ति।

-गंगाजल- मानसिक शांति, पवित्रता, पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति।

– गाय का दूध – उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और संतान सुख।

– शक्कर मिला जल या दूध -सद्बुद्धि, ज्ञान और स्मरण शक्ति में वृद्धि।

– दही – भवन, वाहन, पशुधन और सुख-समृद्धि।

– घी – वंश वृद्धि, शारीरिक बल तथा रोगों से रक्षा।

– शहद – पापों का क्षय, कर्ज से मुक्ति तथा वाणी में मधुरता।

– गन्ने का रस – धन, वैभव और आर्थिक उन्नति।

– सरसों का तेल – शत्रु बाधा और जिद्दी रोगों से राहत की पारंपरिक मान्यता।

– पंचामृत – आयु, यश और धन-संपत्ति की प्राप्ति।

अभिषेक के अंत में शिवलिंग पर पुनः स्वच्छ जल अवश्य अर्पित करें।

भगवान शिव को अर्पित करें उनकी प्रिय वस्तुएं

पूजा के दौरान भगवान शिव को उनकी प्रिय सामग्री अर्पित करें.

– बेलपत्र (तीन पत्तियों वाला)

– धतूरा

– आक के पुष्प

– भांग

– सफेद चंदन

– सफेद पुष्प

– अक्षत

– मौली

ध्यान रखें कि भगवान शिव को अर्पित किया जाने वाला बेलपत्र फटा या खंडित न हो।

“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का करें जाप

आचार्य श्री पंडित बृजेश शास्त्री के अनुसार सावन में प्रतिदिन कम से कम 108 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना गया है। इससे मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

इसके साथ महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी रोग, भय और संकटों से रक्षा करने वाला माना गया है।

शिव चालीसा एवं रुद्राष्टक का पाठ

प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक शिव चालीसा, रुद्राष्टक अथवा शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। विशेष रूप से सावन के सोमवार को इनका पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।

सात्विक जीवन अपनाएं

सावन में मांस, मदिरा, तामसिक भोजन और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। सात्विक भोजन, संयमित जीवन, सत्य, सेवा और सदाचार भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के महत्वपूर्ण साधन माने गए हैं।

दान और सेवा का महत्व

आचार्य श्री पंडित बृजेश शास्त्री का कहना है कि भगवान शिव केवल पूजा-पाठ से ही नहीं, बल्कि दया, सेवा और दान से भी प्रसन्न होते हैं। सावन मास में गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, फल अथवा आवश्यक सामग्री का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।

सावन सोमवार व्रत का विशेष महत्व

सावन के प्रत्येक सोमवार का व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक सुख, उत्तम स्वास्थ्य, संतान सुख तथा आर्थिक उन्नति का आशीर्वाद मिलने की धार्मिक मान्यता है।

क्या कहते हैं आचार्य श्री पंडित बृजेश शास्त्री?

आचार्य श्री पंडित बृजेश शास्त्री कहते हैं

“भगवान शिव अत्यंत भोले, करुणामय और भक्तवत्सल हैं। वे केवल सच्ची श्रद्धा और निष्कपट भक्ति से ही प्रसन्न हो जाते हैं। यदि सावन में श्रद्धापूर्वक शिवलिंग का अभिषेक, पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप, सात्विक जीवन और सेवा-भाव अपनाया जाए, तो भगवान शिव की कृपा जीवनभर बनी रहती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।”»

सावन केवल धार्मिक अनुष्ठानों का महीना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, भक्ति और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का भी श्रेष्ठ अवसर है। श्रद्धा, विश्वास और विधि-विधान के साथ भगवान शिव की आराधना करने से जीवन की अनेक बाधाओं के दूर होने तथा सुख-समृद्धि प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।

नोट- यह लेख धार्मिक मान्यताओं एवं आचार्य श्री पंडित बृजेश शास्त्री द्वारा बताए गए पारंपरिक पूजा-विधि पर आधारित है। श्रद्धालु अपनी परंपरा, आस्था और गुरु के मार्गदर्शन के अनुसार पूजा-अर्चना करें।

 

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