अयोध्या। राम मंदिर Ram Mandir में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और अनियमितताओं के मामले में जांच का अहम पड़ाव पूरा हो गया है। उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। ताजा जानकारी के मुताबिक, रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को कथित चढ़ावा चोरी में सीधे तौर पर शामिल नहीं पाया गया है।
मामले में यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शुरुआती जांच के दौरान मंदिर की चढ़ावा गिनती व्यवस्था, सुरक्षा प्रोटोकॉल और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। अब अंतिम रिपोर्ट आने के बाद जांच के निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर है।
शुरुआती जांच में सामने आई थीं व्यवस्थागत खामियां
SIT की शुरुआती पड़ताल में चढ़ावा गिनने की प्रक्रिया में कई कमियां सामने आने की बात कही गई थी। जांच में CCTV फुटेज की समीक्षा भी की गई। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 45 दिनों के फुटेज में 70 ऐसे मामले चिन्हित किए गए, जिनमें गिनती से जुड़े कर्मचारियों पर नकदी छिपाने के आरोप लगे थे।
जांच में सुरक्षा जांच, कर्मचारियों की निगरानी और कैश-काउंटिंग की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे थे। SIT ने यह संकेत दिया था कि केवल किसी एक व्यक्ति की भूमिका के बजाय पूरी व्यवस्था की कमियों को भी समझना जरूरी है।
अंतिम रिपोर्ट ने चंपत राय को दी राहत
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम जांच में चंपत राय के खिलाफ कथित चोरी या आपराधिक गड़बड़ी में संलिप्तता का पर्याप्त आधार नहीं मिला। इसी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश नहीं किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मामले के शुरुआती दौर में चंपत राय का नाम विवाद के केंद्र में जरूर आया था, लेकिन SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में उनका नाम प्रमुख रूप से नहीं था। बाद में उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया था।
अनिल मिश्रा को लेकर भी बदली स्थिति
अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर जांच के अलग-अलग चरणों में अलग तस्वीर सामने आई। शुरुआती रिपोर्टों में उनकी निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर सवाल उठाए गए थे।
हालांकि, अब सामने आई अंतिम रिपोर्ट में अनिल मिश्रा को भी कथित चोरी में शामिल नहीं बताया गया है और उनका नाम अंतिम रिपोर्ट में नहीं होने की जानकारी सामने आई है।
यानी प्रारंभिक जांच में उठे प्रशासनिक सवालों और अंतिम रिपोर्ट के निष्कर्षों के बीच अंतर नजर आता है। यही वजह है कि मामले की पूरी जांच प्रक्रिया चर्चा में बनी हुई है।
आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई थी जांच
चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की थी और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांच का एक प्रमुख हिस्सा चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों की गतिविधियों और नकदी की कथित हेराफेरी से जुड़ा रहा।
SIT की पड़ताल में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की भूमिका भी जांच के केंद्र में रही। शुरुआती रिपोर्ट में गिनती और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कमियों का फायदा उठाकर कथित हेराफेरी किए जाने की बात सामने आई थी।
इस्तीफों के बाद और बढ़ा था विवाद
मामला सामने आने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि भी ट्रस्ट की ओर से की गई थी। उस समय ट्रस्ट ने कहा था कि दोनों के इस्तीफों पर बैठक में फैसला लिया जाएगा।
इसके बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया। मंदिर की दान व्यवस्था में पारदर्शिता, सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर कई सवाल उठाए गए।
अब आगे क्या होगा?
SIT की अंतिम रिपोर्ट सामने आने के बाद अब सबसे अहम सवाल है कि कथित चढ़ावा चोरी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कानूनी कार्रवाई होगी और मंदिर की व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाएंगे।
जांच के दौरान सामने आई सुरक्षा और निगरानी संबंधी कमियों को देखते हुए कैश काउंटिंग, CCTV निगरानी, कर्मचारियों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामले पर सुप्रीम कोर्ट की भी नजर रही है। अदालत ने SIT से जांच की स्थिति बताने और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने को कहा था। हालांकि, अदालत ने SIT की स्टेटस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग स्वीकार नहीं की थी।
राम मंदिर चढ़ावा मामले की अंतिम SIT रिपोर्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ दिया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दोनों को कथित चोरी में शामिल नहीं पाया गया है।
अब असली फोकस उन लोगों पर कार्रवाई और मंदिर की दान व्यवस्था को और सुरक्षित बनाने पर रहेगा, जिनकी भूमिका जांच में संदिग्ध या दोषपूर्ण पाई गई है।
साथ ही यह मामला एक बड़ा सवाल भी छोड़ता है जब इतनी बड़ी संख्या में कथित अनियमितताएं सामने आईं, तो निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में चूक आखिर कैसे हुई? आने वाले समय में इसी सवाल का जवाब और SIT की सिफारिशों पर होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
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