SIR NEWS : CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, SIR और ECI की कार्यप्रणाली पर सवाल

नई दिल्ली :

SIR NEWS : मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे विवाद ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। एक जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से जुड़े कुछ अहम फैसले निर्वाचन आयोग के सभी सदस्यों की सहमति या निर्धारित बहुमत प्रक्रिया के बिना लिए गए।

याचिका में आयोग के रिकॉर्ड और डिजिटल सिस्टम की जांच कराने, कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने तथा ऐसे फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। रिपोर्टों के अनुसार, मामले की सुनवाई तीन सदस्यीय पीठ कर सकती है, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कर सकते हैं।

याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं?

राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है। याचिकाकर्ता का कहना है कि आयोग की शक्तियों का इस्तेमाल संस्थागत तरीके से होना चाहिए और महत्वपूर्ण फैसले आयोग के सदस्यों की सर्वसम्मति या निर्धारित प्रक्रिया के तहत बहुमत से लिए जाने चाहिए।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR और मतदाता सूची से संबंधित कुछ फैसले CEC ज्ञानेश कुमार ने अन्य चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी-की जानकारी या सहमति के बिना लिए। याचिकाकर्ता ने इन आरोपों की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसले CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों की मौजूदगी में लिए गए और इनमें सभी की सहमति थी।

Form 6 में बदलाव को लेकर विवाद

इस मामले में Form 6 भी एक प्रमुख मुद्दा है। यह फॉर्म मतदाता सूची में पहली बार नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

याचिका में दावा किया गया है कि Form 6 में कुछ ऐसे बदलाव किए गए, जिन पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मई 2026 में चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने बदलावों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन जरूरी होगा। इसके बाद चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति दर्ज की थी।

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कथित बदलावों की वैधता की जांच करने और आवश्यकता पड़ने पर मूल वैधानिक Form 6 को बहाल करने का अनुरोध किया है।

ECINet और ERONet की जांच की मांग

याचिका में निर्वाचन आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet और ERONet से जुड़े रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कराने की भी मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने इसके लिए स्वतंत्र जांच एजेंसी या सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का सुझाव दिया है।

इसके अलावा आयोग के मूल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग भी की गई है। इनमें बैठकों के एजेंडा और कार्यवृत्त, अनुमोदन, फाइल नोटिंग, डिजिटल एक्सेस लॉग, सर्वर रिकॉर्ड और मतदाता सूची से संबंधित डेटा शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल की 16.10 लाख अपीलों पर भी सवाल

याचिका में पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से संबंधित 16.10 लाख अपीलों का भी जिक्र किया गया है।

चुनाव आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल में कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुईं। इनमें 22.21 लाख अपीलें ऐसे मतदाताओं की थीं, जिनके नाम हटाए गए थे और वे दोबारा सूची में शामिल किए जाने की मांग कर रहे थे।

वहीं, 16.10 लाख अपीलें ऐसे लोगों के नाम हटाने से संबंधित थीं, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में बरकरार रखे गए थे।

इन्हीं 16.10 लाख अपीलों को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू की ओर से सवाल उठाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह जानना चाहा था कि इन अपीलों को दाखिल करने के लिए किसे और किस प्रक्रिया के तहत अधिकृत किया गया था।

14 मौकों पर लिखित आपत्ति का दावा

याचिका और इससे जुड़ी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मौकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं।

बताया गया है कि ये आपत्तियां Form 6, मतदाता डेटा, IT सिस्टम और SIR से जुड़े विभिन्न फैसलों से संबंधित थीं। कुछ आपत्तियों में कथित तौर पर यह कहा गया कि संबंधित चुनाव आयुक्तों को कुछ फैसलों या उनकी प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं थी।

दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने अपने स्तर पर इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि आयोग के फैसले सामूहिक और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई है?

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से कई तरह के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इनमें प्रमुख मांगें हैं

निर्वाचन आयोग के मूल रिकॉर्ड और डिजिटल लॉग को सुरक्षित रखने का निर्देश।

Form 6 में किए गए कथित बदलावों की वैधता की जांच।

ECINet और ERONet का फॉरेंसिक ऑडिट।

SIR से जुड़े रिकॉर्ड और निर्णय प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच।

निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के बिना लिए गए फैसलों को रद्द करने पर विचार।

भविष्य में Form 6 में बदलाव पर रोक लगाने का अनुरोध।

यदि रिकॉर्ड से अनधिकृत निर्णय लेने की पुष्टि होती है तो SIT या न्यायिक जांच कराने की मांग।

CEC के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ी अन्य राहतों पर भी विचार।

इन मांगों पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके सामने पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड के आधार पर ही होगा।

अब आगे क्या होगा?

अब अदालत के सामने मुख्य सवाल यह होगा कि निर्वाचन आयोग के भीतर संबंधित फैसले किस प्रक्रिया के तहत लिए गए और क्या वह प्रक्रिया संविधान तथा 2023 के संबंधित कानून में निर्धारित संस्थागत व्यवस्था के अनुरूप थी।

यदि सुप्रीम कोर्ट आयोग के मूल रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग और डिजिटल लॉग की जांच का निर्देश देता है, तो इससे SIR से जुड़े फैसलों की वास्तविक प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोप सिर्फ दावे हैं और इन्हें न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके फैसले सामूहिक और सर्वसम्मति से लिए गए।

इसलिए इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई और निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड की न्यायिक जांच, यदि कोई आदेश होता है, महत्वपूर्ण होगी।

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