नोएडा/ग्रेटर नोएडा। वर्षों से अपने घर का इंतजार कर रहे सुपरटेक Supertech के हजारों घर खरीदारों के लिए 16 अधूरी परियोजनाओं से जुड़ा मामला बेहद महत्वपूर्ण है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम समेत चार राज्यों में फैली इन परियोजनाओं को पूरा कराने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट और एनबीसीसी की भूमिका से उन खरीदारों की उम्मीदें बढ़ी हैं, जो लंबे समय से अपने फ्लैट की चाबी का इंतजार कर रहे हैं।
सुपरटेक की परियोजनाओं में देरी का सबसे बड़ा असर घर खरीदारों पर पड़ा है। कई खरीदार वर्षों से ईएमआई चुका रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक अपने घर का कब्जा नहीं मिल सका है। ऐसे में इन परियोजनाओं को जल्द पूरा कराना सिर्फ रियल एस्टेट से जुड़ा मुद्दा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य और उनकी जीवनभर की कमाई से जुड़ा सवाल है।
ये हैं सुपरटेक के 16 प्रोजेक्ट्स
सुप्रीम कोर्ट के 5 फरवरी 2026 के आदेश में दर्ज परियोजनाओं के अनुसार सूची इस प्रकार है—
- स्पोर्ट्स विलेज (Sports Village) — ग्रेटर नोएडा
- हिलटाउन (Hilltown) — गुरुग्राम
- रोमानो (Romano) — नोएडा
- रिवरक्रेस्ट (Rivercrest) — रुद्रपुर, उत्तराखंड
- मेरठ स्पोर्ट्स सिटी (Meerut Sports City) — मेरठ
- ग्रीन विलेज (Green Village) — मेरठ
- इको विलेज-3 (Eco Village-3) — ग्रेटर नोएडा
- यूपी कंट्री (UP Country) — ग्रेटर नोएडा
- इको विलेज-2 (Eco Village-2) — ग्रेटर नोएडा
- अराविल/अराविले (Araville) — गुरुग्राम
- मिकासा (Micasa) — बेंगलुरु
- सीजर सूट्स (Czar Suites) — ग्रेटर नोएडा
- इकोसिटी (Eco-Citi) — नोएडा
- इको विलेज-1 (Eco Village-1) — ग्रेटर नोएडा
- केपटाउन (Capetown) — नोएडा
- नॉर्थ आई (North Eye) — नोएडा
खरीदारों के लिए क्यों अहम है यह मामला?
इन परियोजनाओं में फ्लैट बुक करने वाले लोगों ने अपनी वर्षों की बचत लगाई है। बड़ी संख्या में खरीदारों ने बैंक से होम लोन लेकर ईएमआई शुरू कर दी, लेकिन निर्माण में देरी के कारण उन्हें न तो समय पर घर मिला और न ही अपनी रकम से जुड़ी अनिश्चितता खत्म हुई।
कई परिवारों के लिए स्थिति और मुश्किल इसलिए भी रही कि किराए के मकान का खर्च और होम लोन की ईएमआई दोनों साथ-साथ उठाने पड़े। बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आर्थिक योजना और भविष्य की बचत तक प्रभावित हुई।
ऐसे में खरीदारों की सबसे बड़ी मांग यही है कि परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए और उन्हें निश्चित समयसीमा के भीतर उनके फ्लैटों का कब्जा दिया जाए।
50 हजार से ज्यादा परिवारों की उम्मीद
एनबीसीसी की जानकारी के अनुसार इन 16 परियोजनाओं में करीब 50,000 आवासीय इकाइयां शामिल हैं। अनुमानित निर्माण लागत करीब 9,445 करोड़ रुपये बताई गई है।
इसका मतलब है कि इन परियोजनाओं का भविष्य सिर्फ रियल एस्टेट कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के लिए भी बेहद अहम है। हर अधूरी इमारत के पीछे एक ऐसा परिवार है, जिसने अपने घर का सपना देखा और वर्षों तक उसके पूरा होने का इंतजार किया।
एनबीसीसी से जगी उम्मीद
सुपरटेक की रुकी परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए एनबीसीसी की भूमिका घर खरीदारों के लिए उम्मीद की एक बड़ी वजह बनी है। यदि निर्माण प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ती है और पर्याप्त फंड की व्यवस्था होती है, तो वर्षों से अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का रास्ता खुल सकता है।
खरीदारों की नजर अब इस बात पर है कि परियोजनाओं के निर्माण की गति कितनी तेज होती है, फंडिंग की व्यवस्था कैसे होती है और उन्हें कब्जा देने की वास्तविक समयसीमा क्या तय होती है।
खरीदारों की मांग-अब और इंतजार नहीं
सुपरटेक के घर खरीदारों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन्हें अपना घर कब मिलेगा?
वर्षों का इंतजार कर चुके खरीदार अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर निर्माण और तय समयसीमा के भीतर कब्जा चाहते हैं। उनका कहना है कि उनका पैसा वर्षों से परियोजनाओं में फंसा हुआ है और अब उन्हें राहत दिलाने के लिए प्रभावी और समयबद्ध कदम जरूरी हैं।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही ऐसे हजारों परिवारों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि न्यायिक निगरानी और एनबीसीसी की भूमिका के जरिए उनकी वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है।
अब खरीदारों की नजर अगली सुनवाई पर
सुपरटेक के इन 16 प्रोजेक्ट्स से जुड़े घर खरीदारों के लिए आने वाली सुनवाई बेहद अहम होगी। उन्हें उम्मीद है कि आगे की कार्रवाई में परियोजनाओं को पूरा करने, फंडिंग, निर्माण की गति और कब्जे की समयसीमा को लेकर स्पष्ट दिशा सामने आएगी।
सवाल सिर्फ 16 प्रोजेक्ट्स का नहीं है। सवाल उन हजारों परिवारों का है, जिन्होंने अपना घर बनाने के लिए अपनी जिंदगी की कमाई लगा दी है और अब वर्षों बाद भी अपने आशियाने की चाबी का इंतजार कर रहे हैं।
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