PM Modi Independence Day Speech: 12 साल का हिसाब, अगले 5 साल का रोडमैप

नई दिल्ली। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी PM Modi  ने राष्ट्र के सामने बीते वर्षों की उपलब्धियों और आने वाले समय की प्राथमिकताओं का खाका रखा। तिरंगा फहराने के बाद अपने संबोधन में पीएम मोदी ने पिछले 12 वर्षों में भारत में हुए बदलावों का जिक्र किया और अगले चरण के लिए ऐसे लक्ष्य सामने रखे, जिनका सीधा संबंध अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा, रक्षा, युवाओं और आत्मनिर्भरता से है।

प्रधानमंत्री के भाषण का फोकस PM Modi Independence Day Speech साफ तौर पर इस बात पर रहा कि अब तक तैयार की गई विकास की नींव को अगले कुछ वर्षों में और मजबूत करते हुए भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में तेजी लाई जाए।

‘Fragile Five’ से मजबूत आर्थिक ताकत बनने तक की कहानी

पीएम मोदी ने भारत की आर्थिक स्थिति में आए बदलाव को अपने भाषण का अहम हिस्सा बनाया। उन्होंने याद दिलाया कि एक दौर में भारत को दुनिया की ‘Fragile Five’ अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया जाता था। अब तस्वीर बदल चुकी है और भारत दुनिया की प्रमुख तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना चुका है।

प्रधानमंत्री ने आर्थिक बदलाव को सिर्फ GDP और आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने नीतिगत बदलावों, बुनियादी ढांचे के विस्तार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और रक्षा क्षेत्र में बढ़ती घरेलू क्षमता को भी भारत के बदलते स्वरूप का हिस्सा बताया।

रक्षा उत्पादन इसका एक प्रमुख उदाहरण है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देश का रक्षा उत्पादन 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसी अवधि में रक्षा निर्यात में भी बड़ा उछाल देखने को मिला।

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अब नजर भविष्य पर, 2047 का लक्ष्य सामने

पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों के बाद प्रधानमंत्री ने आने वाले दौर की दिशा भी स्पष्ट की। विकसित भारत का लक्ष्य अब केवल एक दीर्घकालिक संकल्प नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में ठोस बदलावों से जोड़कर आगे बढ़ाने की कोशिश है।

तकनीक, ऊर्जा, उद्योग, युवा और राष्ट्रीय सुरक्षा को विकास की रणनीति के प्रमुख आधार के तौर पर सामने रखा गया। पीएम के भाषण में ‘सप्तधारा’ की अवधारणा भी चर्चा में रही, जिसके जरिए विकास के अलग-अलग आयामों को एक साथ आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।

सेमीकंडक्टर और परमाणु ऊर्जा पर बड़ा दांव

भारत की तकनीकी और ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए सेमीकंडक्टर और परमाणु ऊर्जा को विशेष महत्व दिया गया। सेमीकंडक्टर निर्माण को भविष्य की औद्योगिक और रणनीतिक ताकत के तौर पर देखा जा रहा है। इसका मकसद इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भारत की विदेशी निर्भरता कम करना और देश को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान दिलाना है।

वहीं, ऊर्जा के मोर्चे पर प्रधानमंत्री ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य सामने रखा। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा नीति में परमाणु ऊर्जा की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।

युवाओं के लिए AI से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक बड़ा प्लान

प्रधानमंत्री के भाषण में युवा शक्ति भी प्रमुखता से उभरी। AI जैसी उभरती तकनीकों में युवाओं को तैयार करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण की योजना का उल्लेख किया गया। अगले एक साल में एक करोड़ युवाओं को AI का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य सामने रखा गया है।

इसके साथ ही जरूरतमंद और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद देने के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा भी की गई।

खेलों को लेकर भी सरकार का जोर प्रतिभाओं की शुरुआती स्तर पर पहचान और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए तैयार करने पर है। इससे साफ है कि युवाओं को केवल रोजगार के नजरिए से नहीं, बल्कि तकनीक, खेल और नवाचार के जरिए भारत की वैश्विक ताकत बनाने की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है।

 

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‘मेक इन इंडिया’ से ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की कोशिश

आत्मनिर्भर भारत का एजेंडा भी प्रधानमंत्री के संबोधन में प्रमुख रहा। मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर रक्षा उपकरणों और रेलवे से जुड़े उत्पादन तक, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती क्षमता को भारत की बदलती तस्वीर के रूप में पेश किया गया।

अगली चुनौती केवल देश में सामान बनाना नहीं, बल्कि भारतीय उत्पादों और तकनीक को दुनिया के बाजारों तक पहुंचाना है। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, AI और आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग में निवेश इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

सुरक्षा के मोर्चे पर भी सख्त संदेश

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा को भी विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ा। नक्सलवाद के खिलाफ हुई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हथियारबंद नक्सली चुनौती के कमजोर पड़ने के बाद अब वैचारिक स्तर पर फैलने वाली चुनौतियों को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है।

इसका व्यापक संदेश यही रहा कि विकास के साथ देश की सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को भी समान महत्व दिया जाएगा।

अगले 5 साल बताएंगे कितनी बदलेगी तस्वीर

80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री का संबोधन बीते 12 वर्षों की उपलब्धियों और आने वाले वर्षों की महत्वाकांक्षाओं के बीच एक कड़ी के तौर पर देखा जा सकता है। सरकार ने जहां आर्थिक विकास, रक्षा उत्पादन और डिजिटल क्षमता में हुई प्रगति को अपनी उपलब्धि के रूप में पेश किया, वहीं अगले चरण के लिए AI, सेमीकंडक्टर, परमाणु ऊर्जा, युवा कौशल और आत्मनिर्भर विनिर्माण को प्राथमिकता दी।

अब नजर इस बात पर होगी कि लाल किले से घोषित ये लक्ष्य जमीन पर कितनी तेजी से आकार लेते हैं। अगले पांच साल भारत की अर्थव्यवस्था, रोजगार, तकनीकी क्षमता, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिहाज से निर्णायक हो सकते हैं।

यानी लाल किले से संदेश सिर्फ बीते 12 साल का हिसाब देने तक सीमित नहीं रहा। असली फोकस उस भारत की तस्वीर पर रहा, जिसे अगले चरण में तैयार करना है एक ऐसा भारत जो तकनीक में सक्षम, उत्पादन में आत्मनिर्भर, ऊर्जा में सुरक्षित और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेज कदम बढ़ा सके।

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