Niti Aayog Report 2026: भारत के 8.7 करोड़ युवा न पढ़ रहे, न नौकरी कर रहे, न ट्रेनिंग ले रहे! रिपोर्ट ने चौंकाया

Niti Aayog Report 2026: इंडिया के 8.7 करोड़ युवा आखिर कहां हैं? नीति आयोग की नई रिपोर्ट सामने आने के बाद ये सवाल उठ रहा है. भारत की युवा आबादी को देश की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है, लेकिन NITI Aayog की नई रिपोर्ट ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ ने देश के सामने एक बड़ी चुनौती को रेखांकित किया है। रिपोर्ट के मुताबिक 15 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 8.7 करोड़ युवा ऐसे हैं जो न तो शिक्षा हासिल कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी ट्रेनिंग प्रोग्राम से जुड़े हैं। NITI Aayog ने इस समूह को NEET यानी Not in Education, Employment or Training के तौर पर वर्गीकृत किया है।

रिपोर्ट के अनुसार यह संख्या संबंधित युवा आबादी का करीब 11 फीसदी है। हालांकि, NEET का मतलब केवल बेरोजगार होना नहीं है। इसमें ऐसे युवा भी शामिल हैं जो नौकरी की तलाश में नहीं हैं और शिक्षा या प्रशिक्षण से भी बाहर हैं।

88 फीसदी युवा घरेलू कामों में व्यस्त

इस आंकड़े का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि NEET युवाओं की बड़ी संख्या पूरी तरह निष्क्रिय नहीं है। जानकारी के मुताबिक, इस समूह के करीब 88 फीसदी लोग घरेलू जिम्मेदारियों में लगे हुए हैं। यही वजह है कि NITI Aayog की रिपोर्ट इस समस्या को केवल बेरोजगारी के आंकड़े के रूप में नहीं देखती, बल्कि शिक्षा, स्किलिंग और रोजगार से जुड़ी संरचनात्मक चुनौती के रूप में सामने रखती है।

खासकर महिलाओं के लिए घरेलू जिम्मेदारियां, सुरक्षित आवागमन, देखभाल की जिम्मेदारी और वित्तीय सीमाएं स्किलिंग तथा रोजगार में प्रवेश की राह में बड़ी बाधाएं हैं। NITI Aayog ने महिलाओं के लिए सुरक्षित हॉस्टल, परिवहन, चाइल्डकेयर और वित्तीय सहायता जैसे उपायों की जरूरत बताई है।

भारत के सामने सिर्फ नौकरी नहीं, ‘स्किल गैप’ की भी चुनौती

NITI Aayog की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पिछले एक दशक में स्किलिंग का बड़ा विस्तार हुआ है। 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसके बावजूद स्किलिंग के परिणाम हर जगह समान नहीं हैं।

रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा और ट्रेनिंग अक्सर वास्तविक नौकरी की जरूरतों से पूरी तरह जुड़ी नहीं होती। कई युवाओं को practical exposure, workplace experience, career guidance और रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग की कमी का सामना करना पड़ता है।

यानी चुनौती सिर्फ यह नहीं है कि युवाओं को ट्रेनिंग दी जाए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि ट्रेनिंग के बाद उनके पास नौकरी, कमाई या उद्यमिता का वास्तविक रास्ता हो।

स्कूल से ही स्किलिंग पर जोर

NITI Aayog ने स्किलिंग को केवल कॉलेज या नौकरी से पहले की प्रक्रिया मानने के बजाय स्कूल स्तर से शुरू करने का सुझाव दिया है।

रिपोर्ट में Grade 6 से General Employability and Entrepreneurship Skills (GEES) शुरू करने का प्रस्ताव है। इसमें communication, digital skills, financial literacy, teamwork, problem-solving और entrepreneurship जैसे skills शामिल किए जा सकते हैं।

Grade 9 से कुछ स्कूलों में Kaushal Tracks के जरिए vocational education को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से जोड़ने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को शुरुआती स्तर पर अलग-अलग career options और काम की दुनिया से परिचित कराना है।

अप्रेंटिसशिप को बनाया जाए बड़ा रास्ता

रिपोर्ट में अप्रेंटिसशिप को भी education और employment के बीच एक महत्वपूर्ण bridge के रूप में देखा गया है।

NITI Aayog का प्रस्ताव है कि युवाओं को केवल classroom-based training तक सीमित रखने के बजाय काम के दौरान सीखने (work-based learning) के ज्यादा अवसर दिए जाएं। Industry-backed programmes, internships और apprenticeships को मजबूत करने से युवाओं को वास्तविक workplace experience मिल सकता है।

महिलाओं की रोजगार भागीदारी पर विशेष ध्यान

रिपोर्ट में महिलाओं को अलग से एक महत्वपूर्ण cross-cutting segment के तौर पर देखा गया है। NITI Aayog के अनुसार महिलाओं के सामने skilling और employment के रास्ते में कई structural barriers हैं। इनमें घर की जिम्मेदारियां, mobility, safety, childcare और training की affordability प्रमुख हैं। रिपोर्ट में महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन, हॉस्टल, childcare और flexible learning/work opportunities जैसे उपायों पर जोर दिया गया है।

AI और Automation के दौर में बदल रही है नौकरी की दुनिया

आज रोजगार बाजार भी तेजी से बदल रहा है। Artificial Intelligence, automation, green transition और global supply-chain में बदलाव नए रोजगार पैदा कर रहे हैं, वहीं कुछ पारंपरिक भूमिकाओं की जरूरत भी बदल रही है।

NITI Aayog ने इसी वजह से skilling को एक बार की ट्रेनिंग के बजाय lifelong learning के रूप में देखने की जरूरत बताई है। रिपोर्ट के अनुसार भविष्य की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें व्यक्ति शिक्षा, ट्रेनिंग और रोजगार के बीच आसानी से move कर सके और जरूरत के मुताबिक reskill या upskill कर सके।

Viksit Bharat 2047 के लिए क्यों अहम है यह आंकड़ा?

भारत की युवा आबादी देश के demographic dividend की सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन यह dividend तभी आर्थिक ताकत में बदलेगा जब युवाओं को education + skills + employment की मजबूत कड़ी उपलब्ध हो। NITI Aayog ने इसी दिशा में skilling architecture को फिर से तैयार करने की जरूरत बताई है। रिपोर्ट में learner-centric व्यवस्था, industry participation, apprenticeships, skills-first hiring और education से employment तक flexible pathways बनाने की बात कही गई है। यानी 8.7 करोड़ NEET युवाओं का आंकड़ा सिर्फ रोजगार की चुनौती नहीं है। यह भारत के education system, skill ecosystem, women workforce participation और future jobs के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत की ओर भी इशारा करता है।

 

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