Constipation: कॉस्टिपेशन यानी कब्ज क्यों और कैसे हो जाता है? ये एक ऐसी आम समस्या है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। कभी-कभार कब्ज होना सामान्य हो सकता है, लेकिन अगर मल त्याग (stool) की आदत लगातार बदल रही है, मल कठोर हो गया है, शौच के दौरान ज्यादा जोर लगाना पड़ रहा है या पेट साफ नहीं होने का अहसास रहता है, तो इसे सिर्फ छोटी समस्या मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।
NIDDK यानी national institute of diabetes and digestive and kidney diseases dataset के अनुसार, कब्ज में सप्ताह में तीन से कम बार मल त्याग, कठोर या सूखा मल, मल त्याग में कठिनाई या दर्द और पेट पूरी तरह साफ न होने का अहसास जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं।
Journalist India ने Constipation की समस्या को समझने के लिए Nursing Officer नम्रता दीक्षित से बातचीत की। बातचीत में कब्ज के कारण, शुरुआती संकेत, खान-पान और लाइफस्टाइल की भूमिका तथा इसे नियंत्रित करने के व्यावहारिक तरीकों पर चर्चा की गई।
नोट: नीचे दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। किसी व्यक्ति के इलाज या दवा का विकल्प नहीं है।
Constipation यानी कब्ज क्या है?
कब्ज को केवल इस आधार पर नहीं समझना चाहिए कि व्यक्ति रोज शौच जाता है या नहीं। हर व्यक्ति की सामान्य bowel habit (your normal pattern of passing stool) अलग हो सकती है। समस्या तब मानी जाती है जब सामान्य आदत की तुलना में मल त्याग कम हो जाए, मल कठोर या गांठदार हो, शौच में दर्द या ज्यादा जोर लगाना पड़े या मल पूरी तरह बाहर नहीं निकलने का अहसास हो। यानी हर दिन शौच न होना अपने-आप में कब्ज का प्रमाण नहीं है, लेकिन आपकी सामान्य bowel habit में लगातार बदलाव जरूर ध्यान देने योग्य है।
Constipation क्यों होता है? ये हैं प्रमुख कारण
कब्ज के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हो सकते हैं। सबसे आम कारणों में खान-पान और रोजमर्रा की जीवनशैली शामिल हैं।
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डाइट में फाइबर की कमी
फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों जैसे फाइबर वाले खाद्य पदार्थों का कम सेवन कब्ज का कारण बन सकता है। फाइबर मल को अधिक आसानी से पास होने में मदद करता है। NIDDK के अनुसार वयस्कों को उम्र और लिंग के अनुसार सामान्यतः रोजाना 22 से 34 ग्राम फाइबर की जरूरत होती है। हालांकि फाइबर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है।
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पर्याप्त पानी न पीना
शरीर में पानी की कमी होने पर मल अधिक कठोर हो सकता है। खासकर यदि डाइट में फाइबर बढ़ाया जा रहा है तो पर्याप्त तरल पदार्थ लेना जरूरी है, क्योंकि पानी फाइबर को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है।
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शारीरिक गतिविधि की कमी
लंबे समय तक बैठे रहना और पर्याप्त physical activity न करना भी कब्ज की समस्या से जुड़ा हो सकता है। रोजमर्रा की गतिविधि बढ़ाना bowel movement को नियमित रखने में मदद कर सकता है।
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शौच की इच्छा को बार-बार रोकना
काम, यात्रा या दूसरी वजहों से बार-बार toilet urge को नजरअंदाज करने की आदत भी समस्या को बढ़ा सकती है। NHS की सलाह है कि शौच की इच्छा होने पर उसे टालना नहीं चाहिए।
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अचानक बदली डाइट या दिनचर्या
Travel, खान-पान में बदलाव या daily routine बदलने पर भी bowel habits प्रभावित हो सकती हैं।
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कुछ दवाएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं
कुछ painkillers, iron supplements, कुछ antidepressants, antacids और दूसरी दवाएं कब्ज बढ़ा सकती हैं। इसलिए यदि किसी दवा को शुरू करने के बाद कब्ज की समस्या हुई है तो बिना डॉक्टर की सलाह दवा बंद न करें।
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कुछ स्वास्थ्य स्थितियां
कभी-कभी कब्ज किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या का लक्षण भी हो सकता है। उदाहरण के लिए diabetes, hypothyroidism, कुछ neurological disorders और digestive disorders कब्ज से जुड़े हो सकते हैं।
कब्ज के शुरुआती लक्षण कैसे पहचानें?
कब्ज को शुरुआती स्तर पर पहचानने के लिए इन संकेतों पर ध्यान दें:
- सामान्य से कम बार शौच होना
- सप्ताह में तीन से कम बार bowel movement होना
- मल का सूखा, कठोर या गांठदार होना
- शौच के दौरान ज्यादा जोर लगाना
- मल त्याग के दौरान दर्द
- शौच के बाद भी पेट साफ न होने का अहसास
- पेट में दर्द या भारीपन
- पेट फूलना या bloating
- कभी-कभी मितली या भूख कम लगना
इनमें से एक-दो लक्षण कभी-कभार होना जरूरी नहीं कि गंभीर बीमारी का संकेत हो। लेकिन यदि समस्या बार-बार हो रही है या लगातार बनी हुई है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
Constipation को कंट्रोल कैसे करें?
कब्ज के हल्के और सामान्य मामलों में lifestyle और diet में बदलाव मदद कर सकते हैं।
फाइबर धीरे-धीरे बढ़ाएं
अपनी डाइट में दालें, चना, साबुत अनाज, oats, फल और सब्जियां शामिल करें। फाइबर की मात्रा अचानक बढ़ाने से कुछ लोगों में bloating बढ़ सकती है, इसलिए इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है।
पानी और तरल पदार्थ पर्याप्त लें
दिनभर पर्याप्त fluids लेना जरूरी है। हालांकि पानी की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है और उम्र, स्वास्थ्य, activity level तथा मौसम जैसे कारकों पर निर्भर करती है।
रोजाना सक्रिय रहें
लंबे समय तक लगातार बैठने के बजाय दिनभर movement बढ़ाएं। नियमित walk या दूसरी शारीरिक गतिविधि bowel movement को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
Toilet routine बनाएं
शौच की इच्छा को न रोकें। toilet के लिए पर्याप्त समय रखें। NHS के अनुसार toilet पर बैठते समय पैरों के नीचे छोटा stool रखने और घुटनों को hips से थोड़ा ऊपर रखने से कुछ लोगों को मल त्याग आसान लग सकता है।
क्या कब्ज में तुरंत laxative लेना चाहिए?
हर बार कब्ज होने पर अपने-आप laxative लेना सही तरीका नहीं है। NHS के अनुसार आम तौर पर पहले diet और lifestyle में बदलाव आजमाने की सलाह दी जाती है। जरूरत पड़ने पर pharmacist या डॉक्टर उपयुक्त laxative की सलाह दे सकते हैं।
खासकर यदि कब्ज लंबे समय से है, बार-बार हो रहा है या साथ में दूसरे लक्षण भी हैं, तो केवल laxative लेकर समस्या को दबाने के बजाय मूल कारण की जांच जरूरी हो सकती है।
कब कब्ज को लेकर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर कब्ज lifestyle बदलाव के बावजूद ठीक नहीं हो रहा या बार-बार हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
इन संकेतों को विशेष रूप से नजरअंदाज न करें:
- मल में खून या rectal bleeding
- लगातार या तेज पेट दर्द
- बिना कोशिश के वजन कम होना
- लगातार पेट फूलना
- अचानक bowel habit में बड़ा बदलाव
- लगातार थकान
- उल्टी
- गैस और मल दोनों पास न कर पाना
- लंबे समय से बनी हुई कब्ज की समस्या
NIDDK के अनुसार कब्ज के साथ rectal bleeding, stool में blood, लगातार abdominal pain, गैस पास न होना, vomiting, fever या unexplained weight loss जैसे लक्षण हों तो चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
कब्ज को लेकर सबसे बड़ी गलती क्या है?
सबसे बड़ी गलती है बार-बार होने वाली कब्ज को सामान्य मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना। दूसरी गलती बिना सलाह के बार-बार दवाएं या laxatives लेना है। यदि कब्ज किसी दवा की वजह से हो रहा है, तो उस दवा को खुद से बंद करने के बजाय डॉक्टर या pharmacist से बात करनी चाहिए।
Constipation यानी कब्ज अक्सर हमारी डाइट, पानी की मात्रा, physical activity और toilet routine से जुड़ी समस्या हो सकती है। फाइबर युक्त भोजन, पर्याप्त fluids, नियमित physical activity और शौच की इच्छा को न रोकने जैसी आदतें कब्ज को रोकने और नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं। लेकिन यदि कब्ज लगातार बनी हुई है, बार-बार लौट रही है या इसके साथ खून, तेज/लगातार पेट दर्द, उल्टी, वजन कम होना या गैस-मल पास न होना जैसे warning signs हैं, तो self-treatment के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
Journalist India की Nursing Officer नम्रता दीक्षित के साथ बातचीत का उद्देश्य भी यही है कि लोग कब्ज को शर्म या लापरवाही का विषय न मानें, बल्कि शुरुआती संकेतों को पहचानकर अपनी lifestyle और diet पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर समय रहते medical advice लें।
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