IIT बॉम्बे में 22 वर्षीय छात्र साहिल रवींद्र वाकोडे की आत्महत्या (IIT Bombay Student Suicide) के बाद कैंपस में जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच संस्थान ने बड़ा कदम उठाया है। IIT बॉम्बे के डायरेक्टर प्रो. शिरीष बी. केदारे ने डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को तत्काल प्रभाव से डीन पद से सस्पेंड कर दिया है। संस्थान ने इस मामले में पहले जारी की गई जानकारी को लेकर खेद जताते हुए माफी भी मांगी है।
IIT बॉम्बे ने हालांकि स्पष्ट किया है कि प्रोफेसर डूला को संस्थान की नौकरी से निलंबित नहीं किया गया है। फिलहाल कार्रवाई उनकी डीनशिप तक सीमित है। मामले की जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
परीक्षा में मोबाइल और ChatGPT के इस्तेमाल का आरोप
साहिल वाकोडे महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रहने वाले थे और IIT बॉम्बे के Energy Science and Engineering विभाग में BTech द्वितीय वर्ष के छात्र थे।
19 सितंबर को पवई स्थित IIT बॉम्बे कैंपस के हॉस्टल में साहिल मृत पाए गए। घटना से कुछ घंटे पहले वह मिड-सेमेस्टर परीक्षा दे रहे थे। संस्थान की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, परीक्षा के दौरान उनके पास मोबाइल फोन पाया गया था और आरोप है कि उन्होंने प्रश्नपत्र की तस्वीर ChatGPT पर अपलोड कर उत्तर हासिल करने की कोशिश की।
इसी घटना के बाद साहिल के खिलाफ अकादमिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई। इसके बाद उनकी मौत ने पूरे मामले को गंभीर विवाद में बदल दिया।
परिवार ने लगाए जातिगत भेदभाव और मानसिक दबाव के आरोप
साहिल के परिवार ने IIT बॉम्बे के कुछ अधिकारियों और शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का आरोप है कि साहिल को कथित तौर पर मानसिक दबाव और जाति आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ा।
परिवार की शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि परीक्षा से जुड़े मामले के बाद साहिल पर कार्रवाई और पढ़ाई से निलंबन का दबाव था।
हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है। IIT बॉम्बे की ओर से पहले कहा गया था कि साहिल से शिक्षकों ने बातचीत की थी और उन्हें यह भरोसा दिलाया गया था कि परीक्षा से जुड़ी घटना का उनके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
साहिल के माता-पिता की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। शिकायत में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को आरोपी बनाया गया है।
मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब पुलिस परिवार के आरोपों, घटनाक्रम और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
यहां यह महत्वपूर्ण है कि लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं और अदालत अथवा जांच एजेंसी के अंतिम निष्कर्ष के बिना किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
तीन दिन तक कैंपस में प्रदर्शन
साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे में छात्रों का विरोध तेज हो गया। बड़ी संख्या में छात्र प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए मुख्य गेट पर पहुंच गए।
20 सितंबर की रात IIT बॉम्बे के डायरेक्टर प्रो. शिरीष केदारे स्वयं छात्रों से बातचीत करने पहुंचे। छात्रों और प्रशासन के बीच करीब तीन घंटे तक बातचीत चली।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई, मामले की निष्पक्ष जांच, संस्थान की ओर से सार्वजनिक माफी, पीड़ित परिवार को सहायता और छात्रों की शिकायतों के समाधान समेत कई मांगें रखीं।
प्रशासन ने 18 मांगों पर जताई सहमति
छात्रों की ओर से रखे गए मांग-पत्र में कुल 18 मांगें शामिल थीं। बातचीत के बाद IIT बॉम्बे प्रशासन ने इन मांगों पर सहमति जताई और डायरेक्टर ने संबंधित दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए।
मांगों में जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता, छात्र शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करना, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, भेदभाव से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई और साहिल की मौत से जुड़े मामले में जवाबदेही जैसी बातें शामिल थीं।
IIT बॉम्बे ने पहले के बयान पर जताया खेद
विवाद बढ़ने के बाद IIT बॉम्बे ने अपने पहले के बयान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। संस्थान ने कहा कि साहिल की मौत से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में पहले दी गई जानकारी उचित नहीं थी और इसके लिए संस्थान को खेद है।
इसके बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के पद से सस्पेंड करने का फैसला लिया गया।
IIT बॉम्बे ने दोहराया कि यह कार्रवाई फिलहाल उनकी डीनशिप के संबंध में है और जांच के परिणाम के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर के समर्थन में रखा पक्ष
मामले में IIT बॉम्बे के फैकल्टी फोरम की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। फोरम ने प्रोफेसर डूला का समर्थन करते हुए कहा है कि परीक्षा से जुड़ी कार्रवाई संस्थान की सीनेट द्वारा स्वीकृत नियमों के अनुसार की गई थी।
इससे मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। एक ओर साहिल के परिवार और प्रदर्शनकारी छात्र गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं फैकल्टी फोरम परीक्षा नियमों के तहत प्रोफेसर की भूमिका का बचाव कर रहा है।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना से पहले साहिल के साथ वास्तव में क्या हुआ था और किन परिस्थितियों ने इस दुखद घटना को जन्म दिया।
हॉस्टल में सीलिंग फैन हटाने की तैयारी
साहिल की मौत के बाद IIT बॉम्बे ने हॉस्टल की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा फैसला लिया है। कैंपस में आत्महत्या की घटनाओं को देखते हुए हॉस्टल के कमरों में लगे सीलिंग फैन को हटाकर उनकी जगह दीवार पर लगाए जाने वाले पंखे लगाने की योजना बनाई गई है।
बताया गया है कि नए पंखों की पहली खेप कैंपस पहुंच चुकी है और उन्हें चरणबद्ध तरीके से लगाया जाएगा।
अब जांच पर टिकी नजर
साहिल वाकोडे की मौत के बाद IIT बॉम्बे में मामला अब केवल एक छात्र की आत्महत्या तक सीमित नहीं रह गया है। परीक्षा में कथित अनियमितता, संस्थागत कार्रवाई, छात्र पर मानसिक दबाव, जातिगत भेदभाव के आरोप और संस्थान की जवाबदेही जैसे कई सवाल इस मामले से जुड़ गए हैं।
फिलहाल पुलिस जांच, संस्थान की आंतरिक प्रक्रिया और छात्रों के साथ हुए समझौते के तहत आगे की कार्रवाई जारी है। प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को डीन पद से हटाया जाना इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि साहिल की मौत से पहले घटनाक्रम क्या था और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
