Arnab Goswami का दावा: ‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं, देश में दंगा और सिविल वॉर कराना था CJP प्रदर्शनकारियों का मकसद

नई दिल्ली :

Arnab Goswami ने CJP प्रोटेस्ट को लेकर बड़ा खुलास किया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और जंतर-मंतर पर लंबे समय से चल रहे CJP (Cockroach Janta Party) के आंदोलन के समाप्त होने के बाद भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और मीडिया जगत में बहस जारी है। इसी बीच रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी ने अपने कार्यक्रम में आंदोलन को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि CJP प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना नहीं था, बल्कि देश में व्यापक अस्थिरता पैदा करना, हिंसा भड़काना और सिविल वॉर जैसी स्थिति उत्पन्न करना था।

अपने शो के दौरान अर्नब गोस्वामी ने कहा कि यदि सरकार समय रहते हस्तक्षेप नहीं करती, तो आंदोलन एक बड़े राष्ट्रीय संकट का रूप ले सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को लगातार इस तरह आगे बढ़ाया जा रहा था कि देशभर में अराजकता का माहौल बने और कानून-व्यवस्था पर गंभीर असर पड़े। उनके अनुसार, आंदोलन का एजेंडा केवल छात्रों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया था।

“इस्तीफे के बाद भी आंदोलन जारी रखने की तैयारी थी”

Arnab Goswami का दावा देश में सिविल वॉर कराना था CJP प्रदर्शनकारियों मकसद
Arnab Goswami का दावा देश में सिविल वॉर कराना था CJP प्रदर्शनकारियों मकसद

 

अर्नब गोस्वामी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त हो जाना चाहिए था, लेकिन उनके अनुसार कुछ लोग इसे और आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मुख्य मांग पूरी हो चुकी थी, तो आंदोलन को जारी रखने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही थी। उनके मुताबिक, यही बात इस पूरे आंदोलन की मंशा पर सवाल खड़े करती है।

उन्होंने अपने कार्यक्रम में कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में माहौल को भड़काने की कोशिश की जा रही थी और सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई तरह के नैरेटिव तैयार किए जा रहे थे। हालांकि, उन्होंने अपने इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।

सरकार के फैसले का किया समर्थन

अर्नब गोस्वामी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को एक राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णय बताते हुए कहा कि सरकार ने बड़ा विवाद टालने के लिए यह कदम उठाया। उन्होंने कहा कि कई बार सरकारें व्यापक राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए ऐसे फैसले लेती हैं, जिनका उद्देश्य तनाव को कम करना होता है।

गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा था कि छात्रों का भविष्य किसी भी राजनीतिक विवाद से ऊपर है और देशहित में उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया।

आंदोलन समाप्त होने का हुआ ऐलान

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने भी जंतर-मंतर पर चल रहे अपने धरना-प्रदर्शन को समाप्त करने की घोषणा की। आंदोलनकारियों ने दावा किया कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापस लेने, कानूनी प्रक्रिया के तहत मुआवजे पर विचार करने और अन्य मुद्दों पर सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

अर्नब गोस्वामी के बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस शुरू हो गई। एक वर्ग ने उनके आरोपों का समर्थन किया, जबकि दूसरे वर्ग ने इसे राजनीतिक टिप्पणी बताते हुए सवाल उठाए। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बयान को लेकर पक्ष और विपक्ष में प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

दिल्ली पुलिस ने भी किया खुलासा

दिल्ली पुलिस भी ये खुलासा कर चुकी है कि दिल्ली में हुए प्रदर्शन को पाकिस्तान से भी मानीटर किया जा रहा था और साथ ही साथ कई AI से बनाए फेक वीडियो भी शेयर किए जा रहे थे.

 

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