नाना पाटेकर की मौत: क्या है कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक से कितना अलग?

नई दिल्ली। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। 75 वर्षीय अभिनेता का 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हुआ। अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया था। अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका।

नाना पाटेकर के निधन के बाद एक बार फिर कार्डियक अरेस्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आखिर कार्डियक अरेस्ट क्या होता है और यह हार्ट अटैक से कितना अलग है?

क्या होता है कार्डियक अरेस्ट?

कार्डियक अरेस्ट एक ऐसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें दिल अचानक प्रभावी तरीके से धड़कना और शरीर में रक्त पंप करना बंद कर देता है। इसका सीधा असर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, खासकर मस्तिष्क पर पड़ता है।

जब दिल रक्त पंप नहीं कर पाता तो दिमाग और शरीर के दूसरे हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचना तेजी से कम हो जाता है। व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है, सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर सकता है और उसकी नब्ज महसूस नहीं हो सकती।

ऐसी स्थिति में हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाना और प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा CPR शुरू करना बेहद जरूरी होता है।
कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में क्या अंतर है?

अक्सर लोग कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग स्थितियां हैं।

हार्ट अटैक आमतौर पर तब होता है जब दिल की मांसपेशियों तक रक्त पहुंचाने वाली किसी धमनी में रुकावट आ जाती है। इससे हृदय के एक हिस्से को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिल पाती।

वहीं कार्डियक अरेस्ट में दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि में गंभीर गड़बड़ी होने के कारण दिल अचानक प्रभावी रूप से पंप करना बंद कर सकता है।

हालांकि दोनों स्थितियों का आपस में संबंध हो सकता है। हार्ट अटैक कुछ मामलों में ऐसी इलेक्ट्रिकल समस्या पैदा कर सकता है जो कार्डियक अरेस्ट का कारण बन जाए।
कार्डियक अरेस्ट आने पर क्या दिखाई देता है?

कार्डियक अरेस्ट अक्सर बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के भी हो सकता है। इसके प्रमुख संकेतों में शामिल हैं व्यक्ति का अचानक बेहोश हो जाना सामान्य रूप से सांस न लेना या सांस रुक जाना प्रतिक्रिया न देना नब्ज महसूस न होना

ऐसी स्थिति में इंतजार करना खतरनाक हो सकता है। तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लेनी चाहिए और यदि व्यक्ति सांस नहीं ले रहा है तो CPR शुरू करना चाहिए।

CPR क्यों महत्वपूर्ण है?

CPR यानी Cardiopulmonary Resuscitation ऐसी आपातकालीन प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य छाती पर दबाव देकर शरीर में रक्त का संचार बनाए रखने की कोशिश करना है, जब तक कि मेडिकल सहायता उपलब्ध न हो जाए।
नाना पाटेकर के मामले में भी अस्पताल में डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें पुनर्जीवित करने की कोशिश की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इसके बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

नाना पाटेकर का जाना सिनेमा के लिए बड़ी क्षति

नाना पाटेकर ने करीब पांच दशक तक हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।

उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्म श्री सहित कई सम्मान मिले थे। अभिनय के अलावा वह सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे और किसानों तथा ग्रामीण समुदायों से जुड़े मुद्दों पर काम करते रहे।

उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत फिल्म और राजनीतिक जगत की कई हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने उनके निधन को भारतीय सिनेमा के लिए बड़ी क्षति बताया।

नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के एक ऐसे अध्याय का अंत है, जिसकी पहचान उनकी दमदार आवाज, संवाद अदायगी और अद्वितीय अभिनय शैली से रही।

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