Iran US Israel War: IRIS डेना के नाविकों के ताबूतों की तस्वीरें जारी, ईरान बोला- ‘इस दर्द को कभी नहीं भूलेंगे’

Iran US Israel War: ईरान ने युद्धपोत IRIS डेना पर हमले में मारे गए नाविकों के ताबूतों की तस्वीरें जारी कीं और अमेरिका पर ‘युद्ध अपराध’ का आरोप लगाया। घटना श्रीलंका के तट के पास हुई, जहां हमले के बाद भारतीय नेवी ने बचाव अभियान में मदद की।

Iran US Israel War: ईरान की सरकार ने शुक्रवार को IRIS Dena युद्धपोत पर हुए हमले में मारे गए नौसैनिकों के ताबूतों की तस्वीरें जारी कीं। ईरान के भारत स्थित दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि ये उन नौसेना कर्मियों के पार्थिव शरीर हैं, जिन्होंने IRIS डेना पर हुए अमेरिकी हमले में जान गंवाई। पोस्ट में इस घटना को “आतंकवादी हमला” बताया गया।

इससे पहले मंगलवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाएई ने भी मारे गए नाविकों को श्रद्धांजलि दी थी। उन्होंने इस घटना को “युद्ध अपराध” करार देते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है और ईरानी जनता इस घटना को कभी नहीं भूलेगी।

ईरान का अमेरिका पर गंभीर आरोप

सोशल मीडिया पर किए गए अपने संदेश में बकाएई ने लिखा कि वे 4 मार्च को अपने देश से दूर शहीद हुए डेना फ्रिगेट के नाविकों को श्रद्धांजलि देते हैं। उन्होंने बताया कि इस युद्धपोत को संयुक्त नौसैनिक अभ्यास और पोर्ट विजिट के लिए आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना ने आमंत्रित किया था। ईरानी पक्ष का आरोप है कि अमेरिका ने भारत और श्रीलंका के तट के पास जहाज पर हमला कर उसे डुबो दिया, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। बकाएई के अनुसार, इस हमले के बाद बचाव अभियान में भी बाधा डाली गई। उन्होंने कहा कि यह कृत्य संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 3314 के तहत आक्रामकता की श्रेणी में आता है और युद्ध संबंधी कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। उनके मुताबिक, ईरान इस घटना को न तो भूलेगा और न ही माफ करेगा।

भारतीय नौसेना ने की थी तुरंत मदद

जानकारी के अनुसार, IRIS Dena 4 मार्च को श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास हमला होने के बाद डूब गया था। बताया जाता है कि अमेरिका की एक पनडुब्बी से दागे गए टॉरपीडो ने जहाज को निशाना बनाया। यह घटना गाले के पश्चिम में करीब 20 समुद्री मील (लगभग 37 किलोमीटर) दूरी पर हुई थी। शुरुआती रिपोर्टों में यह दूरी करीब 40 समुद्री मील बताई गई थी। घटना की जानकारी मिलते ही भारतीय नौसेना ने तेजी से राहत और बचाव अभियान शुरू किया।

इस अभियान में INS Tarangini और INS Ikshak जैसे जहाजों के साथ पी-8आई समुद्री गश्ती विमान भी शामिल किए गए। यह खोज और बचाव अभियान श्रीलंका के नेतृत्व में चलाया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, जहाज पर लगभग 180 नाविक मौजूद थे। इस हमले में 87 नौसैनिकों की मौत हो गई, जबकि 32 लोगों को श्रीलंका नौसेना ने सुरक्षित बचाकर गाले के अस्पतालों में भर्ती कराया। ईरान ने इस घटना को लेकर अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी जांच की मांग भी उठाई है।

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