Amit Shah on Rahul Gandhi: ‘बोलने का मौका आए तो विदेश में रहते है..’ अमित शाह ने राहुल गांधी को संसद में घेरा

Amit Shah on Rahul Gandhi: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लोकतंत्र के लिए अफसोसजनक बताया। उन्होंने कहा कि स्पीकर निष्पक्ष होते हैं और उनकी निष्ठा पर सवाल उठाना पूरी दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है। शाह ने विपक्ष को संसदीय नियमों और मर्यादा का पालन करने की नसीहत दी, साथ ही जोर दिया कि स्पीकर का पद दलगत राजनीति से ऊपर है।

Amit Shah on Rahul Gandhi: केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है। उन्होंने बताया कि करीब चार दशक बाद लोकसभा के स्पीकर के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव लाया गया है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। शाह ने कहा कि स्पीकर किसी एक राजनीतिक दल के नहीं होते, बल्कि पूरे सदन के होते हैं और सभी सांसदों के अधिकारों की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी होती है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई सदस्य सदन के नियमों का पालन नहीं करेगा तो उसका माइक बंद किया जा सकता है। नियमों की अनदेखी करने पर स्पीकर को उसे रोकने-टोकने और जरूरत पड़ने पर सदन से बाहर करने का अधिकार है। शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे चर्चा करने के बजाय हंगामा करना चाहते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब बोलने का मौका आता है तो Rahul Gandhi जर्मनी या लंदन में होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में किसी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस नहीं हो सकती।

शाह ने बताया कि इस मुद्दे पर सदन में दस घंटे से अधिक समय तक चर्चा हो चुकी है और 42 से ज्यादा सांसद अपनी बात रख चुके हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब Om Birla को स्पीकर चुना गया था, तब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं ने मिलकर उन्हें आसन पर बैठाया था, जो इस बात का संकेत है कि उन्हें दोनों पक्षों का समर्थन प्राप्त था।

गृह मंत्री ने कहा कि स्पीकर के किसी फैसले से असहमति हो सकती है, लेकिन उनकी निष्ठा पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। उनके अनुसार, Lok Sabha देश के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है और इसकी प्रतिष्ठा पूरी दुनिया में है। ऐसे में यदि इसके अध्यक्ष की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाते हैं, तो इससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की छवि पर असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि सदन कोई मेला नहीं है, जहां कोई भी खड़ा होकर कुछ भी बोल दे। संसद को चलाने के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं और उन्हीं के अनुसार चर्चा होती है। यदि कोई सदस्य नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे रोकना या बाहर करना स्पीकर की जिम्मेदारी होती है। शाह ने कहा कि ये नियम आज के नहीं हैं, बल्कि Jawaharlal Nehru के समय से लागू हैं।

अमित शाह ने यह भी कहा कि अब तक लोकसभा में तीन बार स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए गए हैं और इनमें से किसी भी मौके पर भाजपा ने ऐसा प्रस्ताव नहीं लाया। उन्होंने कहा कि स्पीकर की निष्पक्षता पर संदेह नहीं करना चाहिए, क्योंकि सदन की व्यवस्था और शिष्टाचार बनाए रखना उनकी पहली जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि सदन में बोलते समय सदस्य स्पीकर के माध्यम से अपनी बात रखते हैं। नियमों की अवहेलना होने पर स्पीकर के पास चेतावनी देने, सदस्य का नाम लेने, निलंबित करने और गंभीर स्थिति में सदन स्थगित करने तक का अधिकार होता है।

शाह ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव कोई रोजमर्रा की प्रक्रिया नहीं है। पहले जब भी ऐसे प्रस्ताव आए, तब चर्चा के दौरान स्पीकर आसन पर नहीं बैठे। उन्होंने कहा कि ओम बिरला ऐसे स्पीकर हैं जिन्होंने इस परंपरा का पालन किया, इसलिए उन्हें नैतिकता का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है।

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष ने नियमों के अनुसार अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया, फिर भी उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्ताव पर गंभीर चर्चा करने के बजाय विपक्ष ने सदन का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की।

माइक बंद करने के आरोपों पर शाह ने कहा कि यह केवल राहुल गांधी के साथ नहीं होता, बल्कि जो भी सदस्य नियमों का पालन नहीं करता उसका माइक बंद किया जाता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह कहकर कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता, भाजपा की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।

अंत में शाह ने कहा कि भाजपा ने कभी विपक्ष की आवाज दबाने का काम नहीं किया। उनके अनुसार, विपक्ष की आवाज दबाने की घटनाएं तो आपातकाल के दौरान हुई थीं। उन्होंने कहा कि सदन में किसी सदस्य का आचरण कैसा होना चाहिए, इसका निर्णय करने का अधिकार पीठ के पास होता है।

 

 

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