Paper Leak Bill 2026: 10 साल जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना, जानें नए कानून की पूरी जानकारी

Paper Leak Bill 2026: केंद्र सरकार ने पेपर लीक पर 10 साल की जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना, STF, फास्ट ट्रैक कोर्ट और परीक्षा एजेंसियों पर कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव रखा।

Paper Leak Bill 2026: 10 साल जेल, ₹10 करोड़ जुर्माना, जानें नए कानून की पूरी जानकारी : देशभर में पेपर लीक और परीक्षा घोटालों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने संसद में पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफ़ेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 पेश किया है। इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है।

अगर यह विधेयक पारित होता है, तो पेपर लीक कराने वाले संगठित गिरोहों, परीक्षा एजेंसियों और दोषी अधिकारियों पर पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी। नए प्रस्तावित कानून में 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, फास्ट ट्रैक कोर्ट, स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और विशेष लोक अभियोजक जैसी कई नई व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं।

क्या हैं नए संशोधन बिल की सबसे बड़ी बातें?

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  1. व्यक्तिगत नकल करने वालों पर भी सख्ती

2024 के कानून के मुकाबले अब व्यक्तिगत स्तर पर अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ भी सजा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।

प्रस्तावित प्रावधान:

अधिकतम 10 साल तक की जेल

अधिकतम 50 लाख रुपये तक का जुर्माना

  1. पेपर लीक कराने वाले गिरोहों पर सबसे बड़ा प्रहार

संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले माफिया के खिलाफ भी दंड और आर्थिक जुर्माना कई गुना बढ़ाने का प्रस्ताव है।

2024 कानून

कम से कम 5 साल की जेल

कम से कम 1 करोड़ रुपये जुर्माना

2026 संशोधन प्रस्ता

कम से कम 7 साल की जेल

कम से कम 10 करोड़ रुपये जुर्माना

सरकार का मानना है कि आर्थिक रूप से मजबूत पेपर लीक नेटवर्क को केवल कड़ी आर्थिक सजा से ही रोका जा सकता है।

  1. परीक्षा एजेंसियों पर भी होगी बड़ी कार्रवाई

अब केवल अभ्यर्थी या दलाल ही नहीं, बल्कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियां भी सीधे जवाबदेह होंगी।

यदि किसी एजेंसी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो—

एजेंसी पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना

जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई

  1. जांच करेगी स्पेशल टास्क फोर्स (STF)

नए संशोधन में पहली बार पेपर लीक मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स (STF) बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

इसके साथ ही

जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।

जांच में देरी रोकने के लिए समय-सीमा तय की गई है।

  1. फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई

पेपर लीक मामलों को वर्षों तक लंबित रहने से रोकने के लिए सरकार ने विशेष अदालतों का प्रस्ताव दिया है।

विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई

मामलों का त्वरित निपटारा

  1. स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति

सरकार राज्य और केंद्र स्तर पर विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति कर सकेगी ताकि मामलों की प्रभावी पैरवी हो और दोषियों को जल्द सजा मिल सके।

  1. हाई कोर्ट में विशेष अपील व्यवस्था

बिल में अपील प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाया गया है।

फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील 30 दिनों के भीतर

हाई कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ सुनवाई करेगी।

अपील का निपटारा तीन महीने के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।

विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 90 दिन तक की देरी स्वीकार की जा सकेगी।

पीएम मोदी ने की हाई पावर्ड टास्क फोर्स की घोषणा

26 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह भरोसेमंद, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, वे जेल में हैं और सरकार आगे भी कठोर कानूनी प्रावधान लागू करेगी।

टास्क फोर्स में कौन-कौन शामिल?

सरकारी जानकारी और समाचार एजेंसियों के अनुसार इस उच्चस्तरीय समिति में कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं-

नंदन नीलेकणी (अध्यक्ष)

एस. सोमनाथ

तपन डेका

वी. कामकोटी

अनीता करवाल

अमृत लाल मीणा

यह समिति परीक्षा प्रणाली में तकनीक के बेहतर उपयोग, डिजिटल सुरक्षा और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए अपनी सिफारिशें देगी।

विपक्ष का हंगामा, चर्चा अभी बाकी

हालांकि सरकार संसद में संशोधन विधेयक पेश कर चुकी है, लेकिन दोनों सदनों में जारी हंगामे के कारण अब तक इस पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी है। विधेयक पर बहस और पारित होने की प्रक्रिया संसद की आगामी कार्यवाही में आगे बढ़ सकती है।

क्या बदल सकती है परीक्षा व्यवस्था?

यदि यह संशोधन कानून के रूप में लागू होता है तो भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में अब तक का सबसे बड़ा कानूनी बदलाव माना जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे पेपर लीक माफिया पर कड़ा प्रहार होगा, परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय होगी और लाखों छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास मजबूत होगा। वहीं, विपक्ष इस विधेयक पर चर्चा के दौरान इसके विभिन्न प्रावधानों और प्रभावों पर सवाल उठा सकता है।

 

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