CM Dhami Madrasa Action: उत्तराखंड में 200 से ज्यादा गैर-पंजीकृत मदरसों पर कार्रवाई की तैयारी हो रही है. इसे लेकर राज्य के मुख्यमंत्री CM पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा संकेत दिया है. दरअसल, उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता और संचालन को लेकर राज्य सरकार ने अपना रुख और सख्त कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि जो मदरसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत मान्यता हासिल नहीं करेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार के इस रुख के बाद प्रदेश में ऐसे मदरसों को लेकर चर्चा तेज हो गई है, जिन्होंने अब तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है।
452 मदरसों में 200 से ज्यादा ने नहीं किया आवेदन
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड में करीब 452 मदरसे संचालित हैं। इनमें से 200 से अधिक संस्थानों ने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। सरकार की ओर से ऐसे संस्थानों को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय दिया गया है। यह समयसीमा सितंबर में पूरी होनी है। इसके बाद नियमों के मुताबिक सीलिंग समेत अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
वहीं, करीब 200 मदरसों ने शिक्षा विभाग के पोर्टल पर मान्यता के लिए आवेदन किया है। प्राधिकरण की ओर से अब तक सात मदरसों समेत नौ संस्थानों को मान्यता दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा 26 मदरसों को प्रमाणपत्र दिए जाने की प्रक्रिया भी बताई गई है।
CM धामी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य में संचालित मदरसों को पहले निर्धारित नियमों के अनुसार मंजूरी लेनी होगी। जो संस्थान मान्यता लेने से बचेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि नियमों का पालन सभी संस्थानों के लिए जरूरी है।
धामी सरकार का यह रुख केवल मदरसों की मान्यता तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने राज्य में कानून-व्यवस्था, अवैध कब्जों और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ भी कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।
मदरसा बोर्ड की जगह बना नया प्राधिकरण
उत्तराखंड सरकार ने मदरसा शिक्षा से जुड़ी व्यवस्था में भी बदलाव किया है। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन किया गया है। सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना है।
सरकार की योजना के तहत मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, गणित, तकनीक और कौशल आधारित शिक्षा पर भी जोर दिया जाना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों को मिलने वाले प्रमाणपत्रों और मार्कशीट की वैधता सुनिश्चित करने की दिशा में भी नई व्यवस्था लाई गई है।
दो मदरसे सील, अन्य पर भी कार्रवाई की तैयारी
रिपोर्ट के अनुसार हरिद्वार में बिना निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए संचालित किए जा रहे दो संस्थानों को सील किया जा चुका है। वहीं ऊधमसिंह नगर और देहरादून में भी ऐसे संस्थानों को चिह्नित किए जाने की बात सामने आई है।
इससे संकेत मिलता है कि सरकार अब केवल नोटिस या समयसीमा तक सीमित रहने के बजाय नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ वास्तविक कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है सरकार का यह फैसला?
उत्तराखंड सरकार के इस कदम का असर राज्य में संचालित मदरसों की प्रशासनिक और शैक्षिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। मान्यता की प्रक्रिया पूरी करने वाले संस्थानों को नई व्यवस्था के तहत काम करना होगा, जबकि निर्धारित प्रक्रिया से बाहर रहने वाले संस्थानों के सामने संचालन जारी रखने की चुनौती होगी।
सरकार की ओर से जोर इस बात पर है कि शिक्षा संस्थानों में निर्धारित मानकों का पालन हो और वहां पढ़ने वाले बच्चों को ऐसी शिक्षा मिले, जिससे वे आगे की पढ़ाई और रोजगार के अवसरों से जुड़ सकें।
आगे क्या होगा?
अब सबसे महत्वपूर्ण समयसीमा सितंबर 2026 है। जिन मदरसों ने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। समयसीमा समाप्त होने के बाद सरकार और संबंधित प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर सीलिंग जैसी कार्रवाई की जा सकती है। यानी उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की नई शिक्षा व्यवस्था और नियमन के बड़े बदलाव का हिस्सा बन चुका है।