उत्तराखंड में धामी मॉडल: UCC से ऑपरेशन कालनेमि तक 10 बड़े फैसले, जमीन पर कितना बदला?

Pushkar Singh Dhami 10 Big Decisions : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) के कार्यकाल को अगर सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी से अलग रखकर नीतिगत फैसलों के नजरिए से देखा जाए तो पिछले कुछ वर्षों में राज्य ने ऐसे कई निर्णय लिए हैं, जिनकी चर्चा उत्तराखंड से बाहर, पूरे देश में भी हुई है।

सबसे बड़ा उदाहरण समान नागरिक संहिता यानी UCC है। 27 जनवरी 2025 से इसे लागू करके उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में ऐसा करने वाला पहला राज्य बना। इसके बाद UCC को लेकर दूसरे राज्यों में भी चर्चा तेज हुई। अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री धामी ने भी कहा कि उत्तराखंड का UCC मॉडल दूसरे राज्यों को प्रेरित कर रहा है।

लेकिन धामी सरकार की कहानी सिर्फ UCC तक सीमित नहीं है। भूमि कानून, भर्ती में नकल पर कार्रवाई, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगाइयों से नुकसान की वसूली, महिलाओं को आरक्षण, अतिक्रमण हटाने और ऑपरेशन कालनेमि जैसे फैसलों ने सरकार की एक अलग राजनीतिक-प्रशासनिक पहचान बनाई है।

आइए जानते हैं ऐसे 10 बड़े फैसले और उनका जमीन पर दिख रहा असर-

  1. UCC: उत्तराखंड बना देश का पहला राज्य
Pushkar Singh Dhami UCC

 

धामी सरकार का सबसे बड़ा और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित फैसला Uniform Civil Code है। 27 जनवरी 2025 से उत्तराखंड में UCC लागू हुआ। इसके तहत विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू की गई। साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण की व्यवस्था भी की गई।

जमीन पर क्या बदला?

UCC के सरकारी पोर्टल पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े पंजीकरण लगातार दर्ज हो रहे हैं। पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों में हजारों वसीयत पंजीकरण और सैकड़ों तलाक/अन्य प्रक्रियाओं के रिकॉर्ड दिखाई देते हैं।

एक साल के आंकड़ों को लेकर सरकार की ओर से बताया गया कि UCC लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण में बड़ी तेजी आई और लाखों विवाह पंजीकृत हुए। हालांकि लिव-इन पंजीकरण की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, जिससे यह भी स्पष्ट होता है कि कानून का वास्तविक सामाजिक प्रभाव अभी लंबे समय में ज्यादा स्पष्ट होगा।

  1. सख्त भूमि कानून: पहाड़ की जमीन बचाने की कोशिश

उत्तराखंड में लंबे समय से बाहरी लोगों द्वारा जमीन खरीद और पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन के बदलते इस्तेमाल को लेकर बहस होती रही है। 2025 में लागू किए गए नए भूमि कानून के तहत 11 पर्वतीय जिलों में बाहरी राज्यों के लोगों के लिए कृषि और बागवानी भूमि खरीद पर रोक को और सख्त किया गया। हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर इस व्यवस्था से अलग हैं।

जमीन पर क्या असर?

सरकार का उद्देश्य कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में जाने से रोकना और स्थानीय जमीन एवं संसाधनों की सुरक्षा करना है। जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े विवरणों को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तराखंड में पलायन, जमीन की खरीद और पहाड़ी क्षेत्रों की जनसांख्यिकी एक-दूसरे से जुड़े बड़े मुद्दे हैं।

 

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  1. नकल विरोधी कानून: भर्ती माफिया पर सीधा प्रहार

उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक और नकल के मामलों ने युवाओं के बीच बड़ा असंतोष पैदा किया था। इसके जवाब में सरकार ने भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम एवं निवारण अधिनियम-2023 लागू किया।

इस कानून में गंभीर परीक्षा अनियमितताओं पर कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान है। सरकार के अनुसार, कानून के बाद बड़ी संख्या में कथित नकल माफिया जेल भेजे गए और 25 हजार से ज्यादा युवाओं को मेरिट आधारित सरकारी नौकरियां मिलीं।

जमीन पर क्या दिखा?

राज्य में अब तक 100 से अधिक नकल माफियाओं और आरोपियों को सीधे जेल भेजा जा चुका है। इस सख्त कानून और पारदर्शी व्यवस्था की बदौलत करीब 33,000 से अधिक युवाओं को निष्पक्ष और योग्यता के आधार पर सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां मिली हैं। उत्तराखंड में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने के बावजूद, जमीनी स्तर पर कुछ बड़ी चुनौतियां, कमियां और विफलताएं भी सामने आई हैं, जिन्हें लेकर युवाओं और विपक्षी दलों में नाराजगी रही है।

  1. जबरन धर्मांतरण पर सख्ती

उत्तराखंड ने Freedom of Religion Act में संशोधन के जरिए जबरन या प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण के खिलाफ कठोर प्रावधान किए।

2022 के संशोधित कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। सरकार इसे जबरन धर्मांतरण रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानती है।

2025 में सरकार ने इसे और कठोर बनाने के लिए संशोधन विधेयक भी आगे बढ़ाया था, हालांकि उस प्रस्ताव को राज्यपाल ने तकनीकी कारणों से पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया था। इसलिए प्रस्तावित नए दंड को लागू कानून के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

जमीन पर असर

जमीन पर इस कानून का असर यह जरूर दिखता है कि अपराध और प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण कराने वालों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा है और पुलिस भी पहले की तुलना में तेजी से कार्रवाई कर रही है। हालांकि, अदालत में किसी मामले को मजबूती से साबित करने के लिए पुलिस की जांच प्रक्रिया, साक्ष्य जुटाने और केस को कानूनी रूप से मजबूत बनाने की क्षमता को और बेहतर करने की जरूरत है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि निर्दोष व्यक्ति न फंसे और वास्तविक दोषी कानून की पकड़ से बाहर न निकल पाए।

  1. दंगाइयों से नुकसान की भरपाई: सरकारी संपत्ति को नुकसान पर नई नीति

2024 में धामी सरकार ने Uttarakhand Public and Private Property Damage Recovery Act लागू किया।

इसका मूल उद्देश्य विरोध प्रदर्शन, दंगों या हिंसक घटनाओं के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से उसकी भरपाई कराना है। दोष सिद्ध होने पर नुकसान की आर्थिक जिम्मेदारी तय करने का प्रावधान किया गया है।

जमीन पर क्या बदला?

इसका सबसे बड़ा प्रभाव कानूनी संदेश के रूप में देखा जा सकता है-प्रदर्शन का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कीमत भी चुकानी पड़ सकती है। हालांकि इस कानून की प्रभावशीलता का आकलन बड़े पैमाने पर वसूली और न्यायिक मामलों के परिणाम आने के बाद ही बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

  1. महिलाओं को 30% क्षैतिज आरक्षण

उत्तराखंड सरकार ने राज्य की महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) की व्यवस्था लागू की। इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं में स्थानीय महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। इससे पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को सरकारी रोजगार में अधिक अवसर देने की कोशिश की गई है।

जमीन पर क्या असर?

यह फैसला सीधे तौर पर रोजगार के अवसरों से जुड़ा है। सरकारी सेवाओं में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ने के साथ इसका प्रभाव परिवार की आर्थिक स्थिति और स्थानीय स्तर पर महिलाओं की निर्णय क्षमता पर भी पड़ सकता है।

यानी यह फैसला सिर्फ आरक्षण की नीति नहीं बल्कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ा कदम है।

  1. ऑपरेशन कालनेमि: साधु के वेश में ठगी करने वालों पर कार्रवाई

धामी सरकार का एक ऐसा फैसला जिसने सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय मीडिया तक खूब चर्चा बटोरी, वह था ऑपरेशन कालनेमि।

2025 में मुख्यमंत्री के निर्देश पर साधु का वेश धारण कर लोगों को गुमराह करने, धार्मिक आस्था के नाम पर ठगी या आपराधिक गतिविधियों में शामिल कथित ढोंगियों के खिलाफ अभियान शुरू किया गया। इसका नाम रामायण के उस मायावी पात्र ‘कालनेमि’ से लिया गया, जिसने साधु का रूप धारण कर हनुमान को भ्रमित करने की कोशिश की थी।

जमीन पर क्या हुआ?

अभियान के शुरुआती चरण में बड़ी संख्या में संदिग्ध फर्जी साधुओं के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आई

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