उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव (UP Election 2027) को लेकर सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। समाजवादी पार्टी अपने PDA अभियान को लेकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने अखिलेश यादव Akhilesh Yadav की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मायावती (Mayawati) ने समाजवादी पार्टी के प्रस्तावित ‘PDA रथ’ के रंग को लेकर तंज कसते हुए कहा कि सपा ने अपना लाल रंग छोड़कर भगवा रंग अपना लिया है।
मायावती ने सवाल किया कि आखिर समाजवादी पार्टी के राजनीतिक प्रचार में यह बदलाव क्यों दिखाई दे रहा है? उन्होंने इसी बहाने अखिलेश यादव से मुस्लिम मतदाताओं को लेकर भी सवाल किया। मायावती ने तंज करते हुए पूछा कि क्या अब समाजवादी पार्टी का मुस्लिम समाज से भरोसा उठ गया है?
‘लाल छोड़कर भगवा ओढ़ लिया’
मायावती ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में अखिलेश यादव के PDA रथ को लेकर सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का यह रथ सपा के पारंपरिक लाल रंग की बजाय भगवा रंग में अधिक दिखाई दे रहा है।
बसपा प्रमुख ने इसे महज रंग का बदलाव नहीं, बल्कि सपा की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आते ही समाजवादी पार्टी अपना राजनीतिक रंग बदल रही है।
मायावती ने अखिलेश यादव पर ‘गिरगिट की तरह रंग बदलने’ का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता को यह समझना होगा कि आखिर इस बदलाव के पीछे राजनीतिक उद्देश्य क्या है।
मुस्लिम वोट को लेकर अखिलेश पर निशाना
मायावती ने अपने बयान में मुस्लिम मतदाताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले चुनावों में मुस्लिम समाज के बड़े हिस्से ने समाजवादी पार्टी का समर्थन किया, लेकिन इसके बावजूद राजनीतिक तस्वीर में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।
बसपा प्रमुख ने सवाल उठाया कि यदि किसी पार्टी को समर्थन देने के बावजूद राजनीतिक परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आते हैं, तो मतदाता आखिर उसी विकल्प पर बार-बार क्यों भरोसा करे?
हालांकि, मुस्लिम मतदाताओं के सपा से दूर होने या बसपा के पक्ष में जाने का दावा मायावती का राजनीतिक आकलन है। इसे किसी स्वतंत्र सर्वेक्षण के निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
ब्राह्मण और मुस्लिम समाज को लेकर भी दावा
मायावती ने अपने बयान में ब्राह्मण और मुस्लिम समाज का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण समाज के एक हिस्से में बसपा के प्रति समर्थन बढ़ रहा है और मुस्लिम समाज में भी पार्टी के प्रति सकारात्मक रुख बन रहा है।
बसपा प्रमुख ने अपनी पार्टी की पुरानी ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति को भी सामने रखा। उन्होंने अपने शासनकाल में कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों को पार्टी के राजनीतिक संदेश से जोड़ते हुए जनता के सामने रखने की बात कही।
PDA को लेकर भी मायावती ने घेरा
मायावती ने अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि समाजवादी पार्टी के लिए PDA की वास्तविक परिभाषा आखिर क्या है?
बसपा प्रमुख का आरोप है कि समाजवादी पार्टी अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों में PDA की अलग-अलग व्याख्या करती रही है। उन्होंने सपा नेताओं की ओर से डॉ. भीमराव आंबेडकर और अंबेडकरवादी प्रतीकों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया।
मायावती के मुताबिक, समाजवादी पार्टी की यह रणनीति जनता के बीच उस तरह स्वीकार नहीं हुई, जैसा पार्टी चाहती थी।
24 सितंबर से PDA रथ अभियान की तैयारी
इधर, समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए PDA अभियान को जमीन पर उतारने की तैयारी में है। रिपोर्टों के अनुसार, 24 सितंबर से रायबरेली में PDA रथ अभियान से जुड़ी गतिविधियां शुरू होने की बात सामने आई है।
सपा इस अभियान के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को अपने राजनीतिक संदेश से जोड़ने की कोशिश कर रही है। PDA रथ को इसी अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, रथ पर डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित सामाजिक न्याय से जुड़े प्रमुख चेहरों की तस्वीरों और नारों को जगह दी गई है।
2027 से पहले सपा और बसपा आमने-सामने
उत्तर प्रदेश में दलित, पिछड़े और मुस्लिम मतदाताओं के बीच राजनीतिक आधार को लेकर समाजवादी पार्टी और बसपा की दावेदारी लंबे समय से चर्चा में रही है। 2027 के चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच बयानबाजी बढ़ना इसी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है।
एक तरफ अखिलेश यादव PDA के जरिए सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश में हैं, वहीं मायावती लगातार सपा की रणनीति और उसके सामाजिक गठजोड़ पर सवाल उठा रही हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि मायावती के ‘लाल छोड़कर भगवा ओढ़ लिया’ वाले हमले पर अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से क्या जवाब आता है। 2027 के चुनाव से पहले PDA की राजनीति को लेकर सपा और बसपा के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।