तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और TMC नेता ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले को सुप्रीम कोर्ट ( Mamata Banerjee Supreme Court ) में चुनौती दी है। चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ (AITC) और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ (Flowers & Grass/Jora Phool) चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर फिलहाल रोक लगा दी है।
ममता बनर्जी की ओर से यह याचिका 18 सितंबर 2026 को दायर की गई। इसमें चुनाव आयोग के साथ प्रतिद्वंद्वी गुट को भी पक्षकार बनाया गया है। फिलहाल याचिका की सुनवाई और पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़नी है।
उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला
TMC के भीतर दो गुटों के बीच पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठन पर अधिकार को लेकर विवाद के बाद चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम व्यवस्था लागू की। आयोग ने कहा कि जब तक दोनों पक्षों के दावों पर विस्तृत सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक दोनों गुट मूल पार्टी नाम और आरक्षित चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर 2026 को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। चुनाव आयोग की व्यवस्था का उद्देश्य उपचुनाव के दौरान दोनों गुटों की पहचान को अलग रखना और नामांकन प्रक्रिया में भ्रम की स्थिति से बचना है।
ममता गुट को मिला नया नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह
चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को दोनों गुटों को अस्थायी तौर पर अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित किए।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है और उसके लिए ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।
वहीं प्रतिद्वंद्वी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा (Envelope)’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल के अलावा मेघालय और त्रिपुरा में राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दिए जाने की बात चुनाव आयोग के आदेश में कही गई है।
हालांकि यह व्यवस्था अंतरिम और उपचुनाव-केंद्रित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि चुनाव आयोग ने मूल TMC नाम या ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह पर अंतिम फैसला सुना दिया है। मूल नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार का विवाद अभी जारी है।
ममता बनर्जी ने फैसले को बताया ‘ब्लैक डे’
चुनाव आयोग के फैसले के बाद ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिन्ह को रोकने के फैसले को ‘ब्लैक डे’ बताया।
ममता बनर्जी ने पार्टी की पहचान को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह खोना उनके लिए मां के अपने बच्चे को खोने जैसा है। उन्होंने संकेत दिया कि वह मूल TMC नाम और पारंपरिक चुनाव चिन्ह को वापस हासिल करने के लिए कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगी।
अब उनकी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका इसी विवाद का अगला महत्वपूर्ण कानूनी चरण है।
आखिर TMC में विवाद क्यों बढ़ा?
TMC में संगठनात्मक विवाद के बाद पार्टी के दो गुट आमने-सामने आ गए और दोनों पक्षों ने पार्टी के संगठन, नाम तथा चुनाव चिन्ह पर अधिकार का दावा किया। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फिलहाल मूल नाम और चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए अंतरिम व्यवस्था बनाई है।
इस विवाद का असर सीधे आगामी उपचुनावों पर भी पड़ा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, अगर दोनों गुटों को एक ही नाम और चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाती, तो उम्मीदवारों के नामांकन और मतदाताओं के बीच पहचान को लेकर स्थिति जटिल हो सकती थी। इसी वजह से दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह तय किए गए हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
ममता बनर्जी की याचिका के बाद अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर हैं। अदालत के सामने मुख्य सवाल चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था और मूल TMC नाम एवं चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर लगाई गई रोक से जुड़ा होगा।
फिलहाल चुनाव आयोग का अंतरिम फैसला लागू है और 6 अक्टूबर के उपचुनावों के लिए दोनों गुट अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे, जब तक कि अदालत या चुनाव आयोग की ओर से कोई नया आदेश नहीं आता।
TMC विवाद में फिलहाल स्थिति
मूल पार्टी नाम: All India Trinamool Congress – फिलहाल इस्तेमाल पर रोक
मूल चुनाव चिन्ह: Flowers & Grass/Jora Phool – फिलहाल इस्तेमाल पर रोक
ममता गुट: Mamata All India Trinamool Congress
ममता गुट का चिन्ह: Football Player
दूसरा गुट: Democratic Trinamool Congress
दूसरे गुट का चिन्ह: Envelope
पश्चिम बंगाल उपचुनाव: 6 अक्टूबर 2026
मूल नाम और चिन्ह पर अंतिम फैसला: अभी लंबित
इस तरह TMC के नाम और चुनाव चिन्ह का विवाद अब चुनाव आयोग से निकलकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। आने वाले दिनों में अदालत की कार्यवाही यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि चुनाव आयोग की अंतरिम व्यवस्था में कोई बदलाव होता है या नहीं।
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