जेल भेज दो या मार दो, दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी-2 साल बाद पहली बार बोलीं शेख हसीना

नई दिल्ली/ढाका

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना Sheikh Hasina ने सत्ता से हटाए जाने के दो साल बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से दुनिया के सामने अपनी बात रखी। नई दिल्ली में फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ़ साउथ एशिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने ऑडियो माध्यम से वर्चुअल संबोधन किया। पूरे संबोधन के दौरान शेख हसीना कई बार भावुक हुईं और कहा कि चाहे उन्हें जेल भेज दिया जाए या उनकी हत्या कर दी जाए, वह दिसंबर में बांग्लादेश वापस लौटना चाहती हैं।

यह संबोधन अगस्त 2024 में सत्ता परिवर्तन के बाद उनका पहला सार्वजनिक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह भले ही अपने देश से दूर रहने को मजबूर हुई हों, लेकिन बांग्लादेश की जनता से कभी अलग नहीं हुईं।

“आज का बांग्लादेश वह नहीं जिसे हमने बनाया था”

अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए शेख हसीना ने कहा कि पिछले दो वर्षों से वह अपने देश को कठिन दौर से गुजरते देख रही हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान बांग्लादेश उस राष्ट्र की तस्वीर नहीं है, जिसके लिए 1971 के मुक्ति संग्राम में लाखों लोगों ने बलिदान दिया था। उनके अनुसार, जुलाई-अगस्त 2024 की घटनाओं को केवल छात्र आंदोलन बताना वास्तविकता को छिपाना है।

हसीना ने आरोप लगाया कि शुरुआत में उनकी सरकार ने बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया, लेकिन कुछ संगठित समूहों ने छात्रों की मांगों को हिंसक राजनीतिक अभियान में बदल दिया।

संबोधन के दौरान भावुक हुईं

भाषण के दौरान शेख हसीना की आवाज कई बार भर आई। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन बांग्लादेश के लोगों के साथ बिताया है और देश छोड़ना उनकी मजबूरी थी, लेकिन उनका दिल आज भी अपने देशवासियों के साथ है।

उन्होंने दोहराया कि उनका लक्ष्य बांग्लादेश लौटना है और वह किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं।

बेटे साजीब वाजेद ने उठाए UN रिपोर्ट पर सवाल

कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से मौजूद शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि जुलाई 2024 की हिंसा में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। उनके अनुसार, UN ने लगभग 1,400 मौतों का उल्लेख किया, जबकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या लगभग 800 बताई गई है।

साजीब वाजेद ने कहा कि उनकी पार्टी और वकीलों ने कई बार संयुक्त राष्ट्र से अतिरिक्त नामों और आंकड़ों का आधार साझा करने का अनुरोध किया, लेकिन अब तक कोई विस्तृत सूची उपलब्ध नहीं कराई गई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नई सरकार द्वारा लाया गया एक कानून प्रदर्शनकारियों को व्यापक कानूनी सुरक्षा देता है, जिसे उन्होंने मानवाधिकारों के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।

अवामी लीग का दावा- “देश अराजकता की ओर”

अवामी लीग के नेता मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में बांग्लादेश सामाजिक और राजनीतिक रूप से पहले से अधिक विभाजित हुआ है।

उन्होंने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। उनका कहना था कि राजनीतिक मतभेदों का समाधान लोकतांत्रिक संवाद से होना चाहिए, हिंसा से नहीं।

दिसंबर में वापसी का ऐलान

अपने पूरे संबोधन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश देते हुए शेख हसीना ने कहा कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का इरादा रखती हैं।

उन्होंने कहा कि यदि उन्हें जेल भेजा जाता है या जान का खतरा भी होता है, तब भी वह अपने देश लौटने के फैसले से पीछे नहीं हटेंगी।

राजनीतिक मायने

शेख हसीना का यह संबोधन ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश की राजनीति में लगातार अस्थिरता और ध्रुवीकरण की चर्चा जारी है। दो वर्षों की चुप्पी के बाद उनका सार्वजनिक संदेश अवामी लीग के समर्थकों के लिए बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।

हालांकि, उनके भाषण में लगाए गए आरोप, मौतों के आंकड़ों और वर्तमान सरकार से जुड़े दावों पर अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दृष्टिकोण हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से की जानी बाकी है। आने वाले महीनों में यदि शेख हसीना वास्तव में दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का प्रयास करती हैं, तो यह दक्षिण एशिया की राजनीति की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक हो सकती है।

Mark Zuckerberg ने मानी Meta की बड़ी चूक, डीपफेक और चाइल्ड एब्यूज कंटेंट पर सरकार से मांगी माफी

Pappu yadav ने पत्रकार दीपक चौरसिया को भेजा 10 करोड़ का मानहानि नोटिस, लाइव बहस के बाद बढ़ा विवाद

पाकिस्तान से चल रहे अकाउंट्स ने फैलाए CJP प्रदर्शन से जुड़े फेक वीडियो? दिल्ली पुलिस का बड़ा दावा, 400 से ज्यादा हैंडल ब्लॉक

Journalist India Breaking News

 

Sheikh Hasina
Comments (0)
Add Comment