दोपहर तक नया टाइटल बताने का आदेश
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने मेकर्स और नेटफ्लिक्स से कहा कि वे दोपहर 12:30 बजे तक नया प्रस्तावित शीर्षक अदालत को बताएं। कोर्ट ने यह भी कहा कि विवादित नाम अक्सर प्रचार पाने के लिए चुने जाते हैं, जिससे अनावश्यक बहस और विवाद पैदा होता है।
पीठ ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान द्वारा संरक्षित है, लेकिन यह असीमित अधिकार नहीं है। इसे सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक व्यवस्था के विरुद्ध इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
“किसी समुदाय की बेइज्जती स्वीकार नहीं”
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि किसी भी वर्ग या समुदाय को अपमानित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने संविधान में निहित ‘भाईचारे’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि विविधताओं वाले देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रयोग जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। जब तक शीर्षक नहीं बदला जाता, फिल्म को इसी नाम से रिलीज की अनुमति नहीं दी जाएगी।
याचिका में क्या आपत्ति?
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ‘घूसखोर पंडित’ नाम हिंदू पुजारियों, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है और धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म का शीर्षक जाति और धर्म के आधार पर स्टीरियोटाइप को बढ़ावा देता है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।
हाई कोर्ट में भी उठ चुका है मामला
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में भी इस मुद्दे पर सुनवाई हो चुकी है। नेटफ्लिक्स ने वहां कहा था कि निर्माता नाम बदलने को तैयार हैं और संबंधित प्रचार सामग्री सोशल मीडिया से हटाई जा चुकी है। हाई कोर्ट ने इस बयान को दर्ज करते हुए अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं समझी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने नए शीर्षक को रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से दर्ज कराने का निर्देश दिया।
मेकर्स का पक्ष
निर्माताओं की ओर से दलील दी गई कि फिल्म का नाम अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है और मामला उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है। उन्होंने फिल्म को एक पुलिस ड्रामा बताया, जिसमें एक पुजारी का किरदार है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी संवैधानिक सीमाओं के भीतर ही मान्य है।
अगली सुनवाई 19 फरवरी को
अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर नया शीर्षक और किए जाने वाले बदलावों की जानकारी हलफनामे के जरिए देने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 19 फरवरी को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि समयसीमा का कड़ाई से पालन किया जाएगा और अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।