CBSE New Language Policy 2026 : CBSE का बड़ा फैसला: 9वीं से तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य, दो भारतीय भाषाएं जरूरी

CBSE New Language Policy 2026 : Central Board of Secondary Education यानी CBSE ने नई शिक्षा नीति और NCERT के संशोधित पाठ्यक्रम के तहत बड़ा बदलाव करते हुए कक्षा 9वीं से तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य कर दी है। बोर्ड ने 16 मई 2026 को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की। नया नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होगा।

CBSE के मुताबिक अब 9वीं और 10वीं के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होना जरूरी हैं। हालांकि छात्रों को राहत देते हुए बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का बोर्ड एग्जाम नहीं लिया जाएगा। तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर ही किया जाएगा।

स्कूलों को जारी किए गए दिशा-निर्देश

CBSE ने अपने सर्कुलर में सभी संबद्ध स्कूलों को नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड ने कहा है कि भाषा शिक्षा अब National Council of Educational Research and Training यानी NCERT के नए पाठ्यक्रम के अनुसार कराई जाएगी।

सर्कुलर में कहा गया है कि छात्रों को R1, R2 और R3 के रूप में तीन भाषाएं चुननी होंगी। स्कूलों को भाषाओं के अलग-अलग कॉम्बिनेशन उपलब्ध कराने की छूट दी गई है, ताकि छात्र अपनी सुविधा और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार चयन कर सकें।

CBSE New Language Policy 2026

तीसरी भाषा के लिए अस्थायी व्यवस्था

CBSE ने माना है कि कई स्कूलों में फिलहाल सभी भारतीय भाषाओं के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों और नई किताबों की कमी हो सकती है। ऐसे में बोर्ड ने अस्थायी व्यवस्था भी दी है।

सर्कुलर के अनुसार, जब तक नई R3 टेक्स्टबुक उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक 2026-27 सत्र में छात्र चुनी गई तीसरी भाषा की कक्षा 6 की किताबों का उपयोग कर सकेंगे। इसके साथ स्कूलों को स्थानीय साहित्य, कविताएं, छोटी कहानियां और अन्य साहित्यिक सामग्री भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

छात्रों पर दबाव कम करने की कोशिश

CBSE ने साफ किया है कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं है। बोर्ड के अनुसार मिडिल और सेकेंडरी स्तर की भाषा शिक्षा में लगभग 75 से 80 प्रतिशत समानता होती है, इसलिए छात्रों को नई भाषा सीखने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

इसी कारण 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि इसका आंतरिक मूल्यांकन छात्रों के स्कोरकार्ड में दिखाई देगा, इसलिए इसे पूरी तरह नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकेगा।

नई शिक्षा नीति की दिशा में बड़ा कदम

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि CBSE का यह फैसला भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और छात्रों की बहुभाषी क्षमता विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। नई व्यवस्था से छात्रों को क्षेत्रीय भाषाओं और भारतीय संस्कृति को समझने में भी मदद मिलेगी।

हालांकि कई निजी स्कूलों और अभिभावकों के बीच इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या सभी स्कूल समय पर प्रशिक्षित भाषा शिक्षक उपलब्ध करा पाएंगे या नहीं। आने वाले समय में यह नई नीति स्कूलों के लिए बड़ी चुनौती भी बन सकती है।

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