Nagpur Municipal Election : दंगों के आरोपी की पत्नी की जीत ने खड़े किए सवाल

Nagpur Municipal Election : नागपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों में एक परिणाम ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में खासा ध्यान खींचा है। आरएसएस के गढ़ माने जाने वाले नागपुर में दंगों के आरोपी फहीम खान की पत्नी और AIMIM प्रत्याशी अलीशा फहीम खान ने वार्ड नंबर 3 (डी) से जीत दर्ज की है।

यह जीत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि फहीम खान हाल ही में नागपुर में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में आरोपी हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। ऐसे में उनकी पत्नी की चुनावी सफलता को लेकर कई तरह के सवाल और बहसें शुरू हो गई हैं।

राजनीतिक संदेश या सामाजिक विरोध?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नतीजा केवल एक वार्ड की जीत नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर मतदाताओं के असंतोष, पहचान की राजनीति और ध्रुवीकरण को भी दर्शाता है। AIMIM ने इस चुनाव में खुद को अल्पसंख्यक आवाज के रूप में पेश किया, जिसका असर इस वार्ड में साफ तौर पर देखने को मिला।

अलीशा फहीम खान
अलीशा फहीम खान

विपक्ष का हमला

अलीशा फहीम खान की जीत के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि जिन परिवारों के नाम दंगों जैसे गंभीर मामलों से जुड़े हों, उनका चुनाव जीतना लोकतंत्र और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए चिंताजनक संकेत है।

AIMIM का बचाव

वहीं AIMIM समर्थकों का तर्क है कि कानून में जब तक दोष सिद्ध न हो, तब तक कोई अपराधी नहीं होता, और चुनावी जीत जनता का फैसला है, न कि किसी केस का प्रमाण।

बढ़ी सियासी हलचल

इस नतीजे के बाद नागपुर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह जीत स्थानीय मुद्दों का परिणाम है या फिर विवाद और पहचान आधारित राजनीति का असर।

नागपुर नगर निगम चुनाव का यह परिणाम आने वाले समय में राज्य की शहरी राजनीति की दिशा को लेकर भी अहम संकेत माना जा रहा है।

 

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