Budget 2026: टेक सेक्टर को बड़ा बूस्ट… क्लाउड कंपनियों को 21 साल की टैक्स छूट, भारत बनेगा AI–डेटा सुपरपावर
Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट 2026 पेश करते हुए यह साफ कर दिया कि आने वाले सालों में भारत की आर्थिक तरक्की की सबसे मजबूत नींव टेक्नोलॉजी और डिजिटल इकोनॉमी होगी। इस बजट में क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है।
Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट 2026 पेश करते हुए यह साफ कर दिया कि आने वाले सालों में भारत की आर्थिक तरक्की की सबसे मजबूत नींव टेक्नोलॉजी और डिजिटल इकोनॉमी होगी। इस बजट में क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने विदेशी क्लाउड कंपनियों को साल 2047 तक टैक्स छूट देने का ऐलान किया है, जिसे भारत को ग्लोबल डेटा और AI हब बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
विदेशी क्लाउड कंपनियों को बड़ी टैक्स राहत
Budget 2026 में कहा गया है कि जो विदेशी क्लाउड कंपनियां भारत में स्थित डेटा सेंटर्स का उपयोग करेंगी, उन्हें 2047 तक टैक्स में छूट दी जाएगी। ये कंपनियां भारत को अपना बेस बनाकर दुनियाभर के ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं दे सकेंगी। सरकार का उद्देश्य है कि वैश्विक टेक कंपनियां भारत में अपने ऑपरेशंस को विस्तार दें।
भारतीय रीसेलर के जरिए सेवाओं पर भी लाभ
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई विदेशी कंपनी भारतीय ग्राहकों को सीधे सेवाएं देने के बजाय भारतीय रीसेलर के माध्यम से क्लाउड सर्विस देती है, तब भी उसे टैक्स छूट का लाभ मिलेगा। इससे देश की लोकल टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए नए व्यापारिक अवसर पैदा हो सकते हैं।
डेटा और AI हब बनने की दिशा में कदम
सरकार का मानना है कि इस फैसले से भारत में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा। नए डेटा सेंटर्स स्थापित होंगे और AI से जुड़ी सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। AI के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा की मांग भी तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में डेटा सेंटर्स देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं।
आम यूजर्स पर तुरंत नहीं दिखेगा असर
यह फैसला आम लोगों की डिजिटल सेवाओं पर तुरंत असर नहीं डालेगा। यह एक पॉलिसी लेवल का निर्णय है, जिसके नतीजे आने वाले सालों में धीरे-धीरे सामने आएंगे। फिलहाल इसका सबसे ज्यादा फायदा कंपनियों और निवेशकों को मिलने की उम्मीद है।
ऐप्स और वेबसाइट की स्पीड हो सकती है बेहतर
अगर ज्यादा कंपनियां भारत में मौजूद डेटा सेंटर्स का इस्तेमाल करती हैं, तो ऐप्स और वेबसाइट्स की स्पीड में सुधार देखने को मिल सकता है। खासतौर पर वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग और क्लाउड-बेस्ड ऐप्स में इसका असर महसूस हो सकता है, हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर प्लेटफॉर्म पर तुरंत बदलाव दिखे।
डिजिटल सेवाओं की कीमतों पर असर में लगेगा समय
कंपनियों का ऑपरेशनल खर्च घट सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यूजर्स को तुरंत सस्ती डिजिटल सेवाएं मिलने लगेंगी। कीमतों में बदलाव धीरे-धीरे होगा। कुछ सेवाएं सस्ती हो सकती हैं, जबकि कई में फिलहाल कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा।
भारत में ही स्टोर होगा यूजर डेटा
अगर यूजर डेटा भारत के भीतर ही स्टोर किया जाता है, तो नियमों और कानूनों को लागू करना आसान हो जाएगा। इससे डेटा पर सरकारी निगरानी बढ़ेगी, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि डेटा पूरी तरह सुरक्षित हो ही जाएगा। डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कंपनियों पर ही बनी रहेगी।
AI फीचर्स को मिलेगा नया बूस्ट
भारत में कंप्यूटिंग पावर और डेटा की उपलब्धता बढ़ने से नए AI टूल्स और फीचर्स विकसित करना आसान होगा। शुरुआत में इसका फायदा कंपनियों को मिलेगा, लेकिन समय के साथ ये सुविधाएं यूजर्स तक भी पहुंचेंगी। यह एक लंबी प्रक्रिया है, लेकिन इसका असर बड़ा हो सकते हैं।
नौकरियों और सर्विस सपोर्ट में होगा सुधार
डेटा सेंटर्स और AI इकोसिस्टम के विस्तार से टेक सेक्टर में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। इसके साथ ही कस्टमर सपोर्ट और डिजिटल सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर में भी सुधार देखने को मिल सकता है, हालांकि इसका असर धीरे-धीरे और अप्रत्यक्ष रूप से सामने आएगा।
AI को लेकर सरकार का लंबी समय का विज़न
Budget 2026 में सरकार ने साफ कर दिया है कि AI केवल बड़ी टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सरकारी सेवाओं में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि टेक्नोलॉजी का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और डिजिटल इंडिया को नई गति मिले।