Mahashivratri 2026: काशी में कैसे मनाई जाती है महाशिवरात्रि? जानिए सदियों पुरानी परंपरा की कैसे हुई शुरुआत?

Mahashivratri 2026: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि को बेहद महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु पूरी तरह शिव भक्ति में डूबे रहते हैं। वहीं भगवान भोलेनाथ की नगरी काशी में महाशिवरात्रि की रौनक कुछ अलग ही देखने को मिलती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि काशी में महाशिवरात्रि किस तरह मनाई जाती है?

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में विशेष आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन शिव भक्त भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण का भी खास महत्व होता है, क्योंकि मान्यता है कि इस रात भगवान शिव की आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इसी कारण इस पर्व को महाशिवरात्रि कहा जाता है। वहीं भगवान शिव की नगरी काशी में इस दिन का उत्सव और भी भव्य रूप में देखने को मिलता है।

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पवित्र शहर भगवान शिव के त्रिशूल पर स्थित है और यहां स्वयं भोलेनाथ का वास माना जाता है। यही वजह है कि काशी में महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026) का पर्व बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर शहर शिवमय हो जाता है और हर ओर “हर-हर महादेव” के जयकारे गूंजते हैं।

बाबा की नगरी में क्यों खास है यह पर्व?

काशी में भगवान शिव के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनमें काशी विश्वनाथ मंदिर का विशेष स्थान है। यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। महाशिवरात्रि के दिन वाराणसी के मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है। भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए दूध, दही, घी, शहद और जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। इसके बाद मंगल आरती की जाती है और फिर मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए जाते हैं। महाशिवरात्रि के दिन मंदिरों के कपाट शयन आरती तक खुले रहते हैं। इसके अलावा रात के चारों पहर शिवलिंग की विशेष पूजा की जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

शिव-बारात की अनोखी परंपरा

महाशिवरात्रि से जुड़ी एक प्रचलित मान्यता के अनुसार फाल्गुन मास की इसी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसी वजह से इस दिन काशी सहित उज्जैन, वैद्यनाथ धाम और अन्य ज्योतिर्लिंग मंदिरों में शिव-बारात निकाली जाती है। काशी की शिव-बारात खास तौर पर प्रसिद्ध है, जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संत, भक्त और स्थानीय लोग शामिल होते हैं।

शिव-बारात से पहले मंदिरों में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। तिलक, हल्दी, मेहंदी जैसी रस्में विधिवत रूप से निभाई जाती हैं। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन और जयकारों के साथ निकाली जाने वाली शिव-बारात काशी की महाशिवरात्रि को और भी खास बना देती है। इस तरह काशी में महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और भक्ति का महाउत्सव बन जाती है।

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