waqf amendment bill 2025 : दिन रात एक कर मोदी सरकार ने राज्य सभा से भी ऐसे पास कराया वक्फ (संशोधन) विधेयक

अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा और देशभर में लागू होगा।

waqf amendment bill 2025 : मोदी सरकार ने दिन रात एक कर  वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को राज्यसभा से भी पास करा लिया है। इससे पहले लोकसभा में अपने सहयोगियों को साथ लेकर मोदी सरकार ने देर रात बिल पास कराया, जिसके बाद  3 अप्रैल 2025 की देर रात 2 बजे वोटिंग कराकर इस बिल को राज्य सभा से भी पास करा लिया गया है. अब ये बिल कानून के लिए राष्ट्रपति को बेजा जाएगा. संसद में इस विधेयक को सरकार ने पारदर्शिता और कुशल प्रबंधन के नाम पर प्रस्तुत किया, लेकिन इसे लेकर लगातार राजनीतिक और सामाजिक विवाद गहराते जा रहे हैं।

क्या हैं विधेयक के प्रमुख प्रावधान

इस विधेयक में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए कई संशोधन किए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से:

  1. वक्फ बोर्डों का पुनर्गठन: वक्फ बोर्डों में प्रशासनिक सुधार लाने और गैर-मुस्लिम प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव।
  1. संपत्तियों की सुरक्षा: वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जों को रोकने और उनके संरक्षण के लिए कड़े प्रावधान।
  1. सरकारी नियंत्रण: वक्फ संपत्तियों के स्वामित्व और उपयोग पर सरकारी निगरानी को बढ़ाने का प्रयास।
  1. कानूनी प्रक्रियाओं में बदलाव: संपत्ति विवादों के निपटारे के लिए नए नियम और प्रक्रियाएँ।

बिल पर राज्यसभा में चर्चा और मतदान

राज्यसभा में इस विधेयक पर तीखी बहस हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। सरकार ने इसे वक्फ संपत्तियों के प्रशासन को पारदर्शी बनाने वाला कदम बताया, जबकि विपक्षी दलों ने इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों में दखल करार दिया।

वोटिंग के दौरान 128 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 95 ने विरोध में मतदान किया। इस तरह, विधेयक राज्यसभा में भी बहुमत से पारित हो गया।

क्या है इस बिल पर विपक्ष और मुस्लिम संगठनों का रुख

विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस, AIMIM और तृणमूल कांग्रेस ने इस विधेयक पर कड़ा विरोध जताया। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसे मुस्लिम विरोधी बताते हुए कहा कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करता है। वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस कानून के जरिए वक्फ संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेना चाहती है।

मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों पर सरकारी दखल को बढ़ाएगा, जिससे धार्मिक स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा। कई संगठनों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की भी बात कही है।

संसोधित बिल को लेकर सरकार का पक्ष

विधेयक पारित होने के बाद, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह कानून मुस्लिम समाज के गरीब तबके के हक में है और इससे वक्फ संपत्तियों की लूट पर रोक लगेगी। सरकार का दावा है कि इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग हो सकेगा।

अब बिल पर क्या होगी आगे की प्रक्रिया

अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा और देशभर में लागू होगा।

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को लेकर देश में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सरकार इसे पारदर्शिता और सुधार का कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ बता रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह कानून लागू होने के बाद वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और मुस्लिम समुदाय पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

 

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