UAE President India Visit : संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख़ मोहम्मद बिन ज़ाएद अल नाह्यान ने सोमवार को भारत का साढ़े तीन घंटे का संक्षिप्त लेकिन बेहद अहम दौरा किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ख़ुद हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया, जिसे दोनों देशों के बीच गहरे और भरोसेमंद संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा प्रधानमंत्री मोदी के आमंत्रण पर हुई। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि सीमित समय के बावजूद दोनों नेताओं के बीच व्यापार, टैरिफ़, ग़ज़ा संकट, ईरान की मौजूदा स्थिति समेत कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
रक्षा और रणनीतिक साझेदारी
भारत और यूएई ने स्ट्रैटेजिक डिफ़ेंस पार्टनरशिप के लिए एक फ़्रेमवर्क तैयार करने की दिशा में लेटर ऑफ़ इंटेंट (LoI) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग
अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया गया। इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइज़ेशन सेंटर (IN-SPACe) और यूएई स्पेस एजेंसी के बीच स्पेस इन्फ़्रास्ट्रक्चर के विकास और व्यावसायिकरण को लेकर LoI साइन हुआ। इसके तहत नए लॉन्च कॉम्प्लेक्स, सैटेलाइट निर्माण इकाइयां, संयुक्त अंतरिक्ष मिशन, स्पेस एकेडमी और ट्रेनिंग सेंटर्स की स्थापना पर काम किया जाएगा।
गुजरात के धोलेरा में मेगा निवेश
गुजरात के धोलेरा में यूएई की भागीदारी से स्पेशल इनवेस्टमेंट रीजन विकसित करने के लिए भी समझौता हुआ। इस मेगा पार्टनरशिप के तहत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पायलट ट्रेनिंग स्कूल, एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) सुविधा, ग्रीनफ़ील्ड पोर्ट, स्मार्ट टाउनशिप, रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा इंफ़्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल होंगे।
ऊर्जा और परमाणु सहयोग
ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के रिश्ते और मज़बूत हुए। यूएई सालाना भारत को पांच लाख मीट्रिक टन एलएनजी सप्लाई करेगा। इसके साथ ही यूएई भारत को एलएनजी सप्लाई करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।
इसके अलावा हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और अबु धाबी नेशनल ऑयल कंपनी गैस (ADNOC GAS) के बीच सेल्स एंड पर्चेज़ एग्रीमेंट भी हुआ।
दोनों देशों ने शांति अधिनियम (सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ़ न्यूक्लियर एनर्जी) के पारित होने के मद्देनज़र नागरिक परमाणु सहयोग पर भी चर्चा की।
तकनीक और सुपरकंप्यूटिंग
भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने पर भी सहमति बनी, जिससे तकनीकी सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, “यह यात्रा भले ही छोटी थी, लेकिन इसके नतीजे बेहद महत्वपूर्ण हैं।” कुल मिलाकर, यूएई राष्ट्रपति का यह संक्षिप्त दौरा भारत-यूएई संबंधों को रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और निवेश के क्षेत्रों में नई मजबूती देने वाला साबित हुआ।
