Mohan Bhagwat ने कहा: “RSS बीजेपी को नियंत्रित नहीं करता” – संगठन और सरकार के बीच रिश्ते पर स्पष्टता

29 अगस्त 2025 | दिल्ली

Mohan Bhagwat : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आज एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए स्पष्ट किया कि संघ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को “नियंत्रित” नहीं करता, बल्कि केवल मार्गदर्शन देता है – और वह भी तब, जब मांगा जाए।

बीजेपी अपने फैसले स्वयंम लेती है

भागवत ने कहा, “RSS एक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है। हमारा कार्य राष्ट्र निर्माण और सामाजिक चेतना जगाना है। राजनीतिक निर्णय लेना हमारा काम नहीं है। बीजेपी एक स्वतंत्र राजनीतिक दल है और अपने निर्णय स्वयं लेती है। जब भी बीजेपी या अन्य संगठनों को संघ का सुझाव चाहिए होता है, तब संघ विचार देता है, लेकिन अंतिम निर्णय संबंधित संगठन का होता है।

75 साल की उम्र में रिटायरमेंट का कोई नियम नहीं

हाल ही में सुर्खियों में रहे 75 वर्ष में रिटायरमेंट वाले बयान को लेकर मोहन भागवत ने साफ कहा कि वो इसके पक्ष में नहीं हैं उन्होंने सीधे तौर पर इसे खारिज कर दिया. जबकि यह अनुमान लगाया गया था कि संघ 75 वर्ष की आयु में सक्रिय राजनीति या संगठनात्मक कार्य से “सेवानिवृत्ति” का पक्षधर है.

उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं कहा कि 75 की उम्र में कोई कार्य छोड़ देना चाहिए। जब तक संगठन को लगता है कि मैं काम कर सकता हूं, मैं काम करता रहूंगा।

RSS और सरकार के संबंधों को लेकर बयान

भागवत ने इस बात पर भी जोर दिया कि संघ और सरकार के बीच कोई मतभेद नहीं हैं। “अंदर या बाहर कोई झगड़ा नहीं है। दोनों का उद्देश्य राष्ट्रहित है। जो सरकार कर रही है, उसमें जो अच्छा है उसे हम सराहते हैं और जहां सुधार की जरूरत हो, वहां सुझाव देते हैं – लेकिन यह सब आंतरिक संवाद के माध्यम से होता है, न कि सार्वजनिक आलोचना के ज़रिए।

तीन बच्चों की सलाह और जनसंख्या संतुलन

अपने संबोधन में भागवत ने जनसंख्या संतुलन का मुद्दा भी उठाया और कहा कि “हर परिवार को कम से कम तीन बच्चों का विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह देश के सामाजिक और आर्थिक संतुलन के लिए आवश्यक है, खासकर धार्मिक और सांस्कृतिक जनसंख्या असंतुलन के संदर्भ में।

काशी-मथुरा पर संघ की स्थिति

राम मंदिर आंदोलन के बाद अब काशी और मथुरा जैसे विवादों पर संघ की स्थिति को लेकर चल रही अटकलों पर भी उन्होंने विराम लगाया। “संघ का कोई सक्रिय आंदोलनात्मक एजेंडा काशी-मथुरा को लेकर नहीं है। यह विषय अदालत और समाज के विवेक पर छोड़ दिए गए हैं। हालांकि, कोई स्वयंसेवक निजी रूप से इसमें शामिल हो, तो वह उसकी व्यक्तिगत भूमिका मानी जाएगी।”

अंतिम टिप्पणी: राष्ट्र प्रथम, संगठन बाद में

अपने संबोधन के अंत में मोहन भागवत ने कहा, “हमारा सिद्धांत है — राष्ट्र सर्वोपरि। संगठन, दल, व्यक्ति — ये सब उसके बाद आते हैं। हमारा हर कार्य इसी भावना से प्रेरित होना चाहिए।

मोहन भागवत के बयान का क्या है मतलब ?

इस बयान के जरिए मोहन भागवत ने एक बार फिर संघ की भूमिका को स्पष्ट करने की कोशिश की है। यह वक्तव्य उस समय आया है जब 2024 लोकसभा चुनाव के बाद संघ और भाजपा के बीच कुछ “मतभेद” की अटकलें लगाई जा रही थीं।

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