india us tariff 2025 : भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तूफान! अमेरिकी टैरिफ पर भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया- विशेष रिपोर्ट

वाशिंगठन/ दिल्ली- 26 अगस्त 2025

India us Tariff 2025 : की वैश्विक व्यापार व्यवस्था एक बार फिर तब हिल गई जब अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ प्रमुख उत्पादों पर 25% से 50% तक आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ा दिए। इस निर्णय से न केवल भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ, बल्कि भारत की आर्थिक और कूटनीतिक प्रतिक्रिया को भी परखने का अवसर मिला।

अमेरिका का कदम: टैरिफ लगाने के कारण

अमेरिका द्वारा बढ़ाए गए टैरिफ का तात्कालिक कारण था भारत द्वारा रूस से तेल आयात करना और चीन से कुछ तकनीकी उपकरणों का प्रयोग करना — जिसे अमेरिका ने “राष्ट्रीय सुरक्षा और आपूर्ति शृंखला की संप्रभुता के विरुद्ध” माना। इसके अतिरिक्त, अमेरिका का आरोप है कि भारत ने WTO के कुछ नियमों का उल्लंघन किया है।

अमेरिकी टैरिफ पर भारत की प्रतिक्रिया

भारत सरकार ने इस कदम को “एकतरफा” और “अनुचित” करार देते हुए स्पष्ट किया कि—

  • भारत की ऊर्जा नीति उसके राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।
  • वैश्विक व्यापार संतुलन में भारत ने हमेशा सहयोगात्मक रवैया रखा है।
  • टैरिफ के मुद्दे को WTO और द्विपक्षीय वार्ताओं में उठाया जाएगा।
अमेरिकी टैरिफ पर भारत की प्रतिक्रिया
अमेरिकी टैरिफ पर भारत की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह “संघर्ष का नहीं, संवाद का समय” है।

आर्थिक प्रभाव: किन क्षेत्रों को नुकसान?

हीरा और रत्न उद्योग:

सूरत और मुंबई की कई कंपनियों को अमेरिकी ऑर्डर मिलने बंद हो गए। लगभग 2 लाख श्रमिकों की नौकरियां प्रभावित होने की आशंका है।

कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स:

तिरुपुर और नोएडा के छोटे निर्यातक इकाइयों ने उत्पादन रोका है। अमेरिका में पहले से भेजे गए माल को भारी टैक्स चुकाकर छुड़वाना पड़ रहा है।

फार्मास्युटिकल्स:

हालांकि टैरिफ फार्मा पर नहीं लगे, लेकिन अमेरिका की “फार्मा जांच नीति” कड़ी हो गई है, जिससे भारत के प्रमुख दवा निर्यातकों पर दबाव बढ़ा है।

india us tariff 2025 किस सेक्टर को नुक्सान
india us tariff 2025 किस सेक्टर को नुक्सान

भारत की जवाबी रणनीति

निर्यात विविधीकरण (Diversification):

भारत सरकार ने 50 नए देशों में व्यापार संबंधों को मजबूत करने की रणनीति बनाई है—खासकर मध्य एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और ASEAN देशों के साथ।

आत्मनिर्भर भारत को गति

प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत मिशन के दूसरे चरण की घोषणा की, जिसमें MSME को सब्सिडी, तकनीक उन्नयन और विदेशी निर्भरता कम करने पर ज़ोर दिया गया।

द्विपक्षीय बातचीत का रास्ता खुला रखा:

सरकार ने स्पष्ट किया कि अमेरिका से बातचीत बंद नहीं हुई है। कई उच्च स्तरीय वार्ताएं जारी हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया: सत्ता और विपक्ष

केंन्द्र सरकार की प्रतिक्रिया

भाजपा ने इसे “गंभीर चुनौती” बताया लेकिन कहा कि भारत इससे मजबूत होकर निकलेगा। भाजपा नेताओं ने टैरिफ को “संप्रभु निर्णयों पर दबाव” कहा।

भारत में विपक्षी दलों की क्या है प्रतिक्रिया

कांग्रेस, AAP और TMC जैसे दलों ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत को अपनी स्थिति और स्पष्ट करनी चाहिए थी।

जनता और कारोबारियों की राय

  • निर्यातक संगठन FIEO ने कहा कि “यह व्यापार युद्ध की शुरुआत हो सकती है अगर समाधान जल्द न निकला।”
  • कारोबारी समूहों ने विशेष रूप से कपड़ा और रत्न उद्योग के लिए सरकार से राहत पैकेज की मांग की है।
  • आम जनता में भी चिंता है कि इससे भारतीय उत्पाद महंगे होंगे और कुछ वस्तुओं की आपूर्ति पर असर पड़ेगा।

आगे की राह: भारत के पास क्या विकल्प हैं?

 WTO में केस दायर करना

अमेरिका से पुनः वार्ता

अन्य देशों के साथ FTA (Free Trade Agreement) तेज़ी से करना

घरेलू उद्योगों को सब्सिडी और टैक्स राहत देना

डिजिटल और सेवा क्षेत्र को अमेरिका से अलग हटाकर नई मंडियों में प्रवेश

भारत के सामने चुनौती बड़ी है, लेकिन विकल्प भी मौजूद हैं। इस संकट को एक अवसर में बदला जा सकता है यदि सरकार, उद्योग और जनता मिलकर रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह न तो दबाव में आएगा और न ही टकराव का रास्ता अपनाएगा

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