Mohan Bhagwat : परिवार के भीतर बातचीत से रुकेगा लव जिहाद- संघ प्रमुख मोहन भागवत

Mohan Bhagwat : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लव जिहाद को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने में कानून से अधिक प्रभावी भूमिका परिवार और समाज की होती है। यदि परिवार के भीतर माता-पिता और बच्चों के बीच खुला संवाद बना रहे, तो ऐसी समस्याओं पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि आज का समाज तेजी से बदल रहा है और युवा पीढ़ी अनेक प्रकार के प्रभावों के बीच निर्णय ले रही है। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बच्चों को केवल निर्देश देने के बजाय उनसे बातचीत करना, उनकी बात सुनना और सही-गलत का विवेक देना आवश्यक है।

परिवार में संवाद का अभाव लव जिहाद का कारण

संघ प्रमुख ने कहा कि जब परिवार में संवाद का अभाव होता है, तब युवा अपनी भावनात्मक उलझनों के समाधान बाहर तलाशते हैं। यही स्थिति कई बार उन्हें भ्रम या गलत इरादों का शिकार बना देती है। यदि घर में भरोसे का माहौल हो, तो बच्चे अपने रिश्तों और फैसलों पर खुलकर चर्चा कर सकते हैं और समय रहते मार्गदर्शन मिल सकता है।

मोहन भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि लव जिहाद को केवल राजनीतिक या कानूनी नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं है। यह एक सामाजिक समस्या है, जिसकी जड़ें पारिवारिक और सामाजिक ताने-बाने से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि समाज को आत्ममंथन करना होगा कि क्या परिवार अपने मूल दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन कर रहे हैं या नहीं।

Mohan Bhagwat Love Jihad
Mohan Bhagwat Love Jihad

उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा के संदर्भ में भी परिवार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। भागवत के अनुसार, यदि बेटियों को घर में विश्वास और संवाद का वातावरण मिले, तो वे किसी भी तरह के दबाव या धोखे के खिलाफ अधिक जागरूक और सशक्त होकर खड़ी हो सकती हैं।

संघ प्रमुख के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि यह बयान समाज को आत्मनिर्भर और सजग बनाने की दिशा में है, जबकि आलोचकों का मानना है कि ऐसे मुद्दों पर कानूनी ढांचे की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

फिलहाल, मोहन भागवत का यह संदेश एक बार फिर परिवार को समाज की सबसे मजबूत इकाई के रूप में सामने रखता है और इस बात पर जोर देता है कि संवाद, विश्वास और संस्कार के जरिए ही सामाजिक चुनौतियों का स्थायी समाधान संभव है।

 

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