Chhattisgarh: सुकमा में खत्म हुआ नक्सल भय, गोगुंडा की पहाड़ियों में CRPF ने तोड़ा रमन्ना का स्मारक

Chhattisgarh: चार दशकों से नक्सली आतंक का पर्याय बने कुख्यात नक्सली नेता रमन्ना के स्मारक को केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने बुधवार को ध्वस्त कर दिया।

Chhattisgarh News: कभी जंगलों की खामोशी में छिपा डर, बारूद की गंध और अनकहे खौफ की पहचान रहा सुकमा का गोगुंडा इलाका अब बदलाव की राह पर बढ़ता दिख रहा है। करीब चार दशक तक नक्सली आतंक का प्रतीक बने कुख्यात माओवादी नेता रमन्ना के स्मारक को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने बुधवार को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई सिर्फ एक ढांचे को गिराने तक सीमित नहीं रही, बल्कि उस डर को तोड़ने की कोशिश थी, जिसने सालों से स्थानीय लोगों की ज़िंदगी को जकड़ रखा था।

इस ऑपरेशन को सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन ने अंजाम दिया। कमांडेंट हिमांशु पांडे के निर्देश पर असिस्टेंट कमांडेंट विदेखो और असिस्टेंट कमांडेंट अंकित सिंह की अगुवाई में पूरी रणनीति और सुरक्षा के साथ यह अभियान चलाया गया। भारी सुरक्षा घेरे के बीच स्मारक को गिराकर साफ संदेश दिया गया कि अब इस इलाके में भय और दबाव की राजनीति नहीं चलेगी।

जिस स्मारक को हटाया गया, वह माओवादी नेता रमन्ना का था, जिसे कभी तेलंगाना, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का बड़ा चेहरा माना जाता था। उस पर तीन राज्यों में कुल 2.40 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। रमन्ना की मौत के बाद माओवादी संगठन ने उसकी विचारधारा को जिंदा रखने के लिए इस स्मारक को ‘शहादत’ के प्रतीक के रूप में खड़ा किया था।

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स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस स्मारक के पास से गुजरते वक्त लोग डर के कारण सिर झुका लेते थे। बच्चों को चुप करा दिया जाता था और महिलाएं रास्ता बदल लेती थीं। यह सिर्फ पत्थरों की संरचना नहीं, बल्कि डर का स्थायी निशान बन चुका था। स्मारक गिरते ही गांव का माहौल बदलता नजर आया। पत्थरों के टूटने की आवाज के साथ वर्षों से पसरी खामोशी भी टूट गई और लोगों के चेहरों पर राहत साफ दिखी।

सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट विदेखो ने कहा कि माओवाद केवल हथियारों के सहारे नहीं, बल्कि डर और प्रतीकों के दम पर जिंदा रहता है। ऐसे अवैध स्मारकों को हटाना जरूरी है, ताकि भय की जड़ खत्म हो और विकास का रास्ता खुले। गौरतलब है कि सुकमा का गोगुंडा पहाड़ पिछले करीब 40 सालों से नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। नक्सलियों की भारी मौजूदगी के कारण सुरक्षाबलों की पहुंच यहां मुश्किल थी। लेकिन सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन का नया कैंप बनने के बाद हालात तेजी से बदले हैं और अब यह इलाका नक्सलियों के कब्जे से मुक्त हो चुका है।

टॉप नक्सली कमांडर और सेंट्रल कमेटी सदस्य रमन्ना की मौत साल 2020 में हार्ट अटैक से हुई थी। इसके बाद नक्सलियों ने उसकी याद में गोगुंडा की पहाड़ियों पर करीब 20 फीट ऊंचा स्मारक बनाया था, जिसे उनके प्रभाव और दबदबे का प्रतीक माना जाता था। इस स्मारक को गिराने के लिए सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन और कोबरा 201 बटालियन ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर इसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

 

 

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