राजधानी दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक खास तस्वीर साझा की है। तस्वीर सामने आते ही यह सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा की गई तस्वीर में वह पुतिन और जिनपिंग के साथ नजर आ रहे हैं। तीनों नेताओं के बीच सहज और दोस्ताना अंदाज वाली यह तस्वीर ऐसे समय सामने आई है, जब दुनिया में अमेरिका, चीन और रूस के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
मोदी-जिनपिंग-पुतिन की तस्वीर क्यों है खास?
BRICS सम्मेलन में भारत की भूमिका इस बार खास तौर पर महत्वपूर्ण है। भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और प्रधानमंत्री मोदी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि BRICS किसी देश के खिलाफ बना मंच नहीं है, बल्कि सहयोग, विकास और वैश्विक शासन में अधिक प्रतिनिधित्व के लिए काम करने वाला समूह है।
ऐसे में मोदी, जिनपिंग और पुतिन की एक साथ तस्वीर भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की नीति का प्रतीक मानी जा रही है। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह तस्वीर सीधे तौर पर किसी एक देश या नेता को संदेश देने के लिए साझा की गई है।
ट्रंप के लिए क्यों माना जा रहा बड़ा संदेश?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक एवं व्यापारिक तनाव लगातार चर्चा में रहा है। वहीं रूस के साथ अमेरिका के संबंध भी यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण तनावपूर्ण बने हुए हैं।
ऐसे वैश्विक माहौल में भारत का रूस और चीन दोनों के साथ संवाद बनाए रखना उसकी स्वतंत्र विदेश नीति को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, तस्वीर को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है—भारत किसी एक शक्ति खेमे में बंधने के बजाय अलग-अलग वैश्विक शक्तियों के साथ अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर संबंध बनाए रखना चाहता है।
सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग
BRICS Summit 2026 में शी जिनपिंग की भारत यात्रा भी महत्वपूर्ण है। वह करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी हुई, जिसमें दोनों देशों ने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत-चीन संबंधों में 2020 के सीमा विवाद के बाद तनाव रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को संबंधों में सावधानीपूर्वक सुधार की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि सीमा और व्यापार से जुड़े कई मुद्दे अभी भी चुनौती बने हुए हैं।
पुतिन के साथ भारत की मजबूत दोस्ती
BRICS सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात भी सुर्खियों में रही। दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी देखने को मिली। मोदी और पुतिन ने नई दिल्ली में INNOPROM प्रदर्शनी का भी दौरा किया।
भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में BRICS मंच पर मोदी-पुतिन की नजदीकी भारत की पारंपरिक रणनीतिक साझेदारी को भी दर्शाती है।
BRICS से भारत का बड़ा संदेश
BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक व्यवस्था में सुधार और Global South की अधिक प्रभावी भागीदारी की वकालत की है। उन्होंने वैश्विक संस्थानों में प्रतिनिधित्व बढ़ाने और BRICS के फैसलों को ठोस परिणामों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी BRICS को Global South की महत्वपूर्ण आवाज बताते हुए वैश्विक शांति और सहयोग में समूह की भूमिका बढ़ाने की बात कही।
मोदी-जिनपिंग-पुतिन की यह तस्वीर सिर्फ तीन बड़े नेताओं की एक तस्वीर नहीं है, बल्कि बदलती वैश्विक कूटनीति की एक झलक भी मानी जा रही है। भारत एक तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंध बनाए हुए है, तो दूसरी तरफ रूस और चीन के साथ भी संवाद और सहयोग के रास्ते खुले रख रहा है।
यही भारत की मौजूदा विदेश नीति का प्रमुख संदेश दिखाई देता है—किसी एक खेमे का हिस्सा बनने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलित संबंध।
ऐसे में यह तस्वीर सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए संदेश है या नहीं, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना जरूर है कि नई दिल्ली से दुनिया को भारत की स्वतंत्र और संतुलित कूटनीति की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है।