Donald Trump : मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब ईरान के खिलाफ अपने अगले कदम पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। व्हाइट हाउस के अंदर हुई उच्चस्तरीय बैठकों में कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ सैन्य विकल्पों पर भी विस्तृत चर्चा हुई है। सूत्रों के अनुसार, अमेरिका उन विकल्पों का मूल्यांकन कर रहा है जिनमें ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित द्वीपों पर सैन्य नियंत्रण और ईरान के अत्यधिक सुरक्षित परमाणु परिसर “माउंट पिकैक्स” पर हमला शामिल है।
व्हाइट हाउस में हाई लेवल बैठक
14 जुलाई को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए कौन-सा विकल्प सबसे प्रभावी होगा और किस स्थिति में सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सकता है।
‘माउंट पिकैक्स’ क्यों बना सबसे बड़ा निशाना?
अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, “माउंट पिकैक्स” ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा सबसे सुरक्षित और गुप्त भूमिगत परिसर माना जाता है। यह पहाड़ के भीतर लगभग 90 से 145 मीटर की गहराई में बनाया गया है, जहां तक पारंपरिक बंकर-भेदी बम भी आसानी से नहीं पहुंच सकते।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका इस परिसर को निशाना बनाता है तो यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई होगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बढ़ा दबाव
अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं। बताया जा रहा है कि ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले कई जहाजों को वापस लौटने की चेतावनी दी गई है। एक जहाज के खिलाफ हेलफायर मिसाइल के इस्तेमाल की भी जानकारी सामने आई है, जिसे अमेरिकी सेना ने संभावित सुरक्षा खतरा बताया।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है।
कूटनीति या युद्ध? ट्रंप ने छोड़े दोनों विकल्प खुले
राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता अब भी कूटनीतिक समाधान है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बातचीत सफल नहीं होती तो अमेरिका सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।
ट्रंप ने हालिया बयान में कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो अमेरिका ईरान की उन क्षमताओं को खत्म करेगा जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन रही हैं।
जमीनी सेना भेजने पर अभी फैसला नहीं
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन के भीतर जमीनी सैनिक भेजने को लेकर अभी भी मतभेद हैं। कुछ अधिकारी इसे अत्यधिक जोखिम भरा कदम मानते हैं, जबकि अन्य का कहना है कि सीमित सैन्य अभियान ईरान पर दबाव बढ़ाने का प्रभावी तरीका हो सकता है।
मध्य-पूर्व में बढ़ सकती है अस्थिरता
यदि अमेरिका इन सैन्य योजनाओं को मंजूरी देता है तो यह संघर्ष एक नए और अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश कर सकता है। इससे न केवल मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ेगा बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े सैन्य अभियान का प्रभाव अमेरिकी घरेलू राजनीति और आगामी चुनावी माहौल पर भी दिखाई दे सकता है।
क्या आगे होगा?
फिलहाल अंतिम निर्णय राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में है। व्हाइट हाउस लगातार सैन्य और कूटनीतिक दोनों विकल्पों का आकलन कर रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत का रास्ता अपनाता है या फिर मध्य-पूर्व एक नए बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता है।
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