Bihar Politics: निशांत कुमार को मिल सकती है राजनीतिक विरासत, लेकिन परीक्षा होगी कड़ी
Bihar Politics: नीतीश के बेटे निशांत को राजनीति और वो भी बिहार की राजनीति पर पकड़ बनाने के लिए दिन रात मेहनत करनी पड़ेगी। उनको राजनीति का काईंयापन भी सीखना पड़ेगा। केवल सादगी से राजनीति में काम नहीं बन सकता।
Bihar Politics: Nitish Kumar की पार्टी Janata Dal (United) की विधानमंडल बैठक में पार्टी के सभी विधायक और सांसद शामिल हुए। इस बैठक में नीतीश कुमार ने अपने फैसले की जानकारी नेताओं को दी और साफ कर दिया कि उन्होंने यह निर्णय सोच-समझकर लिया है और अब इसमें बदलाव नहीं होगा। हालांकि बैठक में मौजूद कई नेताओं ने उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया। इसी दौरान यह भी तय हुआ कि उनके बेटे Nishant Kumar जल्द ही जदयू की सदस्यता लेंगे और उन्हें पार्टी के नेतृत्व के लिए तैयार किया जाएगा। बताया गया कि सदस्यता लेने के बाद निशांत कुमार बिहार के अलग-अलग जिलों का दौरा करेंगे, ताकि राज्य और वहां की राजनीति को करीब से समझ सकें।
कौन हैं निशांत कुमार
निशांत कुमार का जन्म 1975 में हुआ था और उनकी उम्र करीब 51 वर्ष है। उन्होंने Birla Institute of Technology Mesra से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। पढ़ाई के बाद कुछ समय तक वे मुंबई में भी रहे, लेकिन वर्ष 2016 से पटना में ही रह रहे हैं। निशांत हमेशा से बेहद लो-प्रोफाइल जीवन जीते रहे हैं। पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने कभी यह जाहिर नहीं होने दिया कि वे बिहार के मुख्यमंत्री के बेटे हैं। साल 2007 में उन्होंने अपनी मां को खो दिया, जो पेशे से शिक्षिका थीं। अब तक उन्होंने शादी नहीं की है और सार्वजनिक जीवन से दूर ही रहे हैं।
राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी
अब निशांत कुमार के सामने जदयू को संभालने और उसे आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। साथ ही पार्टी को एकजुट बनाए रखना भी उनके लिए बड़ी चुनौती होगी। दिलचस्प बात यह है कि अन्य क्षेत्रीय दलों की तरह नीतीश कुमार ने अपने सक्रिय राजनीतिक जीवन में निशांत को कभी एक नेता के रूप में स्थापित नहीं किया।
अगर अन्य दलों की बात करें तो Mulayam Singh Yadav ने अपने रहते हुए Akhilesh Yadav को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था। Lalu Prasad Yadav ने अपने बेटों Tejashwi Yadav और Tej Pratap Yadav को राजनीति में आगे बढ़ाया। वहीं Ram Vilas Paswan ने अपने बेटे Chirag Paswan को सक्रिय राजनीति में स्थापित किया।
इसी तरह Mamata Banerjee ने Abhishek Banerjee को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी माना है। Sharad Pawar के परिवार के कई सदस्य राजनीति में सक्रिय हैं, जिनमें Supriya Sule और Rohit Pawar शामिल हैं। वहीं M. Karunanidhi के बाद M. K. Stalin और अब Udhayanidhi Stalin राजनीति में आगे बढ़े हैं। Shibu Soren के रहते हुए Hemant Soren झारखंड के मुख्यमंत्री बने।
नीतीश कुमार और Sharad Yadav जैसे नेताओं ने लंबे समय तक परिवारवाद का विरोध किया और अपने बच्चों को राजनीति से दूर रखा। लेकिन अब परिस्थितियां ऐसी बन गई हैं कि नीतीश कुमार को वही रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिसका वे पहले विरोध करते रहे हैं।
आसान नहीं होगी राह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निशांत कुमार के लिए आगे की राह आसान नहीं होगी। उन्हें पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह अपनी पहचान बनानी होगी। साथ ही उनका मुकाबला युवा नेताओं जैसे Tejashwi Yadav और Chirag Paswan से होगा, जो पहले से सक्रिय राजनीति में मजबूत पकड़ बना चुके हैं। इसके अलावा उन्हें Bharatiya Janata Party के साथ भी राजनीतिक संतुलन बनाकर चलना होगा। हालांकि उनके लिए राहत की बात यह है कि नीतीश कुमार अभी सक्रिय हैं और वे उन्हें राजनीति की बारीकियां समझाने में मार्गदर्शन दे सकते हैं।
राजनीति को अक्सर 24 घंटे का काम कहा जाता है। Narendra Modi, Amit Shah, नीतीश कुमार, लालू यादव और शरद पवार जैसे नेताओं को उनकी लगातार मेहनत और राजनीतिक सक्रियता के लिए जाना जाता है। ऐसे में बिहार की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाने के लिए निशांत कुमार को भी लगातार मेहनत करनी होगी और जमीन पर सक्रिय रहना पड़ेगा।