Diabetes in India: इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में डायबिटीज को देश में उभरते हुए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम के रूप में रेखांकित किया गया है। नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (NCD) में यह अब सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है। वर्तमान में करीब 9 करोड़ वयस्क इससे प्रभावित हैं और अनुमान है कि 2026 तक यह आंकड़ा 10 करोड़ के पार जा सकता है।
अक्सर लोग अधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान या धुंधला दिखाई देना जैसे लक्षणों को ही डायबिटीज का संकेत मानते हैं। लेकिन त्वचा पर दिखने वाले कुछ बदलाव भी ब्लड शुगर असंतुलन के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। हालांकि ये लक्षण अन्य कारणों से भी हो सकते हैं, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। आइए जानते हैं डायबिटीज से जुड़े सात सामान्य त्वचा संकेतों के बारे में-
1. डायबिटिक डर्मोपैथी
पिंडलियों पर छोटे, गोल और भूरे या लाल धब्बे दिखाई दे सकते हैं। आमतौर पर इनमें दर्द या खुजली नहीं होती, लेकिन यह छोटी रक्त वाहिकाओं में बदलाव का संकेत हो सकते हैं। Journal of Cardiovascular Disease Research के मुताबिक, डायबिटीज मरीजों में त्वचा संबंधी बदलाव अक्सर ब्लड वेसल्स और नसों की क्षति से जुड़े पाए गए हैं।
2. एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स
गर्दन, बगल, जांघों या उंगलियों के जोड़ों पर गहरे, मोटे और मखमली धब्बे इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकते हैं। Indian Journal of Dermatology, Venereology and Leprology के अनुसार, यह मोटापे और डायबिटीज से जुड़ा एक अहम त्वचा संकेत है।
3. घाव का धीरे भरना
अगर चोट या जख्म सामान्य से ज्यादा समय में भरते हैं, तो इसका कारण कमजोर ब्लड फ्लो या नसों की क्षति हो सकता है। Arteriosclerosis, Thrombosis, and Vascular Biology जर्नल में बताया गया है कि इम्यून सेल्स की कार्यक्षमता में कमी से क्रॉनिक घाव और डायबिटिक फुट अल्सर का खतरा बढ़ जाता है।
4. बार-बार संक्रमण
उच्च ब्लड शुगर स्तर इम्युनिटी को कमजोर कर देता है, जिससे फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन बार-बार हो सकते हैं। Journal of Pure and Applied Microbiology में भी इसका उल्लेख किया गया है।
5. खुजली और सूखी त्वचा
हाई ब्लड शुगर शरीर से तरल पदार्थ कम कर देता है, जिससे त्वचा रूखी और खुजलीदार हो सकती है। छोटे ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचने से पसीना और तेल स्राव भी घट सकता है। Frontiers in Medicine (2025) में इसे डायबिटीज से जुड़ा संभावित संकेत बताया गया है।
6. नेक्रोबायोसिस लिपॉइडिका
यह दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थिति है, जिसमें पिंडलियों पर लाल-भूरे या पीले चमकदार धब्बे बन सकते हैं। त्वचा पतली होकर नसें दिखाई देने लगती हैं। International Journal of Molecular Sciences के अनुसार, लंबे समय से डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों में यह अधिक देखा जाता है।
7. विटिलिगो
इस स्थिति में त्वचा के कुछ हिस्सों का रंग उड़कर सफेद हो जाता है। टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, इसलिए ऐसे मरीजों में विटिलिगो अधिक पाया जाता है। टाइप-2 डायबिटीज में यह मेटाबॉलिक तनाव और इम्यून असंतुलन से जुड़ा हो सकता है। विशेषज्ञ संस्थान ICMR भी डायबिटीज नियंत्रण में त्वचा जांच को अहम मानते हैं।
त्वचा पर दिखने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि ऐसे लक्षण लगातार दिखाई दें, तो ब्लड शुगर जांच कराना और डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडी और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न समझें। किसी भी उपचार या नई दिनचर्या शुरू करने से पहले चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।