Mahashivratri 2026: काशी विश्वनाथ धाम में शिवरात्रि का भव्य आयोजन, इस दिन बंद रहेंगे बाबा विश्वनाथ के स्पर्श दर्शन
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के अवसर पर देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी पूरी तरह शिवमय होने जा रही है। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के काशी पहुंचने की संभावना है। शिवालयों से निकलने वाली पारंपरिक शिव बारातों को लेकर जहां भक्तों में उत्साह है, वहीं प्रशासन ने भी दर्शन-पूजन और व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात और सुविधाओं पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
Mahashivratri 2026: भगवान शिव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि का पर्व इस वर्ष बेहद भव्य और खास होने जा रहा है। इस महापर्व को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। सुरक्षा व्यवस्था को सख्त किया गया है और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दर्शन-पूजन से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए हैं, ताकि किसी भी भक्त को असुविधा न हो।
इस बार क्यों खास है महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि के मौके पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने 14 से 17 फरवरी तक बाबा विश्वनाथ के स्पर्श-दर्शन पर रोक लगाने का फैसला किया है। इस अवधि में भक्त केवल झांकी दर्शन कर सकेंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर में मोबाइल फोन, बैग और अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं ले जाने पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
इन वस्तुओं पर रहेगा प्रतिबंध
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से नियमों का पालन करने की अपील की है। महाशिवरात्रि के दौरान श्री काशी विश्वनाथ की पूजा-अर्चना और आरतियां पारंपरिक विधि-विधान से संपन्न की जाएंगी। धाम की सुरक्षा और सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए परिसर में पेन, मोबाइल फोन, बैग, स्मार्ट या डिजिटल घड़ी, तंबाकू, पॉलीथीन और प्लास्टिक की पानी की बोतल समेत कई वस्तुओं को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।
श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित वस्तुओं के साथ किसी भी श्रद्धालु को धाम परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने भक्तों से अनुरोध किया है कि वे जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और सहयोग करते हुए इस पावन पर्व को श्रद्धा, शांति और अनुशासन के साथ मनाने में मदद करें।
काशी की महाशिवरात्रि क्यों मानी जाती है विशेष
वाराणसी में महाशिवरात्रि का पर्व बेहद अनूठा और आस्था से जुड़ा होता है। इस दिन को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसमें काशीवासी स्वयं बाराती बनते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर में शिव-शक्ति के मिलन, रात्रि भर चलने वाली पूजा-अर्चना, भव्य शिव बारात और पूरे शहर के शिवमय वातावरण के कारण यह पर्व दुनियाभर के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था और माना जाता है कि इसी रात्रि उन्होंने अपना प्रसिद्ध आनंद तांडव नृत्य भी किया था।