AR Rahman Bollywood Controversy : ऑस्कर विजेता संगीतकार ए. आर. रहमान एक बार फिर अपने बयान के चलते विवादों में आ गए हैं. वजह है उनका वह बयान, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पहले जैसा काम नहीं मिल रहा और इसके पीछे सांप्रदायिक सोच और बदलते पावर डायनेमिक्स बड़ा कारण हैं। रहमान के इस बयान ने न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि पूरे म्यूज़िक इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। रहमान के बयान के बाद कई दिग्गजों ने अपनी-अपनी राय रखी।
मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि
ए. आर. रहमान का कद इतना बड़ा है कि उन्हें काम न मिलने की बात समझ से परे है। जावेद अख्तर के मुताबिक, इंडस्ट्री में कई बार ऐसा होता है कि लोग यह मान लेते हैं कि रहमान इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स और शोज़ में बहुत व्यस्त रहते हैं, इसलिए उनसे संपर्क करने में हिचकिचाते हैं.
AR Rahman Javed Akhtar
वहीं गायक शान मुखर्जी ने इस पूरे विवाद को अलग नजरिए से देखा। शान का कहना है कि
म्यूज़िक इंडस्ट्री में काम मिलना या न मिलना ज़्यादातर पर्सनल चॉइस और प्रोफेशनल फैसलों पर निर्भर करता है। इसे धार्मिक या व्यक्तिगत रूप से लेना सही नहीं है। उनके अनुसार, दूसरों को दोष देने के बजाय कलाकारों को अच्छा संगीत बनाने और कड़ी मेहनत पर ध्यान देना चाहिए।
A R Rahman Shaan Mukherjee
भारत के वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने ट्विटर पर लिखा
फिल्म रामायण के लिए संगीत दे रहे ऑस्कर विनिंग AR Rahman को फिल्म और म्यूज़िक इंडस्ट्री में सांप्रदायिकता नज़र आती है. उन्हें छावा भी एक विभाजनकारी फिल्म लगती है, जबकि उस फिल्म का संगीत भी खुद उन्होंने ही दिया है. इस्लाम में कन्वर्ट हुए ए आर रहमान ये बात भूल जाते हैं कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने दिलीप कुमार से लेकर तीनों खानों को गले लगाया. अब सवाल ये खड़ा होता है कि इतना सम्मान, नाम और काम पाने वाले रहमान फ्रीडम ऑफ स्पीच के नाम पर अब किस एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं? बावजूद इन सबके रहमान को लगता है सत्ता परिवर्तन के कारण उन्हें पिछले 8 सालों में काम मिलना कम हो गया है.
AR Rahman Deepak Chaurasia
ए. आर. रहमान का करियर अपने आप में एक मिसाल है। तमिल सिनेमा से लेकर बॉलीवुड और हॉलीवुड तक उन्होंने भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाई। स्लमडॉग मिलियनेयर के लिए दो ऑस्कर जीतने वाले रहमान आज भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में उनके बयान ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वाकई भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में हाल के वर्षों में सोच और प्राथमिकताएं बदली हैं?
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या आज की म्यूज़िक इंडस्ट्री टैलेंट से ज़्यादा नेटवर्क और पावर स्ट्रक्चर पर निर्भर होती जा रही है। साथ ही यह भी सवाल है कि क्या बड़े कलाकारों के बयान इंडस्ट्री की सच्चाई को सामने लाते हैं या फिर वे निजी अनुभवों का प्रतिबिंब हैं। या फिर वो किसी ऐजेंडे के लिए समय समय पर ऐसे बयानों को सामने रखते हैं.
फिलहाल इतना तय है कि ए. आर. रहमान सिर्फ एक संगीतकार नहीं, बल्कि एक ऐसी आवाज़ हैं जिनके शब्द और सुर दोनों असर रखते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बहस इंडस्ट्री को किसी बदलाव की ओर ले जाती है. कई विश्लेषकों के अनुसार, जब इंडस्ट्री में नेटवर्किंग, ट्रेंड्स और नई साउंड्स की भूमिका बढ़ी है, तब हर बड़े नाम को भी खुद को बदलते समय के साथ ढालना पड़ता है। ऐसे में व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर पूरे सिस्टम पर आरोप लगाना न तो न्यायसंगत है और न ही रचनात्मक बहस को आगे बढ़ाता है।