CP Radhakrishnan : सीपी राधाकृष्णन होंगे भारत के अगले उपराष्ट्रपति, NDA के उम्मीदवार CP राधाकृष्णन को 152 वोटों से भारी जीत मिली है. जिसके बाद अब नए उपराष्ट्रपति के लिए चुने गए हैं. उपराष्ट्रपति के इस चुनाव में 767 उम्मीदवार थे. जिसमें से Valid 752 और Invalid 15 Vote थे. जिसमें से इंडिया ब्लॉक India blok को 300 तो NDA को 452 वोट मिले. इस चुनाव में भी विपक्ष के साथ खेला हो गया और विपक्ष ने NDA के पक्ष में 15 वोट ज्यादा पड़े का आरोप लगाया है.
सीपी राधाकृष्णन होंगे भारत के अगले उपराष्ट्रपति, मिले 452 वोट: विपक्ष ने लगाए पक्षपात के आरोप
वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व तमिलनाडु राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को भारत का 15वां उपराष्ट्रपति चुना गया है। उन्हें 452 वोट प्राप्त हुए, जबकि विपक्ष के उम्मीदवार को मात्र 212 वोट मिले। एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की ओर से राधाकृष्णन की उम्मीदवारी पहले ही लगभग तय मानी जा रही थी, लेकिन विपक्ष ने इस चुनाव को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

कौन हैं सीपी राधाकृष्णन?
सीपी राधाकृष्णन भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और तमिलनाडु से आते हैं। वे दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और हाल ही में झारखंड के राज्यपाल के रूप में भी सेवा दे चुके हैं। सरल स्वभाव और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया।
भारी बहुमत से जीत
उपराष्ट्रपति चुनाव में कुल 728 वैध वोट पड़े, जिनमें से 452 राधाकृष्णन के पक्ष में गए। इस तरह उन्होंने आवश्यक बहुमत से कहीं अधिक वोट हासिल किए। चुनाव में एनडीए के साथ-साथ कुछ क्षेत्रीय दलों के भी समर्थन ने उनकी जीत को सुनिश्चित किया।
विपक्ष के आरोप: “लोकतंत्र की अनदेखी”
हालांकि राधाकृष्णन की जीत संविधानिक प्रक्रिया के तहत हुई, विपक्ष ने इसे “जनमत की उपेक्षा” और “संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग” का मामला बताया है।
विपक्ष के मुख्य आरोप:
- संख्याबल का दुरुपयोग
कांग्रेस, टीएमसी और AAP जैसे विपक्षी दलों ने कहा कि एनडीए ने अपने संख्याबल का प्रयोग कर इस पद को एकतरफा रूप से हथिया लिया।
- गैर-राजनीतिक व्यक्ति की उपेक्षा
विपक्ष का आरोप है कि उपराष्ट्रपति जैसे गरिमामय और अपेक्षाकृत गैर-राजनीतिक पद के लिए किसी शिक्षाविद् या निष्पक्ष व्यक्ति को चुना जाना चाहिए था। भाजपा ने एक पार्टी कार्यकर्ता को इस पद पर बैठाकर “संवैधानिक मर्यादा” को कम किया है।
- चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी
कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि एनडीए ने विपक्ष से किसी प्रकार की चर्चा किए बिना अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया, जिससे लोकतांत्रिक संवाद की प्रक्रिया बाधित हुई।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सीपी राधाकृष्णन का चयन उनके अनुभव और योग्यता के आधार पर किया गया है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। विपक्ष को जनादेश का सम्मान करना चाहिए।”
सीपी राधाकृष्णन की जीत एनडीए की राजनीतिक ताकत और एकजुटता को दर्शाती है, लेकिन इस चुनाव ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या संवैधानिक पदों पर राजनीतिक नियुक्तियाँ लोकतंत्र के हित में हैं? विपक्ष की चिंता को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, लेकिन लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि उसमें असहमति को भी जगह मिलती है।
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