Dharmendra Pradhan Resignation : देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर कई महीनों से जारी विवाद, विपक्ष के हमलों और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने विस्तृत इस्तीफा पत्र में उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी राजनीतिक दबाव या व्यक्तिगत सम्मान का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब संसद से लेकर सड़क तक NEET परीक्षा को लेकर लगातार राजनीतिक घमासान जारी था। विपक्ष शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा था, वहीं छात्र संगठन परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर आंदोलनरत थे।
पत्र में क्या लिखा?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि
वह पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उनका मानना है कि एक मजबूत, समावेशी और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव है।
उन्होंने कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत सामने आते ही केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। मामले की जांच CBI को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया गया और अगले वर्ष से परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने की घोषणा भी की गई।
प्रधान ने लिखा कि 21 जून 2026 को 20 लाख से अधिक छात्रों की दोबारा परीक्षा निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराई गई और 16 जुलाई को घोषित परिणामों में देश के गरीब एवं वंचित वर्गों के कई प्रतिभाशाली छात्रों ने सफलता हासिल की।
‘कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह किया’
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने बिना किसी का नाम लिए आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने का प्रयास किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा। उन्होंने लिखा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं ने उन्हें भीतर तक विचलित किया है।
उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य राजनीतिक संघर्ष, अदालतों की लंबी प्रक्रिया और आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़े। इसी कारण उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।
जंतर-मंतर आंदोलन के बाद बढ़ा दबाव
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से विभिन्न छात्र संगठनों का प्रदर्शन जारी था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग परीक्षा प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करना थी। इसी बीच विपक्ष ने भी संसद के भीतर और बाहर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज कर दी थी।
हालांकि सरकार लगातार यह कहती रही कि परीक्षा दोबारा कराई जा चुकी है, जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है।
राजनीतिक संदेश भी छोड़ गए प्रधान
अपने पत्र के अंतिम हिस्से में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया और कहा कि सार्वजनिक जीवन में वह आगे भी राष्ट्र निर्माण तथा युवाओं के हित में कार्य करते रहेंगे।
अब आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा मंत्रालय की कमान किसे सौंपी जाएगी। साथ ही NEET परीक्षा सुधार, CBT प्रणाली लागू करने और CBI जांच की प्रगति पर भी सभी की नजरें रहेंगी। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही शिक्षा मंत्रालय में नए नेतृत्व की घोषणा कर सकती है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक मंत्री के पद छोड़ने की घटना नहीं है, बल्कि यह उस राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव का संकेत भी है जो देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर बना। यदि सरकार परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लागू करती है, तो यह फैसला भविष्य की शिक्षा नीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। वहीं विपक्ष इसे अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश करेगा, जबकि सरकार इसे नैतिक जिम्मेदारी और संस्थागत सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बता सकती है।