West Bengal Election: हुमायूं कबीर का AIMIM से गठबंधन, ममता बनर्जी के लिए कितनी बड़ी चुनौती?

West Bengal Election: हुमायूं कबीर और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने अपने गठबंधन की घोषणा कर दी है और ये पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी TMC को चुनौती देने की कोशिश करेगा। उनके मुस्लिम वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकता है।

West Bengal Election: पश्चिम बंगाल की सियासत में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है। इस नए सियासी समीकरण ने चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। कबीर ने बताया कि उनकी पार्टी और AIMIM मिलकर पूरे पश्चिम बंगाल में 20 रैलियां करेंगी, जिसकी शुरुआत 1 अप्रैल को बहरामपुर में ओवैसी के साथ होगी।

182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी कबीर की पार्टी

हुमायूं कबीर के अनुसार, उनकी पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में राज्य की 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने ओवैसी को अपना ‘बड़ा भाई’ बताते हुए कहा कि यह गठबंधन बंगाल की राजनीति में एक मजबूत तीसरा विकल्प पेश करेगा। उनका दावा है कि यह गठबंधन उन लोगों की आवाज बनेगा, जो खुद को मुख्यधारा की राजनीति से अलग महसूस करते हैं।

सिर्फ चुनावी गठबंधन नहीं

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उनकी कोशिश है कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम समुदाय से एक सशक्त नेतृत्व उभरकर सामने आए। उन्होंने बताया कि दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर सहमति बन चुकी है। ओवैसी ने साफ किया कि यह गठबंधन केवल विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में भी राजनीतिक उद्देश्यों के लिए जारी रहेगा।

ममता बनर्जी के लिए चुनौती?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कबीर-ओवैसी गठबंधन का सबसे ज्यादा असर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर पड़ सकता है। बंगाल में मुस्लिम वोट बैंक लंबे समय से टीएमसी के साथ रहा है, लेकिन AIMIM की सक्रियता और यह नया गठबंधन उस समीकरण को चुनौती दे सकता है।

किन जिलों पर रहेगा फोकस

राज्य के जिन जिलों में मुस्लिम आबादी ज्यादा है, वहां यह गठबंधन खास फोकस कर सकता है। इनमें मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, बीरभूम और दक्षिण 24 परगना जैसे जिले शामिल हैं। इन इलाकों में मुस्लिम जनसंख्या का प्रतिशत काफी अधिक है, इसलिए माना जा रहा है कि यह गठबंधन इन्हें अपने राजनीतिक रणनीति का केंद्र बना सकता है।

 

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