May 23, 2019
ऑफबीट

इसे ही कहते हैं मरने के बाद भी सकून (सुकून) न मिलना…

डेस्क: सोशल मीडिया के दौर है और इस दौर में कभी कभार आपको वह सब देखने को मिल जाता है जिसकी आप कल्पना नहीं करते होंगे. सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरों को देखकर ऐसा एहसास होता है कि समय कहां से कहां गया है.

सोशल मीडिया के इस वायरल होती तस्वीर में दिखने वाले वाहन… पर मैं खूब बैठा हूँ… हमारे शहर में खूब चलता था और हो सकता है अभी भी कई जगह चलता हो. पर दिल्ली के आसपास मैंने इसे कभी नहीं देखा है. मुझे नाम भी ठीक ठीक याद नहीं है… शायद टेम्पो बोलते हैं… शायद कुछ लोग थ्रीव्हीलर या रिक्शा क्योंकि इसमें तीन ही पहिये होते हैं.

बैठने का मुझे अनुभव प्राप्त है. लेकिन इतना भी नहीं इसकी बारीकियां बताने लगूं. आजकल ऐसे टेम्पो नजर नहीं आते हैं. अपनी बनावट के कारण यह पहले भी चर्चा में थे. 16 टायर वाले ट्रक की आधी लम्बाई और अजीबो गरीब दिखने वाला यह टेम्पो शायद अभी दूर शहरों से गाँव तक लोगों को ले आने-जाने में इस्तेमाल होता हो.

फिलहाल सटीक जानकारी नहीं है. पर इतना जरूर हैं कि जब हम इसपर बैठते थे जो इसका चालक होता था वह तबतक सवारियां बैठाता रहता था जब तक टेम्पो खुद न कह दे (ले चलेगा या मुझे यहीं दफन करेगा)… मेरा मतलब है जैसा इसका इस फोटो में हाल किया गया है ठीक वैसे ही इससे सवारियां ढोई जाती थीं.

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इस टेम्पो में ड्राईवर आधा मोहल्ला तो बैठा ही लेता होगा. चलते समय ऐसा लगता था कि चलते चलते यह दो टुकड़ों में न बंट जाए. पर ऐसा कभी हुआ नहीं. ऐसा इसलिए लगता था कि क्योंकि इसकी लम्बाई ज्यादा होती थी और मजबूती… उसका तो पता ही नहीं है. मतलब यह है कि सवारियां ढोने के मामले में इसका यूज जान निकाल देने के तरीके से किया जाता था. वायरल होती तस्वीर में यही बताया गया है कि जब चलता था तब भी सुकून नहीं था और अब भी नहीं…

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