Thursday, October 21, 2021

1500 शिक्षकों की नौकरी पर संकट: दिल्ली में प्रदर्शन

राष्ट्रीय

केंद्र सरकार द्वारा TEQIP यानि (Technical Education Quality Improvement Programme of Government of India) प्रोग्राम की शुरुआत अप्रैल 2017 में की गई. जिसके अंतर्गत 1200 IIT और NIT से पढ़े विद्वान अध्यापकों को तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट पर उन जगहों पर अच्छी शिक्षा देने के लिए रखा गया, जहां तक उच्चतम स्तर की शिक्षा पहुंच नहीं पाती है. देश के 12 स्पेशल कैटगरी राज्यों (SCS) में इन सभी लोगों की नियुक्ति की गई. नियुक्ति के लिए एमटेक या पीएचडी में से एक डिग्री आईआईटी, एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की होना जरूरी था. वहीं मेरिट लिस्ट गेट में हासिल किए अंक और इंटरव्यू के आधार पर तय किया गया.

इन सभी शिक्षकों का दावा है कि उन्होंने अपने छात्रों को जी जान से पढ़ाया, लेकिन अब 3 साल खत्म होने पर कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने का डर सता रहा है. बेरोजगारी के डर से जूझ रहे ये शिक्षक कोई समाधान तलाश रहे हैं और पिछले कई दिनों से दिल्ली के बाराखंभा रोड पर बैठ कर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं. हालांकि इस प्रदर्शन के दौरान कई अध्यापक अपने छात्रों को ऑनलाइन क्लासेज, डाउट क्लासेज भी देते दिखे.

दरअसल शिक्षकों का कहना है कि 2017 से ये प्रोग्राम चलाया जा रहा है. देश के अंदरूनी इलाकों में जाकर बच्चों को टेक्निकल शिक्षा देते हैं. राज्य सरकार के पास जाते हैं तो वो कहते हैं कि आप केंद्र सरकार के पास जाइए आपको वहां से सैलरी मिल रही है.

वहीं इन शिक्षकों का कहना है कि 30 सितंबर के बाद भी यदि उनका कॉन्ट्रैक्ट नही बढ़ाया गया या सरकार द्वारा आश्वासन नहीं दिया गया तो भी वो इस तरह ही शांति से सरकार से अपील करते रहेंगे.

लेकिन सवाल यही है कि अब बेरोजगार होने के दो दिन बचे हैं. इसके बाद इनकी नौकरी चली जाएगी या बची रहेगी यह सिर्फ सरकार ही जानती है. लेकिन यहां पर जो सबसे अहम सवाल उठ खड़ा हुआ है वो यह है कि इन शिक्षकों के साथ- साथ उन बच्चों का क्या होगा जिनको यह शिक्षक पढ़ा रहे थे. क्योंकि सरकार ने अभी तक कोई नई भर्ती तक नहीं की है.

क्या कहते हैं शिक्षक- हमसे बातचीत में एक शिक्षक अभिषेक तिवारी ने बताया कि सरकार का यह रवैया वाकई चिंताजनक है कि कोई सरकार ऐसे कैसे कर सकती है. वहीं उनका कहना है कि हमें अपनी नौकरी के साथ- साथ उन बच्चों की भी चिंता है जिनको हम पढ़ा रहे थे. अगर हमारा कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो जाता है तो हम पढ़ा नहीं पाएंगे और ऐसे में जो मेहनत करके हमने पढ़ाया है वो बेकार जाएगा. इसके अलावा हमरे साथ उनका भी भविष्य अधर में लटक जाएगा.

क्या करे सरकार- अभिषेक कहते हैं कि अगर सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है तो इस कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाए और नहीं तो एक भर्ती का आयोजन करके हमारा टेस्ट ले और फिर हमारे अनुभव के आधार पर वरीयता देकर हमारी नियुक्ति करे. क्योंकि सरकार को अगर कॉलेज चलाना है और बच्चों को पढ़ाना है तो शिक्षकों की आवश्यक्ता होगी ना तो क्या हम यह काम नहीं कर सकते हैं. आज सरकार ने तीन साल तक हमसे सेवा ली और उसके बाद दूध से मक्खी की तरह निकाल बाहर कर दिया है तो हम क्या करें कहां जाएं. वैसे भी देश में बेरोजगारी की अलग ही समस्या है. ऐसे में हमारी नौकरी लेकर सरकार किसका फायदा कर रही है यह तो सोच से भी परे है.

Report:-Bhaskar Tiwari

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