March 25, 2019
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सरकार को SC की फटकार: अवैध रोहिंग्याओं को देश से भगाने में देरी क्यों?

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज असम सरकार को तगड़ी फटकार लगाते हुए सख्त में लहजे कहा, कि जो लोग हमारे देश के नहीं हैं ,और हमारी सीमा से वो अवैध तरीके घुस आए हैं. उनको असम की राज्य सरकार ने अपने यहां पनाह क्यों दे रखी है?

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आगे कोर्ट ने अपनी बात को कोट करते हुए कहा है कि यह फैसला काफी समय पहले ही हो चुका है कि रोहिंग्या देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं, लेकिन राज्य सरकार इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी  कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठा रही है? क्या राज्य सरकार को देश की आतंरिक सुरक्षा का मामला मजाक लगता है क्या? बता दें कि पप्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ को असम सरकार ने सूचित किया कि बीते 10 साल में विदेशी न्यायाधिकरण ने लगभग 50 हजार से अधिक लोगों को विदेशी घोषित कर दिया है.

हालांकि इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के तरफ से  मुख्य पब्लिक प्रोसिक्यूटर तुषार में ने अपनी दलील देते हुए कहा कि राज्य के कुल 6 राहत शिविरों को में लोगो 900 लोगों को हिरासत में रखा गया है. वहीं कोर्ट ने असम सरकार से कहा कि आपको बताना होगा कि राज्य में काम कर रहे विदेशी न्यायधिकरण पर्याप्त हैं या नहीं और वह किस तरह काम करते हैं. कोर्ट ने आगे अपनी बात में कहा कि हम राज्य के मुख्य सचिव को कोर्ट में पेश होने के लिए बल तो नहीं दे रहे हैं, लेकिन हम असम सरकार के हलफनाम के जरिए जानना चाहते हैं, कि राज्य में काम कर रहे विदेशी न्यायधिकरण पर्याप्त हैं नहीं दरअसल असम में अवैध रूप से रह रहे लोगों को रोकने के लिए सरकार ने नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स यानि एनआरसी का अभियान चलाया है.

यह अभियान दुनिया के सबसे बड़े अभियानों में से एक है.  यह अभियान डिटेक्ट डिलीट और डिपोर्ट के आधार पर है . इसमें इस बात का पता लगाया जाता है कि संबंधित व्यक्ति भारत का है या नहीं. अगर इसमें बात का  पता चल जाता है कि संबंधित देश भारत का नहीं है ,तो उसको देश के बाहर भेजा जाएगा . लेकिन राज्य की असम सरकार ऐसा करने में अभी तक पूरी तरह से सफल नहीं हो पाई है जिसके बाद ही कोर्ट ने असम की सरकार को तगड़ी  फटकार लगाई है. क्योंकि कोर्ट ने पिछले कुछ साल के आपाराधिक रिकार्ड को देखते हुए माना है कि देश में अवैध तरीके से रह रहे रोहिंग्या देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं.

रिपोर्ट:-भास्कर तिवारी

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