December 14, 2019
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‘संघ चाहता है कि बीजेपी-शिवसेना के साथ ही बनाए सरकार’

डेस्क: महाराष्ट्र में भले ही बीजेपी और एनसीपी का कथित गठबंधन हो गया हो और सरकार बन गयी हो लेकिन इस सरकार से बीजेपी के अंदर के ही लोग और संघ शायद खुश नहीं है. यही कारण है कि संघ ने शिवसेना को साथ लाने की कोशिश जारी राखी हुई है.

बतादें कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को अपने विधायकों से मुलाकात के समय बड़ा दावा कर दिया है. उन्होंने विधायकों से बातचीत के दौरान कहा है कि आरएसएस के नेताओं ने उनसे संपर्क किया और साथ आने को कहा. लेकिन उद्धव ठाकरे ने अपनी वही शर्ते रख दीन जोकि उन्होंने बीजेपी के सामने रखी थी. एक मीडिया रिपोर्ट शिवसेना सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि, ‘संघ चाहता है कि शिवसेना फिर साथ आये और बीजेपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बने. लेकिन उद्धव ठाकरे ने इस ऑफर को ठुकरा दिया. दरअसल बीजेपी और शिवसेना का बहुत पुराना गठबंधन है.

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दोनों पार्टियों की सामान विचारधारा होने के साथ साथ शिवसेना का आरएसएस के साथ भी संबंध रहा है. उसी का कारण है कि जब दोनों में बिखराव हुआ तो संघ ने दोनों को साथ लाने की पहल की. कुछ आरएसएस के नेताओं से बातचीत में यह भी पता चला है कि संघ को बीजेपी और एनसीपी गठबंधन की बात कुछ रास नहीं आ रही है. फिलहाल नेता ने यह भी कहा है कि राजनीति अपनी जगह होती है संघ लोगों को जोड़ने का काम करता है. महाराष्ट्र में छिड़े सियासी ड्रामे पर आरएसएस की नजर बनी हुई है और वह अभी भी परदे के पीछे से दोनों को साथ लाने की कोशिश कर रहा है. यह आरएसएस ही नहीं बीजेपी भी अभी शिवसेना के साथ आने की उम्मीद लगाये हुए है. आपको जानकारी हो शनिवार सुबह ही महाराष्ट्र में अचानक बीजेपी और एनसीपी का गठबंधन हुआ और सरकार भी बन गयी है.

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देवेंद्र फड़णवीस ने सीएम पद और एनसीपी नेता अजीत पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. हालाँकि उनकी सरकार के गठन का पूरा मामला अब सुप्रीम कोर्ट में आ गया है जहाँ रविवार को सुनवाई हुई तो कोर्ट ने सरकार गठन से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को फॉलो करने वाले कागजातों को सोमवार सुबह 10:30 बजे कोर्ट में पेश करने को कहा है. जहाँ सोमवार को इस मामले पर फिर से सुनवाई होगी.

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कोर्ट यह सुनवाई शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की जॉइंट याचिका पर कर रही है. जिसमें राज्यपाल के आदेश को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने की मांग की गयी है. साथ ही तीनों दलों ने देवेंद्र सरकार को अल्पमत की सरकार बताते हुए उनके पास पर्याप्त बहुमत होने की संख्या भी कोर्ट को बताई है. साथ ही याचिका के जरिये जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की गयी है.

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