Friday, September 24, 2021

पिता के मार्गदर्शन और अपनी बहुमुखी प्रतिभा के जरिए पहचान बना रही हैं शिखा स्वरूप

राष्ट्रीय

नई दिल्ली: कहते हैं ना प्रतिभा जिसके पास होती है वो अपने कामयाबी का रास्ता खुद बना लेते हैं. जी हां आज हम आपको जिस बहुमुखी प्रतिभा की धनी लड़की के बारे में बताने जा रहे हैं. उनका नाम है शिखा स्वरूप. वैसे तो शिखा मूल रूप से यूपी की रहने वाली हैं लेकिन शादी के अब वो छत्तीसगढ़ के भिलाई में रह रही हैं.

आपको बता दें कि शिखा ने एमबीए किया है और सिर्फ पढ़ाई करके नौकरी ही नहीं कर रही हैं. बल्कि उसके साथ – साथ उनके अंदर वो कई सारी प्रतिभाएं हैं जिससे वो अपनी खुद की पहचान बना रही हैं. शिखा स्वरुप डांस करना, पेंटिंग करना, इंटीरियर डिजाइनिंग के अलावा आर्टिफिशियल ज्वेलरी और सॉफ्ट ट्वॉयज बनाने बनाती हैं. शिखा ने हमसे बात करते हुए बताया कि उनकी पढ़ाई लिखाई सबकुछ दिल्ली में हुई है.

सबसे खास और दिलचस्प बात ये है कि इस प्रतिभा को उन्होने काफी कम उम्र में हासिल कर लिया था और उसी समय से वो लगातार ऐसी गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया. जिससे उनकी इस प्रतिभा को सम्मान मिल सके. इसकी शुरूआत शिखा ने ऑल ओड़िशा डांस कंपटीशन से किया और उसके बाद एक – एक कर अपनी सफलता की ओर बढ़ती चली गईं. यही कारण है कि शिखा को जो सम्मान मिले हैं. उसमें ज्यादातर उनको किसी एक प्रतिभा के लिए कम और मल्टी टैंलेटेड काम के लिए ज्यादा पुरस्कार दिया गया है.

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फिर चाहे इंटर कॉलेज में डांस प्रतियोगता में भाग लेना हो या फिर बाहरी मंचों पर हर जगह पर शिखा ने अपना हुनर दिखाया. जहां पर एक से अधिक कंपटीशन का आयोजन होता शिखा ने वहां पर बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. साल 2007 में शिखा ने फर्नीचर डिजाइनिंग कंपटीशन में भाग लिया और वहां पर भी अपने प्रतिभा का लोहा मनवाया. उसके बाद एक तरफ इंटीरियर डिजाइनर के रूप में खुद को आगे बढ़ा रहीं थी तो दूसरी तरफ मॉडलिंग के दुनिया में भी खुद स्थापित कर रही थीं. पहली बार साल 2011 में मिस लखनऊ का खिताब हासिल किया.

इसके बाद साल दर साल मॉडलिंग के दुनिया में खुद को आगे बढ़ाती चली गईं और एक -एक सारे खिताब को अपने नाम करती चली गईं. इसी सिलसिले को शिखा लगातार बढ़ाती जा रही हैं आपको बता दें कि शिखा ने साल 2020 में मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना परचम लहराया. इतना ही नहीं इसके अलावा शिखा ने 2 राष्ट्रीय स्तर के मल्टी टैलेंटेड पुरस्कार को भी अपने नाम किया है. 1 वुमेन टैलेंट पुरस्कार साल 2020 में ही जीता. 1 फॉरएवर स्टार बुक ऑफ वर्ल्ड 2020 को भी अपने नाम किया.

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1 अचीवर्स पुरस्कार 2021 में भी  हासिल किया. हालांकि ये प्रमुख पुरस्कार जिसका जिक्र हमने किया है. इसके अलावा सैकड़ों ऐसे पुरस्कार हैं जिसके जरिए शिखा ने दिल्ली से लखनऊ तक अपनी पहचान को स्थापित किया है. सबसे खास बात तो ये है कि शिखा ने ज्यादा पुस्कार अपनी कला और मेहनत के दम पर लिया है. शिखा ने तहलका इंडिया से बात करते हुए बताया कि हमने अपने पिता से सीखा है कि ईमानदारी से मेहनत करने पर कामयाबी आपको जरूर मिलती है. आज के समय में मैं एक शादी शुदा महिला हूं मेरे पति पेशे से सरकारी डॉक्टर हैं. तो जाहिर सी बात है कि मेरे ऊपर जिम्मेदारी ज्यादा रहती है.

आपको जितना बाहरी काम पर ध्यान देना होता है. उतना ही आपको घर पर भी ध्यान देना होता है. इसलिए चुनौती काफी ज्यादा होती है. क्योंकि मैं खुद एक प्रतिष्ठित कंपनी में काउंसलर के पद पर काम कर रही हूं और वहां पर भी अपना काम करना होता है. उसके अलावा अब मेरे टैलेंट को देखते हुए बाकी लोग भी मुझे अलग –अलग कार्यक्रम में बुलाते रहते हैं. ऐसे में समय की काफी ज्यादा कमी रहती है. इसलिए इन चीजों को मैनेज करना अपने आप काफी चुनौतीपूर्ण काम है.

पिता ने किया सपोर्ट तो पूरे हुए सपने

मेरे पिता श्याम स्वरूप लाल ने उस कहावत को सच साबित किया है जिसमें कहा जाता है कि लड़कियां पापा की परी होती हैं, तो मैं अपने पिता के लिए किसी परी से कम नहीं हूं. मैने आज तक जो सफलता हासिल की है. उसमें मेरे पिता ने पूरा सपोर्ट किया है और आज भी सपोर्ट करते हैं. इसलिए मुझे ये कहने में जरा भी गुरेज नहीं है कि सफलता के पीछे मेरे पिता का हाथ है.

आज भी मेरा पिता जी के साथ भावनात्मक जुड़ाव होता है. जैसा कि सबको पता है कि किसी भी लड़की को बाहरी दुनिया में निकल कर मॉडलिंग और ऐसे काम करना जो हजारो लोगों के नजरों में हो रहा है कितना मुश्किल होता है. ऐसे में मेरे पिता ने कहा कि बेटी जो तुम्हे करना है वो करो और यकीन मानिए मेरी इस सफलता के लिए जो आदर्श प्रेरणा हैं वो मेरे पिता हैं.

आज मैं एक शादी शुदा महिला हूं  लेकिन फिर भी मेरे पिता जी मेरा पूरा सपोर्ट करते हैं और अपनी जिस सफलता में जितनी मुझे खुशी होती है उतना ही मेरे पिता खुश होते हैं. देखिए पिता ने सपोर्ट किया मैंने कई सफलताएं हासिल की, यहां पर मैं आपको बता दूं मेरा सपना था कि जो पिता मेरे लिए इतना कुछ कर रहे हैं.

इतनी मेहनत करके मुझे कामयाब देखना चाहते हैं, तो मेरी भी जिम्मेदारी बनती थी कि मैं खुद कुछ ऐसा काम करूं कि मेरे पिता का नाम रोशन हो. इसलिए न सिर्फ मेरे लिए प्रेरणा है बल्कि मेरी सफलता के पहचान हैं.

साथ ही मैं समाज को मैसेज देना चाहती हूं कि अब समय बदल चुका है. बेटियां भी कामयाबी की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही हैं और कामयाबी हासिल कर रही हैं बस समाज को चाहिए कि वो अपनी बेटियों के हुनर को पहचानें और उनको एक मुकाम दें जिससे वो अपना टैलेंट दिखा सकें.

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