July 6, 2020
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आजादी का एक ऐसा नायक: जिसे इतिहास से भी गुमनाम करने की हुई कोशिश…

नई दिल्ली: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे नायक और हीरो की जयंती है. जिसे इतिहास में बिलकुल ही भुलाने की कोशिश की गयी. गुमनामी बाबा से लेकर उनकी जिन्दगी के कई रहस्य हैं. जिनपर आज भी पर्दा पड़ा हुआ है.

आज भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और आजाद हिन्द फ़ौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 123वीं जयंती है. उनका जन्म 23 जनवरी 1897 ओडिशा के कटक में हुआ था. नेता जी ने आजाद भारत का अन सिर्फ सपना देखा बल्कि उसे पूरा करने के लिए कई बार जेल भी गये. भारतीय आजादी में नेता अजी के योगदान को भले ही भुलाने की कोशिश की गयी हो लेकिन जितना योगदान दिखाया गया है वह भी किसी अन्य से कम नहीं है.

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नेता जी ने देश को आजाद कराने के लिए विदेशी जमीन से दिल्ली चलो का आह्वान किया. और उनकी आजाद हिन्द फ़ौज में हजारों लोग शामिल हो गये. जिका एक ही मकसद था कि देश की आजादी. सुभाष चन्द्र बोस कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे. नेताजी को आजाद भारत का पहला प्रधानमंत्री भी माना जाता है. हालाँकि इसको लेकर कई विवाद है. आजादी के बाद लाल किले के प्राचीर से तिरंगा फहराने का सपना बोस ने देखा था. लेकिन वह ऐसा कर नहीं सके.

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गांधी ने किया था विरोध

आजादी के योगदान में महात्मा गांधी के योगदान की समीक्षा नहीं की जा सकती है, लेकिन कई ऐसे मौके भी थे. जहाँ गाँधी जी ने नेताजी का विरोध किया था. 1938 में बोस कांग्रेस के अध्यक्ष बने लेकियन गांधी का उन्हें कड़ा विरोध झेलना पड़ा. उसके बाद भी उन्होंने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया. इसके बाद साल 1939 में हुए चुनाव में नेताजी फिर से कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर चुने गये.

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लेकिन गांधी जी के उग्र विरोध के कारण बोस ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया. नेताजी ने 1933 से 1936 तक यूरोप में बिताया. जहाँ वह भारत की आजादी के लिए हिटलर से भी मदद लेनी चाहि. क्योंकि हिटलर भी ब्रिटेन के खिलाफ था. नेताजी की मृत्यु को लेकर कई रहस्य है. लेकिन सच का आज तक किसी को पता नहीं चला. नेताजी की मृत्यु कोई गुमनामी बाबा के रूप में होती हुई बताता है तो कोई एक विमान हादसे में. हालांकी सच क्या है यह अभी तक सामने नहीं आया है. नेताजी के गायब होने के पीछे राजनीति षड्यंत्र भी होने की भी बातें चर्चा में रही हैं.

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