Thursday, April 15, 2021

अपनों के सहयोग और खुद की मेहनत से मिलती है सफलता – रेशमा दास

राष्ट्रीय

आज के समय में बेटियां कामयाबी के नये कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं. कोई भी फील्ड हो बेटियों ने अपनी मेहनत से सफलता हासिल की है. आज पुणे की एक ऐसी होनहार बेटी से आपको हम मिलवाने जा रहे हैं. जिसने अपनी मेहनत से घर की जिम्मेदारियों को निभाते हुए कई सफलताएं हासिल हैं.

जी हां उनका नाम है रेशमा दास. आपको बता दें कि रेशमा ने अपने मॉडलिंग की शुरूआत साल 2019 में की थी  और उसी साल रेशमा ने मिसेज पुणे इंस्पिरिएशनल 2019 का खिताब जीता.

उसके बाद रनअप इन स्टाइटल आइकॉन का भी खिताब जीता इतना ही मिसेज इंडिया 2019, मिसेज फोटोजेनिक फेस 2019, मुंबई ग्लोबल 2020, मिसेज परफेक्टनिस्ट 2020 का भी खिताब भी अपने नाम किया.

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हालांकि हमसे बात करते हुए रेशमा ने बताया कि उनकी दिलचस्पी डांसिग और पेटिंग बनाने में काफी ज्यादा है और इस विधा में उन्होने कई सारे प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल किया है.

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मेरी सफलता के पीछे मेरा परिवार है 

रेशमा ने बताया कि उनको मॉडलिंग के लिए सबसे ज्यादा सपोर्ट उनके पिता प्रफुल्ल कुमार नायक और माता खिरूपमा नायक ने किया है.

रेशमा ने कहा कि मेरे पिता ने मुझे वो आजादी जिससे मैं अपनी खुद की पहचान बनाने में कामयाब हो सकी हूं.

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आज के समय में ,मैं एक बेटी हूं, पत्नी हूं, मां हूं, बहु हूं और हर रिश्ते की अपनी – अपनी जिम्मेदारी है जिसको हमें निभाना होता है और उसी रिश्तेदारी के बीच, मैं आज के समय में एक सफल मॉडल हूं.

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जाहिर सी बात है कि इस जिम्मेदारी को पूरा करने में कोई हमारा सहयोग कर रहा है तो वो मेरे पति हैं. मेरे पति अनिल कुमार दास पेशे से सीए हैं.

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उनकी अपनी व्यस्तताएं होती हैं लेकिन इसका मतलब यह कभी नहीं हुआ कि उन्होने मेरे सपने को पूरा करने में कोई अड़चन आने दी हो.

मैं इतना कह सकती हूं इस मॉडलिंग के दुनिया में खुद की पहचान बनाने के लिए जितना मेरे माता पिता ने सपोर्ट किया है उतना ही मेरे पति भी कर रहे हैं .

महिलाओं के लिए रेशमा का संदेश

मैं अपने देश के बेटियों को कहना चाहती हूं अगर आपके अंदर कुछ कर गुजर की जाने की चाहत है,तो बाहर निकलो और अपनी खुद की पहचान बनाओ अब वो समय नहीं है कि जब बेटियां शादी करके घूँघट में रहती थीं आज की बेटियां जमाने के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए तैयार हैं.

ऐसे में आज मैं यह कह सकती हूं जो फासले बचे हैं समाज के अंदर उसको पूरा करने के लिए हम जैसी लड़कियों को आगे आना होगा तभी हम अपनी कामयाबी का लोहा मनवा पाएंगे.

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